फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Bhopal: In AIIMS, a mother suffering from sickle cell gave birth to twins 2 months before the due date, matern

Bhopal: एम्स में सिकल सेल पीड़ित मां ने समय से 2 महीने पहले जुड़वा बच्चों को दिया जन्म, नानी-दादी बनीं सहारा

Mon, 20 Jan 2025 08:27 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Mon, 20 Jan 2025 08:27 PM IST
सार

राजधानी भोपाल स्थित एम्स में एक सिकल सेल से पड़ीत महिला ने समय से दो माह पूर्व दो बच्चों को जन्म दिया है। बच्चे और मां पूरी तरह स्वस्थ्य हैं।  नानी और दादी ने नवजात शिशुओं की समर्पित देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं।

विज्ञापन
Bhopal: In AIIMS, a mother suffering from sickle cell gave birth to twins 2 months before the due date, matern
नवजातों के साथ नानी-दादी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल स्थित एम्स में पारिवारिक सहयोग का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है।  जब सिकल सेल से पीड़ित एक मां ने निर्धारित समय से दो महीने पहले जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। पारिवारिक देखभाल और सहयोग के एक उल्लेखनीय प्रदर्शन में, नानी और दादी ने मां के प्रसवोत्तर स्वास्थ्य लाभ के दौरान नवजात शिशुओं की समर्पित देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं। इन जुड़वा बच्चों का जन्म निर्धारित समय से दो महीने पहले हुआ था, लेकिन अस्पताल की देखभाल और परिवारजनों के सहयोग से बच्चे एवं मां पूरी तरह स्वस्थ हैं। 
विज्ञापन


जानें क्या है सिकल सेल की बीमारी
सिकल सेल रोग (SCD) एक आजीवन रक्त विकार है जो माता-पिता से जीन के माध्यम से विरासत में मिलता है। सिकल सेल रोग हीमोग्लोबिन (ही-मुह- ग्लो -बीएन) नामक लाल रक्त कोशिका के एक हिस्से को प्रभावित करता है। यह शरीर के विभिन्न भागों में ऑक्सीजन ले जाने में मदद करता है। सामान्य लाल रक्त कोशिकाएं गोल, चिकनी होती हैं और शरीर में आसानी से चलती हैं। सिकल सेल रोग से पीड़ित लोगों में कठोर, चिपचिपी, केले के आकार की लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं। इन सिकल कोशिकाओं को छोटी रक्त वाहिकाओं से होकर गुज़रने में कठिनाई होती है। वे ढेर हो सकती हैं और वाहिकाओं को अवरुद्ध कर सकती हैं।जब रुकावट होती है, तो रक्त शरीर के कुछ हिस्सों में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं ले जा पाता है।
विज्ञापन


नवजातों को निरंतर देखभाल और प्रेम मिला
एम्स के डायरेक्टर डॉ. अजय सिंह ने कहा है कि दादी-नानी की उपस्थिति न केवल भावनात्मक बल्कि शारीरिक सहायता भी प्रदान करती है, जिससे नवजातों को निरंतर देखभाल और प्रेम मिलता है। एम्स भोपाल में हम दादी-नानी को कंगारू मदर केयर में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जो समय पूर्व जन्मे शिशुओं के स्वास्थ्य में बेहद सहायक है। कंगारू मदर केयर (केएमसी) एक ऐसी विधि है जिसमें मां और नवजात शिशु के बीच त्वचा-से-त्वचा का संपर्क होता है। यह विधि विशेष रूप से समय से पहले जन्मे या कम वजन वाले बच्चों के लिए प्रयोग की जाती है। यह पद्धति शिशु मृत्यु दर को कम करने और बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक होती है। इस मामले में परिवार ने इस सुविधा का पूरा लाभ उठाया, जहां दादी और नानी दोनों को बच्चों की देखभाल के लिए पूर्णकालिक प्रवेश की अनुमति दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed