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Bhopal:शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर निजी स्कूल संचालकों ने किया प्रदर्शन,बोले-स्कूलों में ताला लगाने की नौबत

Wed, 09 Jul 2025 07:07 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Wed, 09 Jul 2025 07:07 PM IST
सार

नए नियमों से छोटे और मध्यम प्राइवेट निजी स्कूलों की स्थिति खराब हो गई है। स्कूलों में ताला लगाने की नौबत आ गई है। मध्य प्रदेश प्राइवेट स्कूल वेलफेयर संचालक मंच ने इसके विरोध में स्कूल शिक्षा मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन किया। हलाकि मंत्री संचालकों नहीं मिले।

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Bhopal: Private school operators protested outside the education minister's bungalow, said that there is a nee
मंत्री के बंगले के बाहर पहुंचे स्कूल संचालक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में शिक्षा विभाग के नए नियमों से छोटे और मध्यम निजी स्कूलों की स्थिति खराब हो गई है। संचालकों का कहना है कि स्कूलों में ताला लगाने की नौबत आ गई है। मध्य प्रदेश प्राइवेट स्कूल वेलफेयर संचालक मंच ने इसके विरोध में बुधवार को 74 बंगला स्थित स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के घर के बाहर प्रदर्शन किया। हालांकि, मंत्री संचालकों से नहीं मिले और ना ही पुलिस ने उन्हें यहां रुकने की अनुमति दी। इसके सभी सभी संचालक वापस चले गए और कहा है कि अब वो कोर्ट में जाएंगे। इस दौरान रीवा, जबलपुर, सागर समेत प्रदेशभर से प्रभावित निजी स्कूल संचालक एकत्रित हुए।

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छोटे स्कूलों के लिए असंभव
मध्य प्रदेश प्राइवेट स्कूल वेलफेयर संचालक मंच के प्रदेश अध्यक्ष शैलेष तिवारी ने बताया कि सरकार ने मान्यता के लिए कई ऐसे नियम थोप दिए हैं, जो छोटे स्कूलों के लिए असंभव हैं। इनमें रजिस्टर्ड किरायानामा, सुरक्षा निधि और भारी-भरकम मान्यता शुल्क प्रमुख हैं। रजिस्टर्ड किरायानामा सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरा है, क्योंकि मकान मालिक इसके लिए तैयार नहीं हो रहे या फिर किराया और एडवांस बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। नए भवन में स्कूल बदलना भी एक महीने में संभव नहीं है और खुद की जमीन पर बिल्डिंग बनाना तो दूर की बात है।
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4,820 स्कूलों ने मान्यता के लिए नहीं किया आवेदन
तिवारी ने बताया कि सरकार की तानाशाही और अव्यावहारिक नियमों के चलते 4,820 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन ही नहीं किया है। इससे 60 से 70 हजार शिक्षकों के बेरोजगार होने और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पढ़ने वाले सवा लाख से अधिक गरीब बच्चों के शिक्षा से वंचित होने का खतरा मंडरा रहा है।
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ईमानदारी से अपनी बात रख रहे हैं, तो कोई सुनवाई नहीं
जबलपुर से आए निजी स्कूल संचालकों ने आरोप लगाया कि अब नियम है कि रजिस्टर्ड किरायानामा जमा करना होगा। इसके बाद भी कई स्कूलों ने पुराने तरीके वाला सामान्य किरायानामा ही पोर्टल पर जमा किया, उन्हें मान्यता भी दे दी गई। हम ईमानदारी से अपनी बात रख रहे हैं, तो कोई सुनवाई नहीं हो रही। 22 दिन पहले हमने राज्य शिक्षा केंद्र के सामने भी प्रदर्शन किया था। अब तक अधिकारियों से लेकर जिम्मेदार लगातार हमारी मांगों को नजरअंदाज करते आ रहे हैं।

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प्राइवेट स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की साजिश
संचालक मंच के कोषाध्यक्ष मोनू तोमर ने कहा कि यह सब प्राइवेट स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की सोची-समझी साजिश है। सरकार पिछले कई साल से आरटीई के तहत गरीब बच्चों की फीस का भुगतान भी नहीं कर रही है। 2016 से 2022 तक के पैसे भी अधिकांश स्कूलों को नहीं मिले हैं, जबकि वे खुद एक दिन की देरी पर स्कूलों पर जुर्माना लगा देते हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब 2011 में नोटरी कृत किराए-नामे पर मान्यता मिल जाती थी, तो अब शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने ये नए नियम क्यों थोपे हैं? यह सिर्फ राजस्व बढ़ाने और बड़े-बड़े स्कूलों को फायदा पहुंचाने की कोशिश है।

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स्कूलों को बंद करने का दबाव
मोनू तोमर ने कहा कि इन नियमों के विरोध में 4,820 स्कूलों ने शुरू से ही मान्यता के लिए आवेदन नहीं किया है। इन स्कूलों को बंद करने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि संचालक इन्हें चलाना चाहते हैं। मोनू तोमर ने कहा कि भोपाल में इकट्ठा हुए सभी प्राइवेट स्कूल संचालकों ने चेतावनी दी है कि अगर मान्यता पोर्टल नहीं खोला गया और आरटीई का पुराना और दो साल से रुका हुआ पैसा नहीं मिला, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे और उग्र आंदोलन छेड़ेंगे।

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