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Bhopal: भोपाल के 5 स्थानों पर मियावाकी तकनीक से विकसित किए जाएंगे जंगल, कलेक्टर ने दिए सभी विभागों को टारगेट

Mon, 10 Mar 2025 06:01 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Mon, 10 Mar 2025 06:01 PM IST
सार

Miyawaki technology:  भोपाल जिले में मियावाकी तकनीकी से जंगल विकसित किए जाएंगे।भोपाल कलेक्टर ने इसे लेकर सभी विभागों को टारगेट दिया है। इसके लिए जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में लगभग दो लाख पौधारोपण किया जाएगा।

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Bhopal: Forests will be developed using Miyawaki technology at 5 places in Bhopal, the collector has given tar
कलेक्ट्रेट में बैठक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल जिले में मियावाकी तकनीकी से जंगल विकसित किए जाएंगे। इसे लेकर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में आगामी समय में वृक्षारोपण के लिए स्थानों के चयन को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी विभागों के लिए वृक्षारोपण के टारगेट के अनुरूप स्थानों का चयन किया गया। तयारियों के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए। 
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इन इन क्षेत्रों में विकसित किया जाएंगे जंगल
भोपाल जिले में ग्राम पंचायत फंदा एंव जनपद पंचायत बैरसिया में लगभग 121 स्थानों पर लगभग 50 हजार से अधिक एवं नगर निगम भोपाल द्वारा 7 से 8 स्थानों पर लगभग डेढ़ लाख से अधिक पौधारोपण किया जाएगा। जिसके अंतर्गत ग्राम कजलीखेड़ा, आदमपुर छावनी लैंड फिल साइट, जंबूरी मैदान, बीएचएचईएल प्लाटेंशन साइट की गैप फिलिंग, कलियासोत नदी के किनारे दोनो तरफ, कैरिया कॉलेज के पीछे, सूरज नगर, बड़ा तालाब, छोटा तालाब के समीप, एयरपोर्ट क्षेत्र में, पक्षी विहार काली बाड़ी, बरखेड़ा पठानी, भानपुर नाले से लगकर, छोटा तालाब डांडी पार्क, प्रियदर्शिनी पार्क, लहारपुर डेम के पास, चिरायु के सामने भैसाखेड़ी एवं पुलिस ट्रेनिंग अकेडमी भौंरी कान्हा सैंया में वृक्षारोपण किया जाएगा। 
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सामाजिक संस्थाओं का लेंगे सहयोग
सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से भोपाल जिले में मियावाकी तकनीकी से जंगल विकसित किए जाएंगे। बैठक में राम आस्था मिशन फाउंडेशन के द्वारा भोपाल जिले के 5 स्थानों पर मियावाकी तकनीक से घने जंगल विकसित करने के लिए भोपाल एयरपोर्ट क्षेत्र कलिया सोत, केरवा डेम, बैरसिया की ग्राम पंचायत बर्रीखेड़ा एवं सूखी सेवनिया की गौशालाओं के स्थान का चिन्हांकन किया गया है। आस्था फाउंडेशन के द्वारा मियावाली तकनीकी के इंडियन वर्जन के अंतर्गत शहर के गीले कचरे, तालाब से निकलने वाली जल कुंभी, मंदिरों से निकलने वाले फल-फूलों के वेस्ट, गौशालाओं के जैविक खाद मृत पशुओं के शरीर का उपयोग कर जंगल विकसित किए जाएंगे।
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जाने क्या मियावाकी तकनीक
आसान भाषा में समझें तो मियावाकी तकनीक एक छोटी सी जगह में जंगल उगाने का बेहतरीन तरीका है। मियावाकी जंगल को खास प्रक्रिया के जरिए उगाया जाता है, ताकि ये हमेशा हरे-भरे रहें। जंगल उगाने के इस खास तरीके को जापान के बॉटेनिस्ट अकीरा मियावाकी ने खोजा था। अकीरा का मानना था कि चर्च और मंदिर जैसी धार्मिक जगहों पर पौधे अपने-आप पैदा होते हैं, यही वजह है कि ये लम्बे समय तक बरकरार रहते हैं। इसी सोच के साथ मियावाकी तकनीक की नींव पड़ी। इस तकनीक से पौधे लगाने के लिए सबसे पहले उस जगह की आबोहवा के अनुसार पौधों को चुनाव किया जाता है। अगर बीज के जरिए पौधे उगार वहां पर लगाने की कोशिश की जा रही है तो ध्यान रखना होगा कि उन्हें उसी मिट्टी में पहले नर्सरी में उगाया गया हो। फिर उसे उस जगह लगाया जाए जहां जंगल को विकसित करना चाहते हैं। इस तरह पेड़ों को वही मिट्टी मिलेगी जिसमें वो अब तक पनपा है. इस तरीके से इसे घर के गार्डन में भी जंगल उगाया जा सकता है, अगर बड़ा हिस्सा है तो।



यह है पूरी प्रॉसेस
जिस जगह इस तकनीक से जंगल लगाना है वहां की मिट्टी में जैविक खाद, भूसा, नारियल का जूट डालकर उसकी उर्वरता बढ़ाई जाती है। इसके बाद आधे-आधे फीट की दूरी पर खाद डालकर पौधों को लगाया जाता है। पौधों को तीन लेयर में रखा जाता है. तीन तरह के पौधे लगाए जाते हैं। इनमें झाड़ीनुमा, फिर मध्यम आकार के पौधे और मध्यम से थोड़े बड़े पौधे लगाए जाते हैं। पौधों को लगाने के बाद जमीन पर घास और टूटी हुई पत्तियां डाली जाती हैं। ये सूरज की तेज धूप से खत्म होने वाली नमी को रोकता है।नतीजा मिट्टी में नमी बरकरार रहती है और ये हरे-भरे रहते हैं।
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