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Bhopal: एम्स भोपाल में 10 घंटे चला ऑपरेशन, अग्नाशय से निकाला 4.3 किलो का ट्यूमर, महिला को मिली नई जिंदगी
Sat, 27 Sep 2025 04:10 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Sat, 27 Sep 2025 04:10 PM IST
सार
एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने एक 50 वर्षीय महिला के शरीर से 4.3 किलोग्राम वजनी अग्नाशय का दुर्लभ और विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल कर उसे एक नई जिंदगी दी है। ट्यूमर ने तिल्ली की रक्त नलिकाओं को बाधित कर दिया था, जिससे पोर्टल हाइपरटेंशन जैसी गंभीर स्थिति बन गई थी।
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ट्यूमर के साथ एम्स के चिकित्सक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल के डॉक्टरों ने एक 50 वर्षीय महिला के शरीर से 4.3 किलोग्राम वजनी अग्नाशय (Pancreas) का दुर्लभ और विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल कर उसे एक नई जिंदगी दी है। यह सर्जरी न केवल जटिल थी, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। एम्स के चिकित्सकों का कहना है कि आमतौर पर अग्नाशय का वजन 50 से 125 ग्राम होता है, लेकिन इस महिला के पेट में 4.3 किलो का ट्यूमर था। यह चिकित्सा इतिहास के सबसे दुर्लभ मामलों में से एक है।
10 घंटे चली सर्जरी, टीमवर्क और तकनीक ने किया कमाल
ट्यूमर ने तिल्ली की रक्त नलिकाओं को बाधित कर दिया था, जिससे पोर्टल हाइपरटेंशन जैसी गंभीर स्थिति बन गई थी।स्थिति इतनी जटिल थी कि महिला के अग्नाशय का बायां हिस्सा और तिल्ली निकालनी पड़ी। इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में डॉ. विशाल गुप्ता (सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग), डॉ. प्रवेश, डॉ. गौरव, डॉ. श्रीराम, डॉ. वैशाली वैदेसकर और डॉ. हरीश कुमार (एनेस्थीसिया विभाग) की टीम शामिल रही। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अभिनव भगत की मदद से सटीक योजना बनाई गई। करीब 10 घंटे चली इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया और मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है।
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यह भी पढ़ें-फील्ड पर सक्रिय हुए एमपी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष, नवंबर में राहुल गांधी और खड़गे लेंगे सीधी क्लास
लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
डॉ. विशाल गुप्ता ने बताया कि महिला पिछले एक साल से पेट में भारीपन और तकलीफ झेल रही थी। उन्होंने इसे सामान्य गैस या कब्ज समझकर नजर अंदाज कर दिया। जब पेट का आकार असामान्य रूप से बढ़ गया, तब जाकर एम्स भोपाल की ओपीडी में पहुंचीं। जांच में पता चला कि यह 23 सेंटीमीटर लंबा ट्यूमर है जो कि चिकित्सा विज्ञान में दर्ज सबसे बड़े ट्यूमरों में गिना जा रहा है। इसके बाद आगे की योजना बनाई गई।
यह भी पढ़ें-आईजी इंटेलिजेंस से मोबाइल लूटने वाला तीसरा आरोपी गिरफ्तार, दूसरी वारदात पर पुलिस खामोश क्यों?
असामान्य बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से लें परामर्श
डॉक्टरों के मुताबिक, अग्नाशय के कुछ प्रकार के ट्यूमर अधिकतर महिलाओं में पाए जाते हैं। ये धीरे-धीरे बढ़ते हैं और इनके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। यही कारण है कि लोग इन्हें लंबे समय तक नजर अंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। डॉक्टरों ने कहा है कि अगर पेट में लगातार भारीपन, फुलाव, दर्द या आकार में असामान्य बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। समय पर जांच से जान बचाई जा सकती है। एम्स भोपाल की यह सफलता न केवल चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धि है, बल्कि यह दिखाती है कि सही समय पर इलाज और समर्पित टीमवर्क से कितनी भी जटिल समस्या का समाधान संभव है।
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10 घंटे चली सर्जरी, टीमवर्क और तकनीक ने किया कमाल
ट्यूमर ने तिल्ली की रक्त नलिकाओं को बाधित कर दिया था, जिससे पोर्टल हाइपरटेंशन जैसी गंभीर स्थिति बन गई थी।स्थिति इतनी जटिल थी कि महिला के अग्नाशय का बायां हिस्सा और तिल्ली निकालनी पड़ी। इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में डॉ. विशाल गुप्ता (सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग), डॉ. प्रवेश, डॉ. गौरव, डॉ. श्रीराम, डॉ. वैशाली वैदेसकर और डॉ. हरीश कुमार (एनेस्थीसिया विभाग) की टीम शामिल रही। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अभिनव भगत की मदद से सटीक योजना बनाई गई। करीब 10 घंटे चली इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया और मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है।
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लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
डॉ. विशाल गुप्ता ने बताया कि महिला पिछले एक साल से पेट में भारीपन और तकलीफ झेल रही थी। उन्होंने इसे सामान्य गैस या कब्ज समझकर नजर अंदाज कर दिया। जब पेट का आकार असामान्य रूप से बढ़ गया, तब जाकर एम्स भोपाल की ओपीडी में पहुंचीं। जांच में पता चला कि यह 23 सेंटीमीटर लंबा ट्यूमर है जो कि चिकित्सा विज्ञान में दर्ज सबसे बड़े ट्यूमरों में गिना जा रहा है। इसके बाद आगे की योजना बनाई गई।
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असामान्य बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से लें परामर्श
डॉक्टरों के मुताबिक, अग्नाशय के कुछ प्रकार के ट्यूमर अधिकतर महिलाओं में पाए जाते हैं। ये धीरे-धीरे बढ़ते हैं और इनके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। यही कारण है कि लोग इन्हें लंबे समय तक नजर अंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। डॉक्टरों ने कहा है कि अगर पेट में लगातार भारीपन, फुलाव, दर्द या आकार में असामान्य बदलाव दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। समय पर जांच से जान बचाई जा सकती है। एम्स भोपाल की यह सफलता न केवल चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धि है, बल्कि यह दिखाती है कि सही समय पर इलाज और समर्पित टीमवर्क से कितनी भी जटिल समस्या का समाधान संभव है।
