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Bhopal: एमपी में 17 सूत्रीय मांगों को लेकर 40 हजार बैंककर्मियों ने की हड़ताल, 8 हजार ब्रांचों में रहा असर
Wed, 09 Jul 2025 07:30 PM IST
संदीप तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: संदीप तिवारी
Updated Wed, 09 Jul 2025 07:30 PM IST
सार
मध्यप्रदेश में बुधवार को अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। करीब 40 हजार बैंककर्मी हड़ताल पर रहें। इससे प्रदेश की करीब साढ़े 8 हजार शाखाओं में कामकाज पर असर रहा।बैंककर्मियों का कहना है कि जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ और बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों की मांगों को लेकर यह हड़ताल किया।
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बैंककर्मियों की हड़ताल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रदेश में बुधवार को 17 सूत्रीय मांगों को लेकर बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। करीब 40 हजार बैंककर्मी हड़ताल पर रहे। इससे प्रदेश की करीब साढ़े 8 हजार शाखाओं में कामकाज पर असर रहा। बैंककर्मियों का कहना है कि जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ और बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों की मांगों को लेकर यह हड़ताल की गई।
भोपाल में सरकारी प्रेस के पास बैंककर्मी एकजुट हुए और मांगों के निराकरण की मांग की। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने बैंककर्मियों को संबोधित भी किया। दरअसल, ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन एवं बैंक एम्पलॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया ने केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांगों का समर्थन करते हुए बैंकिंग उद्योग एवं बैंककर्मियों की मांगों को लेकर अखिल भारतीय बैंक बुधवार को हड़ताल का आह्वान किया था।
श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन
ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता वीके शर्मा ने बताया कि केंद्रीय श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र ट्रेड यूनियंस ने केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ, अपनी 17 सूत्रीय मांगों के निराकरण के लिए यह राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया। जिसमें पूरे मध्यप्रदेश के बैंककर्मी भी शामिल हैं। भोपाल में भी प्रदर्शन किया गया।
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यह भी पढ़ें-शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर निजी स्कूल संचालकों ने किया प्रदर्शन,बोले-स्कूलों में ताला लगाने की नौबत
भोपाल में भी हड़ताल का असर
राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल में सार्वजनिक, निजी, विदेशी, सहकारी एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रदेश में करीब 40 हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। इससे बैंकों का कामकाज ठप हो गया। भोपाल में भी हड़ताल का असर देखने को मिला। यहां विभिन्न बैंकों की 400 शाखाएं हैं। जहां 5 हजार अधिकारी-कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे। हालांकि, बैंकें तो खुली, लेकिन कामकाज नहीं हुआ। इस वजह से ग्राहक परेशान होते रहे।
यह भी पढ़ें- उज्जैन में सोमवार को स्कूलों में छुट्टी पर विधायक आरिफ मसूद ने खड़े किए सवाल, मंत्री सारंग का पलटवार
इन प्रमुख मांगों को लेकर हड़ताल
- केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांगों का निराकरण किया जाए।
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों को मजबूत करें।
- बैंकों और एलआईसी में निजीकरण और विनिवेश रोके।
- बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई बढ़ोतरी रोका जाए।
- सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों को एक इकाई के रूप में विलय करें।
- पर्याप्त भर्तियां सुनिश्चित करें।
- आउटसोर्सिंग और अनुबंध नौकरियों को रोके।
- एनपीएस को खत्म करें, ओपीएस को बहाल करें।
- कॉर्पोरेट्स से खराब ऋण वसूलने के लिए कड़े कदम उठाएं।
- आम ग्राहकों के लिए बैंकों में सेवा शुल्क कम करें।
- जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी वापस लें।
- प्रतिगामी श्रम संहिताओं को लागू न करें।
- ट्रेड यूनियन अधिकारों का उल्लंघन न करें।
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भोपाल में सरकारी प्रेस के पास बैंककर्मी एकजुट हुए और मांगों के निराकरण की मांग की। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने बैंककर्मियों को संबोधित भी किया। दरअसल, ऑल इंडिया बैंक एम्पलॉइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन एवं बैंक एम्पलॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया ने केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांगों का समर्थन करते हुए बैंकिंग उद्योग एवं बैंककर्मियों की मांगों को लेकर अखिल भारतीय बैंक बुधवार को हड़ताल का आह्वान किया था।
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श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन
ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा के प्रवक्ता वीके शर्मा ने बताया कि केंद्रीय श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र ट्रेड यूनियंस ने केंद्र सरकार की जन एवं श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ, अपनी 17 सूत्रीय मांगों के निराकरण के लिए यह राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया। जिसमें पूरे मध्यप्रदेश के बैंककर्मी भी शामिल हैं। भोपाल में भी प्रदर्शन किया गया।
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भोपाल में भी हड़ताल का असर
राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल में सार्वजनिक, निजी, विदेशी, सहकारी एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रदेश में करीब 40 हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। इससे बैंकों का कामकाज ठप हो गया। भोपाल में भी हड़ताल का असर देखने को मिला। यहां विभिन्न बैंकों की 400 शाखाएं हैं। जहां 5 हजार अधिकारी-कर्मचारी हड़ताल में शामिल रहे। हालांकि, बैंकें तो खुली, लेकिन कामकाज नहीं हुआ। इस वजह से ग्राहक परेशान होते रहे।
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इन प्रमुख मांगों को लेकर हड़ताल
- केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांगों का निराकरण किया जाए।
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों को मजबूत करें।
- बैंकों और एलआईसी में निजीकरण और विनिवेश रोके।
- बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई बढ़ोतरी रोका जाए।
- सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों को एक इकाई के रूप में विलय करें।
- पर्याप्त भर्तियां सुनिश्चित करें।
- आउटसोर्सिंग और अनुबंध नौकरियों को रोके।
- एनपीएस को खत्म करें, ओपीएस को बहाल करें।
- कॉर्पोरेट्स से खराब ऋण वसूलने के लिए कड़े कदम उठाएं।
- आम ग्राहकों के लिए बैंकों में सेवा शुल्क कम करें।
- जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी वापस लें।
- प्रतिगामी श्रम संहिताओं को लागू न करें।
- ट्रेड यूनियन अधिकारों का उल्लंघन न करें।
