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Bhopal Aiims: प्रोस्टेट कैंसर को पहचानना होगा आसान, यूरिन जांच से ट्रेस होगा कैंसर, एम्स में हो रहा शोध
Sun, 23 Feb 2025 06:08 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sun, 23 Feb 2025 06:08 PM IST
सार
Bhopal Aiims: दुनियाभर में पुरुषों में दूसरा सबसे आम प्रोस्टेट कैंसर की सटीक पहचान करना आसाान होने वाला। इसे लेकर एम्स भोपाल में एक शोध किया जा रहा है। चिकित्सकों का दावा है कि यूरीन टेस्ट से प्रोटेस्ट कैंसर का पता चल सकेगा।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एम्स भोपाल में प्रोस्टेट कैंसर की प्रारंभिक और सटीक पहचान के लिए एक महत्वपूर्ण शोध किया जा रहा है। एम्स के चिकित्सकों का दावा है कि इस शोध के बाद प्रोटेस्ट कैंसर की पहचान करना आसान हो जाएगा। बायोप्सी जैसी कठिन जांच से मरीज को मुक्ति मिलेगी। इसे मात्र यूरीन टेस्ट से पहचाना जा सकेगा। अध्ययन, जिसका शीर्षक पीसीए3 का उपयोग करके प्रोस्टेट कैंसर के विभिन्न चरणों का निदान मध्य भारत-आधारित पायलट अध्ययन है, जोकि डॉ. देवप्रोसित कर्माकर के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिसमें बायोकैमिस्ट्री विभाग से डॉ. सुखेस मुखर्जी और यूरोलॉजी विभाग से डॉ. केतन मेहरा शामिल हैं। एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि प्रोस्टेट कैंसर दुनियाभर में पुरुषों में दूसरा सबसे आम कैंसर है और भारत में यह छठे स्थान पर है। इसका प्रारंभिक निदान सफल उपचार और रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यूरिन परीक्षण से होगी प्रोटेस्ट कैंसर की पहचान
वर्तमान में, डॉक्टर स्क्रीनिंग के लिए प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) टेस्ट का उपयोग करते हैं, लेकिन PSA स्तर, संक्रमण या प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने जैसी गैर-कैंसर संबंधी स्थितियों के कारण भी बढ़ सकता है। इससे अनावश्यक बायोप्सी और रोगियों में मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए, एम्स भोपाल में प्रोस्टेट कैंसर एंटीजन 3 (PCA3) नामक अधिक सटीक परीक्षण का मूल्यांकन किया जा रहा है। PSA के विपरीत, PCA3 विशेष रूप से प्रोस्टेट कैंसर से संबंधित होता है और इसे यूरिन परीक्षण के माध्यम से पहचाना जा सकता है, जिससे यह एक गैर-इनवेसिव और अधिक विश्वसनीय स्क्रीनिंग विधि साबित हो सकती है।
बायोप्सी से बचेंगे मरीज
एम्स के चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार अनुसंधान से संकेत मिलता है कि PCA3 अनावश्यक बायोप्सी को कम करने और कैंसर की गंभीरता को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है। एम्स भोपाल की शोध टीम इस अध्ययन के माध्यम से PCA3 और पारंपरिक PSA परीक्षण की तुलना कर रही है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि भारतीय मरीजों के लिए कौन सा परीक्षण अधिक प्रभावी है। यदि यह परीक्षण सफल होता है, तो यह भारत में प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, जिससे हजारों पुरुषों को लाभ होगा और कैंसर की प्रारंभिक एवं सटीक पहचान संभव हो सकेगी। इस महत्वपूर्ण अध्ययन पर अपने विचार व्यक्त करते हुए एम्स के निदेशक अजय सिंह ने कहा है कि प्रोस्टेट कैंसर का प्रारंभिक और सटीक निदान अनगिनत लोगों की जान बचा सकता है। यह शोध भारत में कैंसर स्क्रीनिंग विधियों को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अध्ययन के निष्कर्षों से बेहतर निदान प्रोटोकॉल विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे अनावश्यक बायोप्सी और चिकित्सीय हस्तक्षेप से जुड़ी जटिलताओं को कम किया जा सकेगा।
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यूरिन परीक्षण से होगी प्रोटेस्ट कैंसर की पहचान
वर्तमान में, डॉक्टर स्क्रीनिंग के लिए प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (PSA) टेस्ट का उपयोग करते हैं, लेकिन PSA स्तर, संक्रमण या प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने जैसी गैर-कैंसर संबंधी स्थितियों के कारण भी बढ़ सकता है। इससे अनावश्यक बायोप्सी और रोगियों में मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए, एम्स भोपाल में प्रोस्टेट कैंसर एंटीजन 3 (PCA3) नामक अधिक सटीक परीक्षण का मूल्यांकन किया जा रहा है। PSA के विपरीत, PCA3 विशेष रूप से प्रोस्टेट कैंसर से संबंधित होता है और इसे यूरिन परीक्षण के माध्यम से पहचाना जा सकता है, जिससे यह एक गैर-इनवेसिव और अधिक विश्वसनीय स्क्रीनिंग विधि साबित हो सकती है।
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बायोप्सी से बचेंगे मरीज
एम्स के चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार अनुसंधान से संकेत मिलता है कि PCA3 अनावश्यक बायोप्सी को कम करने और कैंसर की गंभीरता को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है। एम्स भोपाल की शोध टीम इस अध्ययन के माध्यम से PCA3 और पारंपरिक PSA परीक्षण की तुलना कर रही है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि भारतीय मरीजों के लिए कौन सा परीक्षण अधिक प्रभावी है। यदि यह परीक्षण सफल होता है, तो यह भारत में प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, जिससे हजारों पुरुषों को लाभ होगा और कैंसर की प्रारंभिक एवं सटीक पहचान संभव हो सकेगी। इस महत्वपूर्ण अध्ययन पर अपने विचार व्यक्त करते हुए एम्स के निदेशक अजय सिंह ने कहा है कि प्रोस्टेट कैंसर का प्रारंभिक और सटीक निदान अनगिनत लोगों की जान बचा सकता है। यह शोध भारत में कैंसर स्क्रीनिंग विधियों को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अध्ययन के निष्कर्षों से बेहतर निदान प्रोटोकॉल विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे अनावश्यक बायोप्सी और चिकित्सीय हस्तक्षेप से जुड़ी जटिलताओं को कम किया जा सकेगा।
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