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Bhopal: एमपी के भूजल स्तर में आई गिरावट, 60% पानी खत्म, पूर्व सीएम बोले-आने वाली पीढ़ियों पर गंभीर जल संकट

Thu, 07 Aug 2025 05:58 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Thu, 07 Aug 2025 05:58 PM IST
सार

मध्यप्रदेश ने अपने भूजल का 60 प्रतिशत दोहन कर लिया है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि भूजल के मामले में मध्य प्रदेश खतरनाक स्थिति की तरफ बढ़ रहा है और समय रहते इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट में धकेल देंगे।

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Bhopal: Groundwater level in MP has fallen, 60% water is gone, former CM said – serious water crisis for the c
पूर्व सीएम कमलनाथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एमपी में भूजल स्तर में आ रही गिरावट पर पूर्व सीएम कमलनाथ ने सवाल खडे़ किए हैं। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के आधार पर कहा कि मध्यप्रदेश ने अपने भूजल का 60 प्रतिशत दोहन कर लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भूजल के मामले में मध्य प्रदेश खतरनाक स्थिति की तरफ बढ़ रहा है और समय रहते इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया तो हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट में धकेल देंगे।
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भूजल स्तर में गिरावट के बड़े कारण
कमलनाथ ने कहा कि पानी का अनियंत्रित दोहन, निरंतर खोदे जा रहे बोरवेल, बढ़ती आबादी और जल संचय की कमी भूजल स्तर में गिरावट के बड़े कारण हैं। इंदौर और रतलाम जिले पानी के अत्यधिक दोहन की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। प्रदेश का पश्चिमी हिस्सा विशेष रूप से भूजल दोहन के मामले में अलार्मिंग स्तर पर है।
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इस संकट के लिए असंतुलित जल उपयोग जिम्मेदार
कमलनाथ ने कहा कि हमारे राज्य ने अब तक अपने भूजल संसाधनों का साठ प्रतिशत दोहन कर लिया है और उन्होंने यह भी बताया कि भोपाल, इंदौर, रतलाम जैसे शहर ‘क्रिटिकल’ या ‘ओवर-एक्सप्लॉइटेड’ श्रेणियों में आ चुके हैं। उन्होंने इस संकट के लिए असंतुलित जल उपयोग को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि हम जितना पानी जमीन से निकाल रहे हैं, उतना पानी जमीन को वापस नहीं दे रहे। इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने पारंपरिक जल स्रोतों जैसे कुओं और तालाबों को पुनर्जनन करने और आधुनिक भूजल रिचार्ज तकनीकों को बड़े पैमाने पर लागू करने की वकालत की। कमलनाथ ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।


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भोपाल, इंदौर, रतलाम जैसे शहर ‘क्रिटिकल
दरसल केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के तहत केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य प्रदेश में भूजल दोहन की स्थिति चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 2023 तक 58.75% भूजल का दोहन हो चुका था। रिपोर्ट्स के अनुसार, इंदौर और भोपाल में भूजल स्तर क्रिटिकल स्थिति में है। केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार मध्यप्रदेश में 90% भूजल का उपयोग कृषि के लिए, 9% घरेलू उपयोग और 1% औद्योगिक उपयोग के लिए होता है। अनियंत्रित बोरवेल, बढ़ती आबादी, और जल संचय की कमी को भूजल स्तर में गिरावट का प्रमुख कारण बताया गया है। जल शक्ति मंत्रालय भी अनियंत्रित दोहन को भूजल संकट का मुख्य कारण मानता है।



 
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