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Bhopal: दूसरे दिन भी डॉक्टरों ने जताया विरोध,जलाई अमानक दवाओं की सांकेतिक होली,नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को घेरा
Fri, 21 Feb 2025 07:39 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Fri, 21 Feb 2025 07:39 PM IST
सार
Doctors protested: शुक्रवार को राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के अलग-अलग अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टर्स ने प्रतीकात्मक रूप से अमानक दवाइयों की होली जलाकर विरोध दर्ज कराया। चिकित्सकों के विरोध को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा है।
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जीएमसी भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रदेशभर के सरकारी डॉक्टर अपनी लंबित मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को राजधानी भोपाल समेत प्रदेश के अलग-अलग अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टर्स ने प्रतीकात्मक रूप से अमानक दवाइयों की होली जलाकर विरोध दर्ज कराया। चिकित्सकों के विरोध को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा है। उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि डॉक्टरों की हड़ताल सरकार के लिए चेतावनी। MP के सभी जिलों के 15 हजार सरकारी डॉक्टर ने 24 और 25 फरवरी को अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की चेतावनी दी है। MP सरकार को चाहिए कि डॉक्टर की मांगों पर गंभीरता से विचार करके सही निर्णय ले।
मौजूद दवाओं की पोटेंसी कम
शुक्रवार को भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने अमानक दवाईयों की सांकेतिक होली जलाई। इस दौरान चिकित्सा महासंघ के संयोजक डॉ राकेश मालवीय ने कहा कि अमानक हम उन दवाइयों को मानते हैं, जिनमें मौजूद दवा की पोटेंसी कम होती है। मान लीजिए कि हमें पैरासिटामोल 500 मिलीग्राम चाहिए, लेकिन यदि उसमें केवल 300 मिलीग्राम ही हो, तो ऐसी दवा का मरीज को कोई लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी दवाइयों को अमानक कहा जाता है।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों उपयोग हो रही अमानक दवाएं
डॉ मालवीय ने बताया कि हाल ही में, पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में हजारों जीवनरक्षक दवाइयां और मल्टीविटामिन तक अमानक पाई गईं। ये दवाइयां मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में उपयोग की जा रही थीं, जहां लाखों लोग इलाज करवाने आते हैं। उन्होने कहा कि हमने इस मुद्दे को बहुत प्रमुखता से उठाया, लेकिन इस गंभीर अपराध पर आवश्यक आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के बजाय केवल कुछ दवाइयों को कुछ समय के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। डॉ. राकेश मालवीय ने बताया कि भारत की सर्वश्रेष्ठ प्रयोगशाला में इन दवाइयों की जांच की गई, जहां से उन्हें अमानक घोषित किया गया। जिन-जिन स्थानों पर ये दवाइयां पाई गईं वहां इनकी आपूर्ति रोक दी गई है। लेकिन हमारा सवाल यह है कि ये अमानक दवाइयां सरकारी तंत्र और सरकारी अस्पतालों में कैसे पहुंचीं। यदि ये दवाइयां आ भी गईं, तो इन पर उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
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चिकित्सकों की प्रमुख मांगे
1- मंत्रिपरिषद की 4 अक्टूबर की बैठक के निर्णयों को तत्काल लागू किया जाए।
2-नीतिगत, तकनीकी और चिकित्सकीय विषयों के निर्धारण के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए, जिसमें महासंघ के पदाधिकारी व विभागीय अधिकारी शामिल हों।
3- चिकित्सा शिक्षकों को सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ और मूल वेतन का पुनर्निर्धारण दिया जाए।
4-समयमान और चयन वेतनमान के आदेश एक माह में लागू किए जाएं।
5- स्वीकृत वेतनमान संबंधी आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
6- लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में प्रशासनिक हस्तक्षेप समाप्त किया जाए।
