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Bhopal: अंतरराष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली बोले- उर्दू जिंदा थी, हमेशा आबाद रहेगी, इसके वजूद को कोई खतरा नहीं
Sun, 14 Jul 2024 04:16 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 14 Jul 2024 04:16 PM IST
सार
मंजर भोपाली से अमेरिका में लिए गए एक इंटरव्यू में भारत में उर्दू के भविष्य पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में उर्दू पढ़ने, पढ़ाने, सीखने, सिखाने और आम बोलचाल में शामिल किए जाने के लिए बड़े काम हो रहे हैं।
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अमेरिका की साहित्यिक संस्था अपना इन दिनों अपना 47वा वार्षिक ग्रीष्मकालीन कन्वेंशन मना रही है।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
उर्दू मुहब्बत की जुबान है, जो लोगों के दिलों में समाई हुई है। वह हमेशा जिंदा रही है, आगे भी आबाद रहने वाली है। हिंदुस्तान में इसके चाहने वालों में लगातार इजाफा हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली से अमेरिका में जब उर्दू और हिंदुस्तान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने यह बात फख्र के साथ कही। मंजर भोपाली इन दिनों लंदन, कैनेडा, अमेरिका में आयोजित मुशायरा सीरीज का हिस्सा बने हुए हैं। इस दौरान उनकी दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया है। मंजर भोपाली से अमेरिका में लिए गए एक इंटरव्यू में भारत में उर्दू के भविष्य पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में उर्दू पढ़ने, पढ़ाने, सीखने, सिखाने और आम बोलचाल में शामिल किए जाने के लिए बड़े काम हो रहे हैं। मदरसों से लेकर कॉन्वेंट स्कूलों तक में उर्दू तालीम को बढ़ावा दिया जा रहा है। मंजर ने कहा कि अब तो मुशायरों की महफिलों में गैर उर्दू भाषा शायर भी उर्दू गजलें पढ़ रहे हैं और वे कामयाब भी हैं। मंजर भोपाली ने कहा कि उर्दू मुहब्बत की जुबान है और सबको एक सूत्र में बांधने का काम बखूबी कर रही है।
अपना कन्वेंशन का हिस्सा बने मंजर
अमेरिका की प्रतिष्ठित और स्थापित साहित्यिक संस्था अपना इन दिनों अपना 47वा वार्षिक ग्रीष्मकालीन कन्वेंशन मना रही है। जिसमें दुनियाभर के शायरों की मौजूदगी में भारत से मंजर भोपाली को शामिल किया गया है। मंजर इससे पहले भी अमेरिका के मंच आबाद कर चुके हैं। उनका यह 37वा अमेरिका दौरा है। वहां की सरकार ने मंजर भोपाली को सम्मान स्वरूप अपने देश की नागरिकता भी प्रदान की है।
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(भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट)
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अंतरराष्ट्रीय शायर मंजर भोपाली से अमेरिका में जब उर्दू और हिंदुस्तान को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने यह बात फख्र के साथ कही। मंजर भोपाली इन दिनों लंदन, कैनेडा, अमेरिका में आयोजित मुशायरा सीरीज का हिस्सा बने हुए हैं। इस दौरान उनकी दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया है। मंजर भोपाली से अमेरिका में लिए गए एक इंटरव्यू में भारत में उर्दू के भविष्य पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में उर्दू पढ़ने, पढ़ाने, सीखने, सिखाने और आम बोलचाल में शामिल किए जाने के लिए बड़े काम हो रहे हैं। मदरसों से लेकर कॉन्वेंट स्कूलों तक में उर्दू तालीम को बढ़ावा दिया जा रहा है। मंजर ने कहा कि अब तो मुशायरों की महफिलों में गैर उर्दू भाषा शायर भी उर्दू गजलें पढ़ रहे हैं और वे कामयाब भी हैं। मंजर भोपाली ने कहा कि उर्दू मुहब्बत की जुबान है और सबको एक सूत्र में बांधने का काम बखूबी कर रही है।
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अपना कन्वेंशन का हिस्सा बने मंजर
अमेरिका की प्रतिष्ठित और स्थापित साहित्यिक संस्था अपना इन दिनों अपना 47वा वार्षिक ग्रीष्मकालीन कन्वेंशन मना रही है। जिसमें दुनियाभर के शायरों की मौजूदगी में भारत से मंजर भोपाली को शामिल किया गया है। मंजर इससे पहले भी अमेरिका के मंच आबाद कर चुके हैं। उनका यह 37वा अमेरिका दौरा है। वहां की सरकार ने मंजर भोपाली को सम्मान स्वरूप अपने देश की नागरिकता भी प्रदान की है।
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(भोपाल से खान आशु की रिपोर्ट)
