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Bhopal: डीएमई डॉ. अरुणा कुमार की नियुक्ति के विरोध में डॉक्टरों ने खोला मोर्चा, जीएमसी में किया विरोध प्रदर्शन

Sat, 03 May 2025 05:55 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sat, 03 May 2025 05:55 PM IST
सार

डीएमई की  नियुक्ति को रद्द करने की मांग जूनियर डॉक्टर्स और मेडिकल टीचर्स कर रहें हैं। शनिवार को हमीदिया अस्पताल परिसर में चिकित्सकों ने विरोध प्रदर्शन किया। विधान सभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी चिकित्सकों की मांग का समर्थन किया।

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Bhopal: Doctors opened front against the appointment of DME Dr. Aruna Kumar, protested in GMC
चिकित्सकों का विरोध प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डॉ. अरुणा कुमार को डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) बनाया है जिसके बाद से प्रदेशभर में जूनियर डॉक्टर्स और मेडिकल टीचर्स में आक्रोश है। लगातार डॉ. अरुण कुमार की नियुक्ति को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। शनिवार दोपहर 12 बजे हमीदिया अस्पताल परिसर स्थित नई ब्लॉक 1 और 2 के बाहर बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। इधर विधान सभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी चिकित्सकों की मांग का समर्थन किया।
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निष्पक्ष व विवादमुक्त छवि के व्यक्ति को करें नियुक्त
गांधी मेडिकल कॉलेज से जुड़े जूनियर डॉक्टर्स, मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) और सीनियर फैकल्टी सदस्यों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लिए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि डॉ. अरुणा कुमार की नियुक्ति तुरंत रद्द की जाए और इस पद पर निष्पक्ष व विवादमुक्त छवि के व्यक्ति को नियुक्त किया जाए।
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व्यक्तिगत विरोध नहीं
भोपाल से जूडा अध्यक्ष डॉ. कुलदीप गुप्ता ने कहा कि हमारा विरोध व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि उनकी कार्यशैली और कार्यकाल के दौरान उत्पन्न विवादों को लेकर है। हम नहीं चाहते कि प्रदेश की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था के शीर्ष पद पर कोई विवादित व्यक्ति बैठे। उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में कई योग्य और स्वच्छ छवि वाले वरिष्ठ चिकित्सक हैं, जो इस पद के लिए अधिक उपयुक्त हैं।
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डिप्टी सीएम के पहुंची है शिकायत
एक दिन पहले एमटीए और जूडा (जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन) के प्रतिनिधियों ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। जूडा ने आरोप लगाया कि डॉ. अरुणा कुमार के पूर्व प्रशासनिक कार्यकाल में एक महिला जूनियर डॉक्टर ने मानसिक प्रताड़ना के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाया था। इसके अतिरिक्त, उनके व्यवहार के चलते कॉलेज परिसर में कई बार तनावपूर्ण स्थिति बनी। वरिष्ठ महिला चिकित्सकों ने तो एक समय सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी तक दे दी थी।

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नेता प्रतिपक्ष का मिला समर्थन
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी चिकित्सकों की मांग का समर्थन किया। उन्होने कहा कि पहले नर्सिंग घोटाले में संलिप्त रहे डॉ. जितेंद्र शुक्ला को डीएमई नियुक्त किया गया और मेरे द्वारा सवाल उठाने के तत्काल बाद उन्हें हटा दिया गया। लेकिन अब एक पीजी डॉक्टर की आत्महत्या के बाद विवादों में आईं डॉ. अरुणा कुमार को डीएमई की कुर्सी पर बैठा दिया गया है। आदेश जारी होते ही जूडा, एमटीए समेत पूरा मेडिकल सेक्टर विरोध में उतर आया है। उन्होने कहा कि आखिर सरकार की मंशा क्या है? क्या प्रदेश की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है? हर बार ऐसे विवादित और असंवेदनशील अफसरों को ही इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी जाती है?

पूरा घटनाक्रम
1- 2017 में उनके खिलाफ नर्सिंग स्टाफ ने विरोध प्रदर्शन किया था।
2- 2019 में छात्रों के विरोध के चलते उन्हें डीन पद से हटाया गया था।
3- 2023 में जूनियर डॉक्टर की आत्महत्या मामले में नाम सामने आते ही उन्हें पद से हटा दिया गया था।
 
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