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Bhopal: सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अतिथि विद्वानों ने सरकार से लगाई गुहार, जाने क्या है कोर्ट का आदेश

Sun, 31 Aug 2025 07:02 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sun, 31 Aug 2025 07:02 PM IST
सार

अतिथि विद्वानों ने प्रदेश सरकार से अपने स्थाइत्व एवं फिक्स मासिक वेतन के लिए एक बार फिर से गुहार लगाइ है। अतिथि विद्वानों ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा की ऐसे ऐतिहासिक निर्णय पुरे देश में लागू होने चाहिए और उच्चतम न्यायालय का सम्मान करते हुए फिक्स मासिक वेतन देना चाहिए। 

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Bhopal: Guest scholars appealed to the government regarding the Supreme Court's decision, know what the court'
अतिथि विद्वानों का पूर्व में किया गया प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में रिक्त पदों के विरुद्ध वर्षों से सेवा देने वाले अतिथि विद्वानों ने प्रदेश सरकार से अपने स्थायित्व एवं फिक्स मासिक वेतन के लिए एक बार फिर से गुहार लगाई है। इस बार अतिथि विद्वान महासंघ ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे ऐतिहासिक निर्णय पूरे देश में लागू होने चाहिए और उच्चतम न्यायालय का सम्मान करते हुए फिक्स मासिक वेतन देना चाहिए।

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गौरतलब है कि गुजरात के गेस्ट फैकल्टी यूनियन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी की काम हम नियमित प्राध्यापक जैसे ही करते हैं और योग्यता भी रखते हैं पर उसके अनुसार वेतन बहुत कम एवं सुविधा ना के बराबर इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा की जब योग्यता एवं अनुभव बराबर है वर्क भी बराबर है तो वेतन सुविधा में असमानता क्यों? निर्देश देते हुए कहा की शिक्षकों को सम्मानित वेतन ना देने से ज्ञान का महत्व घटता है और समान काम के लिए न्यूनतम वेतन देने का आदेश जारी कर दिया इसी को लेकर एमपी के अतिथि विद्वानों में फिक्स मासिक वेतन एवं पैसे बढ़ोतरी की आशा जागी है।
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मंत्रों का जाप करना काफी नहीं 
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ सार्वजनिक कार्यक्रमों में 'गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु... मंत्रों का जाप करना काफी नहीं है। अगर हम इस मंत्र में विश्वास करते हैं, तो यह हमारे व्यवहार में भी दिखना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें कहीं आपके अतिथि विद्वानों का अपमान तो नहीं हो रहा। उनको फिक्स मासिक वेतन एवं भविष्य सुरक्षा देना सरकारों की नैतिक जिम्मेदारी होती है।
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महिला अतिथि विद्वानों ने कहा- हम भी लाडली बहना
इधर, महिला अतिथि विद्वानों ने भी सरकार से गुहार लगा दीं है। अतिथि विद्वान महासंघ की महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. नीमा सिंह ने कहा की प्रदेश की सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी उच्च शिक्षित नेट पीएचडी योग्यता धारी बहने अतिथि विद्वान है लेकिन 20-25 वर्ष से अनिश्चित भविष्य के बावजूद सेवा कर रही है और सरकार ध्यान ही नहीं दें रही। डॉ. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री तत्काल निर्णय लेने की कृपा करें अवसाद में जीवन बीत रहा है।

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फिक्स मासिक वेतन का आदेश जारी करें
अतिथि विद्वान महासंघ के उपाध्यक्ष डॉ. अविनाश मिश्रा ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय का ये निर्णय काबिले तारीफ है। ऐसे निर्णय ऐतिहासिक होते हैं, जो किसी एक याचिकाकर्ता या राज्य सरकार को नहीं बल्कि पूरे देश के सिस्टम पर लागू होते है। मुख्यमंत्री संवेदनशील होकर विद्वानों के स्थायित्व और फिक्स मासिक वेतन का आदेश जारी करें।

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योग्य हैं अनुभवी हैं फिर भी भविष्य सुरक्षित नहीं
मीडिया प्रभारी डॉ. आशीष पांडेय ने कहा है कि प्रवेश, परीक्षा, प्रबंधन, अध्यापन, नैक, मूल्यांकन, रूसा आदि समस्त कार्य अतिथि विद्वान ही करते है। कई जगह प्राचार्यों का भी दायित्व निभा रहे हैं विद्वान। योग्य हैं अनुभवी हैं फिर भविष्य सुरक्षित नहीं। अब और परीक्षा ना लें शोषण का प्रतीक फॉलेन आउट शब्द को विलोपित करें एवं शोषणकारी शब्द अतिथि हटाए। हरियाणा सरकार जैसे ऐतिहासिक निर्णय प्रदेश सरकार को करना चाहिए।

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