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Tiger Death In MP: टाइगर स्टेट मध्यप्रदेश में बढ़ रहे बाघों की मौत के आंकड़े, अब तक 38 ने गंवाई जान
Wed, 29 Nov 2023 01:25 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Wed, 29 Nov 2023 01:25 PM IST
सार
Tiger Death In MP: मध्यप्रदेश अपने जंगलों और टाइगर के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन यहां लगातार हो रही बाघों की मौत ने सबको चिंता में डाल दिया है। अभी साल पूरा भी नहीं हुआ है और अब तक 38 बाघों की मौत हो चुकी है।
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बाघ (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
टाइगर स्टेट का दर्जा रखने वाला मध्यप्रदेश बाघों की मौत के मामले में भी सबसे आगे है। वर्ष 2023 में नवंबर तक यहां कुल 38 बाघों की मौत अब तक हो चुकी है। जो देश में अन्य राज्यों के मुक़ाबले सबसे ज्यादा है। इसके बाद पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र का नंबर आता है। वहीं उतराखंड इस मामले में तीसरे नंबर पर है।
एनटीसीए की रिपोर्ट के अनुसार देश में इस साल अब तक कुल 163 बाघों की मौत हो चुकी है। जबकि 2022 में 121 बाघों ने अपनी जान गंवाई थी। इनमें मध्यप्रदेश के 33 बाघ भी शामिल थे। बाघ मृत्यु दर घटना के स्थान के आधार पर मृत्यु दर डेटा को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। बाघ अभ्यारण्य के अंदर हुई बाघों की मृत्यु, बाघ अभ्यारण्य के बाहर घटित घटनाएं और बाघ की खाल/हड्डी की जब्ती।
ऐसे होती है मौत की रिपोर्ट
किसी भी बाघ की मृत्यु को डेटाबेस में दर्ज नहीं किया जाता है, जब तक कि राज्य सरकार का कोई प्रामाणिक स्रोत बाघ की मृत्यु की रिपोर्ट नहीं करता है। भले ही किसी बाघ की मौत की सूचना तीसरे पक्ष के स्रोतों से एनटीसीए को दी जाती है, इसे दर्ज करने से पहले राज्य से पुष्टि प्राप्त की जाती है।
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ये हैं कारण
मध्यप्रदेश में टाइगर की संख्या भी सबसे अधिक है। यहां 785 टाइगर हैं। ऐसे में टेरेटरी की लड़ाई में बाघों की जान जा रही है। इसके साथ ही बाघों का शिकार भी एक सबसे बड़ा कारण है। कुछ बाघों ने बीमारी के चलते अपनी जान खो दी है।
कब और कहां हुई बाघों की मौत
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एनटीसीए की रिपोर्ट के अनुसार देश में इस साल अब तक कुल 163 बाघों की मौत हो चुकी है। जबकि 2022 में 121 बाघों ने अपनी जान गंवाई थी। इनमें मध्यप्रदेश के 33 बाघ भी शामिल थे। बाघ मृत्यु दर घटना के स्थान के आधार पर मृत्यु दर डेटा को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। बाघ अभ्यारण्य के अंदर हुई बाघों की मृत्यु, बाघ अभ्यारण्य के बाहर घटित घटनाएं और बाघ की खाल/हड्डी की जब्ती।
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ऐसे होती है मौत की रिपोर्ट
किसी भी बाघ की मृत्यु को डेटाबेस में दर्ज नहीं किया जाता है, जब तक कि राज्य सरकार का कोई प्रामाणिक स्रोत बाघ की मृत्यु की रिपोर्ट नहीं करता है। भले ही किसी बाघ की मौत की सूचना तीसरे पक्ष के स्रोतों से एनटीसीए को दी जाती है, इसे दर्ज करने से पहले राज्य से पुष्टि प्राप्त की जाती है।
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ये हैं कारण
मध्यप्रदेश में टाइगर की संख्या भी सबसे अधिक है। यहां 785 टाइगर हैं। ऐसे में टेरेटरी की लड़ाई में बाघों की जान जा रही है। इसके साथ ही बाघों का शिकार भी एक सबसे बड़ा कारण है। कुछ बाघों ने बीमारी के चलते अपनी जान खो दी है।
कब और कहां हुई बाघों की मौत
- 2 जनवरी कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 4 जनवरी पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर
- 11 जनवरी सिवनी के बाहर
- 12 जनवरी सतपुड़ा रिजर्व के अंदर
- 24 जनवरी कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 24 जनवरी शहडोल का गोदावलके बाहर
- 31 जनवरी पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर
- 3 फरवरी - कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 4 फरवरी - फीमेल उमरिया रेंज के बाहर
- 3 मार्च - फीमेल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 12 मार्च - फीमेल संजय दुबरी नेशनल पार्क के अंदर
- 22 मार्च फीमेल कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 30 मार्च फीमेल कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 1 अप्रैल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 3 अप्रैल मेल बांधव टाइगर रिजर्व के अंदर
- 5 अप्रैल फीमेल का कान्हा टाइगर रिजर्व के अंदर
- 7 मई बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 9 मई पेंच टाइगर रिजर्व के अंदर
- 17 मई शहडोल नॉर्थ व्योहारी इलाके में बाहरी एरिया
- 18 मई फीमेल बांधवगढ़ के अंदर
- 22 मई पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर
- 4 जून मेल बालाघाट
- 17 जून फीमेल कान्हा नेशनल पार्क के अंदर
- 17 जून मेल नौरादेही अभयारण्य
- 22 जून अब्दुल्लागंज
- 26 जून सतपुड़ा टाइगर रिजर्व
- 16 जुलाई कान्हा
- 21 जुलाई - मानपुर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 31 जुलाई कान्हा टाइगर रिजर्व
- 8 अगस्त - मंडला सिवनी के बाहर
- 9 अगस्त - फीमेल बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 27 अगस्त मानपुर बांधवगढ़ के अंदर
- 15 सितंबर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 20 सितंबर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंदर
- 27 अक्टूबर चित्रकूट फॉरेस्ट डिविजन के बाहर
- 1 नवंबर छिंदवाड़ा सर्कल के अंदर
- 8 नवंबर पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर
- 23 नवंबर शहडोल जैतपुर रेंज के अंदर।
