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Bhopal: हिंदी विश्वविद्यालय में शुरू होगा कृषि, इंजीनियरिंग और डेयरी संचालन कोर्स, दीक्षांत समारोह का आयोजन
Sat, 11 Jan 2025 07:50 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 11 Jan 2025 07:50 PM IST
सार
हिंदी विश्वविद्यालय 5वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। हिंदी विश्वविद्यालय में जल्द ही कृषि, इंजीनियरिंग और डेयरी संचालन के कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल मुख्य अतिथि थे। समारोह में कुल 184 स्टूडेंट्स को उपाधियां दी गईं।
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दीक्षांत समारोह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी भोपाल स्थित अटल बिहारी वाजपई हिंदी विश्वविद्यालय के 5 साल पूरे हो गए हैं। शनिवार को पांचवें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय की कुलपति ने कहा कि हिंदी विश्वविद्यालय में जल्द ही कृषि, इंजीनियरिंग और डेयरी संचालन के कोर्स भी शुरू किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल मुख्य अतिथि थे। समारोह में कुल 184 स्टूडेंट्स को उपाधियां दी गईं।
ज्ञानवान होना ही पर्याप्त नहीं आचरण में भी उतरना जरूरी
राज्यपाल पटेल ने कहा कि ज्ञानवान होना ही पर्याप्त नहीं है, ज्ञान को आचरण में उतारना भी जरूरी है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान कवि, लेखक और राष्ट्रभक्त की स्मृति में स्थापित विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं का दायित्व है कि वह देश, समाज, समुदाय, परिवार और वंचितों के प्रति संवेदनशील रहें।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि, भावी जीवन में करियर की सफलताओं में माता-पिता, गुरुजन और समाज के जरूरतमंद पीछे नहीं छूटने चाहिए। पालकों के संघर्ष के पलों, समाज के सबसे पिछड़े, गरीब व्यक्ति के आपकी शिक्षा-दीक्षा में प्रत्यक्ष और परोक्ष सहयोग को सदैव याद रखें। उन्होने कहा कि दीक्षांत शपथ के दस्तावेज को संभाल कर रखें। प्रतिदिन उसे दोहराएं और उसके अनुसार आचरण करें। आसपास के वंचितों की जरूरतों की जानकारी लें। उन्हें पूरा करने का यथा संभव प्रयास करें। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि हर व्यक्ति में अपार क्षमता है। आवश्यकता अपनी शक्तियों को जगाने की है। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की गरिमा को बढ़ाने और समाज एवं राष्ट्र की सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए शुभकामनाएं दी।
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जीवन में हर रोज देनी होगी नई परीक्षा
दीक्षांत समारोह में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान भोपाल के निदेशक आशुतोष सिंह ने महाभारत के मछली की आंख वाले प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि, जीवन में सफलता के लिए कठिन प्रतिस्पर्धा हर युग में रही है, आगे भी रहेगी। भावी जीवन में भी रोज नई परीक्षा देनी होगी। आवश्यकता देश, काल और परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालकर प्रयास करने की है। अंधेरा कितना भी घना हो, दिया जलाने पर रोक नहीं लगाता है। उन्होंने कहा कि, याद रहे मंजिल उन्हें मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंख होना पर्याप्त नहीं, उड़ान का हौसला होना जरूरी है।
अगले सत्र से नए पाठ्यक्रम होंगे शुरू
विश्वविद्यालय के कुलगुरु खेम सिंह डहेरिया ने विश्वविद्यालय के प्रगति प्रतिवेदन का विवरण दिया। उन्होंने बताया, विश्वविद्यालय वाणिज्य, एमबीए और शिक्षा शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि के साथ ही डेयरी संचालन में डिप्लोमा पाठ्यक्रम की आगामी सत्र से शुरुआत करेगा। कृषि एवं इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रकाशनों का कार्यक्रम में लोकार्पण अतिथियों द्वारा कराया। रसायन शास्त्र के सहायक अध्यापक डॉ. जितेंद्र भावसार के संपादित भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पुस्तक भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान प्रणाली का भी विमोचन किया गया। आभार कुलसचिव शैलेंद्र कुमार जैन ने माना।