7- प्रशासनिक पदों पर वरिष्ठता के आधार पर तकनीकी विशेषज्ञ चिकित्सकों और चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति हो।
8-चिकित्सकों और जूनियर डॉक्टरों को कार्यस्थल पर सुरक्षा व अनुकूल वातावरण दिया जाए।
9- चिकित्सकों की मूलभूत समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए।
आगे का कार्यक्रम
22 फरवरी, शनिवार प्रदेश के समस्त चिकित्सक सामूहिक उपवास रखेंगे एवं मास्क पहनकर भोजन अवकाश में दोपहर एक घंटे 1.00 से 2.00 तक अपने कार्यस्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे ।
24 फरवरी, सोमवार प्रदेश के समस्त चिकित्सक दोपहर 12:30 से 1 :30 तक 1 घंटे तक कार्यस्थल के बहार प्रदर्शन करेंगे।
25 फरवरी, मंगलवार प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा।
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मौजूद दवाओं की पोटेंसी कम
शुक्रवार को भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने अमानक दवाईयों की सांकेतिक होली जलाई। इस दौरान चिकित्सा महासंघ के संयोजक डॉ राकेश मालवीय ने कहा कि अमानक हम उन दवाइयों को मानते हैं, जिनमें मौजूद दवा की पोटेंसी कम होती है। मान लीजिए कि हमें पैरासिटामोल 500 मिलीग्राम चाहिए, लेकिन यदि उसमें केवल 300 मिलीग्राम ही हो, तो ऐसी दवा का मरीज को कोई लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी दवाइयों को अमानक कहा जाता है।
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प्रदेश के सरकारी अस्पतालों उपयोग हो रही अमानक दवाएं
डॉ मालवीय ने बताया कि हाल ही में, पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में हजारों जीवनरक्षक दवाइयां और मल्टीविटामिन तक अमानक पाई गईं। ये दवाइयां मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में उपयोग की जा रही थीं, जहां लाखों लोग इलाज करवाने आते हैं। उन्होने कहा कि हमने इस मुद्दे को बहुत प्रमुखता से उठाया, लेकिन इस गंभीर अपराध पर आवश्यक आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के बजाय केवल कुछ दवाइयों को कुछ समय के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। डॉ. राकेश मालवीय ने बताया कि भारत की सर्वश्रेष्ठ प्रयोगशाला में इन दवाइयों की जांच की गई, जहां से उन्हें अमानक घोषित किया गया। जिन-जिन स्थानों पर ये दवाइयां पाई गईं वहां इनकी आपूर्ति रोक दी गई है। लेकिन हमारा सवाल यह है कि ये अमानक दवाइयां सरकारी तंत्र और सरकारी अस्पतालों में कैसे पहुंचीं। यदि ये दवाइयां आ भी गईं, तो इन पर उचित कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
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चिकित्सकों की प्रमुख मांगे
1- मंत्रिपरिषद की 4 अक्टूबर की बैठक के निर्णयों को तत्काल लागू किया जाए।
2-नीतिगत, तकनीकी और चिकित्सकीय विषयों के निर्धारण के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए, जिसमें महासंघ के पदाधिकारी व विभागीय अधिकारी शामिल हों।
3- चिकित्सा शिक्षकों को सातवें वेतनमान का वास्तविक लाभ और मूल वेतन का पुनर्निर्धारण दिया जाए।
4-समयमान और चयन वेतनमान के आदेश एक माह में लागू किए जाएं।
5- स्वीकृत वेतनमान संबंधी आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
6- लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में प्रशासनिक हस्तक्षेप समाप्त किया जाए।
7- प्रशासनिक पदों पर वरिष्ठता के आधार पर तकनीकी विशेषज्ञ चिकित्सकों और चिकित्सा शिक्षकों की नियुक्ति हो।
8-चिकित्सकों और जूनियर डॉक्टरों को कार्यस्थल पर सुरक्षा व अनुकूल वातावरण दिया जाए।
9- चिकित्सकों की मूलभूत समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए।
आगे का कार्यक्रम
22 फरवरी, शनिवार प्रदेश के समस्त चिकित्सक सामूहिक उपवास रखेंगे एवं मास्क पहनकर भोजन अवकाश में दोपहर एक घंटे 1.00 से 2.00 तक अपने कार्यस्थल के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे ।
24 फरवरी, सोमवार प्रदेश के समस्त चिकित्सक दोपहर 12:30 से 1 :30 तक 1 घंटे तक कार्यस्थल के बहार प्रदर्शन करेंगे।
25 फरवरी, मंगलवार प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन प्रारंभ किया जाएगा।
