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एम्स में अब मोबाइल बनेगा मां और बच्चे का पोषण गाइड: क्यूआर कोड स्कैन करते ही मिलेगा खानपान का पूरा ब्योरा
Sat, 17 Oct 2026 02:37 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Sat, 17 Oct 2026 02:37 PM IST
सार
एम्स भोपाल में गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की माताओं के लिए क्यूआर कोड आधारित डिजिटल पोषण सुविधा शुरू की गई है। मोबाइल से कोड स्कैन कर गर्भावस्था में खानपान, बच्चे के शुरुआती 1000 दिनों में पोषण और मां के दूध की पर्याप्तता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों की जानकारी मिल सकेगी। इसका उद्देश्य माताओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाना है।
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एम्स भोपाल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गर्भावस्था में क्या खाना चाहिए, बच्चे के बेहतर विकास के लिए शुरुआती दिनों में किन पोषक तत्वों की जरूरत होती है और स्तनपान कराने वाली मां के आहार में क्या शामिल होना चाहिए, इन सवालों के जवाब के लिए अब अस्पताल में जानकारी जुटाने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। एम्स भोपाल में क्यूआर कोड आधारित डिजिटल पोषण दिशा-निर्देश शुरू किए गए हैं। मरीज और उनके परिजन मोबाइल से कोड स्कैन कर मां और शिशु के पोषण से जुड़ी जरूरी जानकारी हासिल कर सकेंगे। अब तक खानपान से जुड़ी सही जानकारी के लिए लोगों को स्वास्थ्य विशेषज्ञों या उपलब्ध सूचना सामग्री पर निर्भर रहना पड़ता था। डिजिटल पहल के जरिए पोषण संबंधी दिशा-निर्देशों को आसानी से उपलब्ध कराने की कोशिश की गई है। इसमें गर्भावस्था के दौरान आहार, बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों में पोषण और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए दुग्धवर्धक खाद्य पदार्थों से जुड़ी जानकारी शामिल है।
गर्भावस्था से बच्चे के विकास तक की जानकारी
एम्स के आहार विज्ञान विभाग की इस पहल का उद्देश्य माताओं और बच्चों के पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। क्यूआर कोड के माध्यम से गर्भवती महिलाएं अपने खानपान से जुड़े दिशा-निर्देश देख सकेंगी। वहीं, नवजात बच्चों की माताओं और उनके परिजनों को भी बच्चे के शुरुआती विकास के दौरान पोषण की जरूरतों को समझने में मदद मिलेगी। बच्चे के जीवन के शुरुआती 1000 दिन उसके विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में इस अवधि में संतुलित आहार और उचित पोषण की जानकारी परिवारों तक पहुंचाना जरूरी है। एम्स की डिजिटल सुविधा इसी जरूरत को ध्यान में रखकर शुरू की गई है।
आंगनबाड़ी से अस्पताल तक चला जागरूकता अभियान
यह पहल राष्ट्रीय पोषण माह के समापन समारोह के दौरान 14 अक्टूबर को शुरू की गई। पोषण माह का आयोजन 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर किया गया था। इसके तहत माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ संतुलित आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां आयोजित की गईं। अभियान के दौरान तीन आंगनबाड़ी केंद्रों के अलावा भोपाल के बकानिया, बमूलिया, बंगरसिया और दीवानगंज में भी जागरूकता गतिविधियां हुईं। अस्पताल की ओपीडी में जीवन के पहले 1000 दिनों के पोषण पर जानकारी दी गई। बाल रोग विभाग के सहयोग से बाल विकास पर सत्र आयोजित किए गए। स्वस्थ टिफिन प्रतियोगिता के जरिए भी संतुलित और पौष्टिक भोजन का संदेश दिया गया। प्रतियोगिता में मीना चौधरी ने पहला, अंकिता वाडनेरकर ने दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि प्रियांशी यादव और भूमिका मालवीय संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं। समापन समारोह में आहार विज्ञान विभाग के इंटर्न ने पोषण जागरूकता पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया।
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यह भी पढ़ें-अक्टूबर में मौसम के तीन रंग: दिन में धूप, रात में ठंडक और अब फिर बारिश, एपी के 21 जिलों में आज अलर्ट
विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है डिजिटल जानकारी
डिजिटल पोषण दिशा-निर्देशों का शुभारंभ एम्स के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (सेवानिवृत्त) ने किया। उन्होंने कहा कि माताओं और बच्चों का स्वस्थ रहना स्वस्थ समाज की नींव है। पोषण संबंधी सही जानकारी हर घर तक पहुंचनी चाहिए।
हालांकि, क्यूआर कोड से मिलने वाली जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। गर्भावस्था, स्तनपान या बच्चे की सेहत से जुड़ी विशेष जरूरतों के लिए डॉक्टर और आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी रहेगा।
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गर्भावस्था से बच्चे के विकास तक की जानकारी
एम्स के आहार विज्ञान विभाग की इस पहल का उद्देश्य माताओं और बच्चों के पोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। क्यूआर कोड के माध्यम से गर्भवती महिलाएं अपने खानपान से जुड़े दिशा-निर्देश देख सकेंगी। वहीं, नवजात बच्चों की माताओं और उनके परिजनों को भी बच्चे के शुरुआती विकास के दौरान पोषण की जरूरतों को समझने में मदद मिलेगी। बच्चे के जीवन के शुरुआती 1000 दिन उसके विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में इस अवधि में संतुलित आहार और उचित पोषण की जानकारी परिवारों तक पहुंचाना जरूरी है। एम्स की डिजिटल सुविधा इसी जरूरत को ध्यान में रखकर शुरू की गई है।
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आंगनबाड़ी से अस्पताल तक चला जागरूकता अभियान
यह पहल राष्ट्रीय पोषण माह के समापन समारोह के दौरान 14 अक्टूबर को शुरू की गई। पोषण माह का आयोजन 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर किया गया था। इसके तहत माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ संतुलित आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां आयोजित की गईं। अभियान के दौरान तीन आंगनबाड़ी केंद्रों के अलावा भोपाल के बकानिया, बमूलिया, बंगरसिया और दीवानगंज में भी जागरूकता गतिविधियां हुईं। अस्पताल की ओपीडी में जीवन के पहले 1000 दिनों के पोषण पर जानकारी दी गई। बाल रोग विभाग के सहयोग से बाल विकास पर सत्र आयोजित किए गए। स्वस्थ टिफिन प्रतियोगिता के जरिए भी संतुलित और पौष्टिक भोजन का संदेश दिया गया। प्रतियोगिता में मीना चौधरी ने पहला, अंकिता वाडनेरकर ने दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि प्रियांशी यादव और भूमिका मालवीय संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं। समापन समारोह में आहार विज्ञान विभाग के इंटर्न ने पोषण जागरूकता पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया।
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विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प नहीं है डिजिटल जानकारी
डिजिटल पोषण दिशा-निर्देशों का शुभारंभ एम्स के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) नरेंद्र कोतवाल (सेवानिवृत्त) ने किया। उन्होंने कहा कि माताओं और बच्चों का स्वस्थ रहना स्वस्थ समाज की नींव है। पोषण संबंधी सही जानकारी हर घर तक पहुंचनी चाहिए।
हालांकि, क्यूआर कोड से मिलने वाली जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। गर्भावस्था, स्तनपान या बच्चे की सेहत से जुड़ी विशेष जरूरतों के लिए डॉक्टर और आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी रहेगा।