इन्हें मिली उपाधियां
समारोह में राज्यपाल पटेल ने विभिन्न संकायों के पदक विजेताओं को पुरस्कृत किया। दीक्षांत अवसर पर वर्ष 2023-24 के 71 स्नातकोत्तर और 113 स्नातक छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदाय की गई है। सभी दीक्षित विद्यार्थियों को कार्यक्रम में दीक्षांत शपथ भी दिलाई गई।
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ज्ञानवान होना ही पर्याप्त नहीं आचरण में भी उतरना जरूरी
राज्यपाल पटेल ने कहा कि ज्ञानवान होना ही पर्याप्त नहीं है, ज्ञान को आचरण में उतारना भी जरूरी है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान कवि, लेखक और राष्ट्रभक्त की स्मृति में स्थापित विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं का दायित्व है कि वह देश, समाज, समुदाय, परिवार और वंचितों के प्रति संवेदनशील रहें।
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राज्यपाल पटेल ने कहा कि, भावी जीवन में करियर की सफलताओं में माता-पिता, गुरुजन और समाज के जरूरतमंद पीछे नहीं छूटने चाहिए। पालकों के संघर्ष के पलों, समाज के सबसे पिछड़े, गरीब व्यक्ति के आपकी शिक्षा-दीक्षा में प्रत्यक्ष और परोक्ष सहयोग को सदैव याद रखें। उन्होने कहा कि दीक्षांत शपथ के दस्तावेज को संभाल कर रखें। प्रतिदिन उसे दोहराएं और उसके अनुसार आचरण करें। आसपास के वंचितों की जरूरतों की जानकारी लें। उन्हें पूरा करने का यथा संभव प्रयास करें। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि हर व्यक्ति में अपार क्षमता है। आवश्यकता अपनी शक्तियों को जगाने की है। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की गरिमा को बढ़ाने और समाज एवं राष्ट्र की सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए शुभकामनाएं दी।
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जीवन में हर रोज देनी होगी नई परीक्षा
दीक्षांत समारोह में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान भोपाल के निदेशक आशुतोष सिंह ने महाभारत के मछली की आंख वाले प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि, जीवन में सफलता के लिए कठिन प्रतिस्पर्धा हर युग में रही है, आगे भी रहेगी। भावी जीवन में भी रोज नई परीक्षा देनी होगी। आवश्यकता देश, काल और परिस्थिति के अनुसार स्वयं को ढालकर प्रयास करने की है। अंधेरा कितना भी घना हो, दिया जलाने पर रोक नहीं लगाता है। उन्होंने कहा कि, याद रहे मंजिल उन्हें मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंख होना पर्याप्त नहीं, उड़ान का हौसला होना जरूरी है।
अगले सत्र से नए पाठ्यक्रम होंगे शुरू
विश्वविद्यालय के कुलगुरु खेम सिंह डहेरिया ने विश्वविद्यालय के प्रगति प्रतिवेदन का विवरण दिया। उन्होंने बताया, विश्वविद्यालय वाणिज्य, एमबीए और शिक्षा शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि के साथ ही डेयरी संचालन में डिप्लोमा पाठ्यक्रम की आगामी सत्र से शुरुआत करेगा। कृषि एवं इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रकाशनों का कार्यक्रम में लोकार्पण अतिथियों द्वारा कराया। रसायन शास्त्र के सहायक अध्यापक डॉ. जितेंद्र भावसार के संपादित भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पुस्तक भारतीय वैज्ञानिक ज्ञान प्रणाली का भी विमोचन किया गया। आभार कुलसचिव शैलेंद्र कुमार जैन ने माना।
इन्हें मिली उपाधियां
समारोह में राज्यपाल पटेल ने विभिन्न संकायों के पदक विजेताओं को पुरस्कृत किया। दीक्षांत अवसर पर वर्ष 2023-24 के 71 स्नातकोत्तर और 113 स्नातक छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदाय की गई है। सभी दीक्षित विद्यार्थियों को कार्यक्रम में दीक्षांत शपथ भी दिलाई गई।
