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बड़ा तालाब अभी भी अतिक्रमण की जद में: NGT के 7 आदेश बेअसर,कार्रवाई ठंडे बस्ते में,सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

Sat, 29 Aug 2026 07:17 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Sat, 29 Aug 2026 07:17 PM IST
सार

एनजीटी के 7 आदेश के बाद भी बड़ा तालाब अतिक्रमण मुक्त नहीं हुआ। 365 चिन्हित अतिक्रमणों पर कार्रवाई अधूरी है। याचिकाकर्ता राशिद नूर ने बारिश के दौरान तालाब की असली सीमा का सर्वे कराने की मांग की है। कार्रवाई नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी है।

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Bada Talab still under encroachment: 7 NGT orders ineffective, action put on the back burner, preparations und
एफटीएल में अवैध कब़्जा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल के बड़े तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के सात बार आदेश के बावजूद कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है। हर बार प्रशासन की ओर से कभी अमला नहीं होने तो कभी पुलिस बल की कमी का हवाला दिया गया। अब बारिश को कार्रवाई रोकने की वजह बताया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए याचिका दायर करने वाले राशिद नूर खान का आरोप है कि कार्रवाई धीमी गति से चल रही है और कई अतिक्रमण अब भी तालाब की सीमा के भीतर मौजूद हैं। राशिद नूर ने बताया कि तालाब की वास्तविक जल-सीमा के मामले में एनजीटी सात बार आदेश दे चुका है। इसके बावजूद मौके की स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आया है। उन्होंने दावा किया कि एफटीएल की सीमा के बीच निजी व्यक्तियों ने सड़क बना रखी है, जो आगे मकानों और फार्महाउस तक जाती है।
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बारिश में कार्रवाई रुकी, अब तालाब की असली सीमा नापने की मांग
राशिद नूर ने कलेक्टर को पत्र देकर बारिश के दौरान बड़े तालाब की वास्तविक जल-सीमा का वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इस समय तालाब का पानी उन क्षेत्रों तक पहुंच रहा है, जिन्हें सामान्य दिनों में तालाब की सीमा से बाहर माना जाता है। ऐसे में अभी सर्वे कराने से तालाब की प्राकृतिक जलधारण सीमा का सही पता लगाया जा सकता है। उन्होंने मांग की है कि तालाब की एफटीएल, जल-विस्तार और कैचमेंट क्षेत्र का दोबारा सीमांकन किया जाए। पुराने रिकॉर्ड से वर्तमान स्थिति की तुलना कर यह भी जांची जाए कि कहीं मिट्टी, मलबा या अन्य सामग्री डालकर तालाब का क्षेत्र कम तो नहीं किया गया।
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365 चिन्हित अतिक्रमण, कई अब भी कायम
याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम लगातार कार्रवाई के दावे कर रहे हैं, लेकिन चिन्हित किए गए करीब 365 अतिक्रमणों में अब तक पूरी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि एफटीएल से सटे 23 अतिक्रमण भी लंबे समय से हटाए नहीं गए और कुछ मामलों में संबंधित लोगों को इतना समय मिल गया कि वे न्यायालय से स्थगन आदेश ले आए। राशिद नूर ने आरोप लगाया कि आम लोगों के अतिक्रमण पर कार्रवाई तेजी से होती है, लेकिन प्रभावशाली लोगों के मामलों में कार्रवाई धीमी पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो तालाब को बचाने की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी है।

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तालाब में पहुंच रहा सीवेज, पहले अतिक्रमण हटाने की मांग
याचिकाकर्ता ने बड़े तालाब में पहुंच रहे सीवेज और नालों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि पहले तालाब की सीमा में मौजूद अतिक्रमण हटाना जरूरी है। इसके बाद तालाब में गिर रहे नालों और सीवेज को रोकने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने अमृत योजना और अन्य परियोजनाओं के तहत हुए काम के बावजूद तालाब में सीवेज पहुंचने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित विभागों की संयुक्त टीम बनाकर तत्काल सर्वे कराया जाए और तालाब की वास्तविक सीमा को स्थायी रूप से चिह्नित किया जाए। साथ ही सर्वे की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रखने और 15 दिन में कार्रवाई की जानकारी देने की मांग की गई है।



 
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