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आधी रात खुला विधानसभा सचिवालय: जीतू पटवारी व पीसी शर्मा ने दतिया विधायक के मुद्दे पर भाजपा को घेरा, कही ये बात

Fri, 03 Apr 2026 09:45 AM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Fri, 03 Apr 2026 09:45 AM IST
सार

भोपाल में देर रात विधानसभा सचिवालय खुलने पर सियासी विवाद गहरा गया है। जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि भाजपा के इशारे पर विधायक की सदस्यता खत्म करने की तैयारी की जा रही है, जबकि इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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Assembly Secretariat Opens at Midnight: Jitu Patwari Arrives, Alleges—"Plan to Terminate MLA's Membership at B
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल में विधानसभा सचिवालय को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया के लिए देर रात विधानसभा सचिवालय खोला गया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई भाजपा के इशारे पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है।
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पीसी शर्मा के साथ पहुंचे विधानसभा
मामले की जानकारी मिलते ही जीतू पटवारी, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के साथ विधानसभा पहुंचे और इस पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि रात में सचिवालय खोलना कई सवाल खड़े करता है। पटवारी ने कहा कि विधानसभा सचिवालय एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, लेकिन जिस तरह से रात में काम किया गया, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक गुंडागर्दी और सत्ता का दुरुपयोग बताया है।
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राजेंद्र भारती की सदस्यता पर घमासान
कांग्रेस का दावा है कि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म करने की कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। पार्टी ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर वह पूरी ताकत से लड़ाई लड़ेगी। फिलहाल इस पूरे मामले पर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है।
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क्या है भारती का मामला? यहां जानें
यह पूरा मामला वर्ष 1998 का है, जब श्याम सुंदर संस्थान की ओर से बैंक में 10 लाख रुपये की एफडी कराई गई थी। आरोप है कि राजेंद्र भारती ने बैंक के लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में हेरफेर की और एफडी की अवधि तीन साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी।

बताया जाता है कि वर्ष 1999 से 2011 के बीच करीब 13.5 प्रतिशत ब्याज दर के आधार पर हर साल लगभग 1.35 लाख रुपये निकाले जाते रहे। साल 2011 में जब भाजपा नेता पप्पू पुजारी बैंक के अध्यक्ष बने, तब इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। जांच के दौरान एफडी पर ऑडिट आपत्ति भी दर्ज की गई।

इसके बाद मामला उपभोक्ता फोरम से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिल सकी। अंततः वर्ष 2015 में इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया और अब अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुना दी है।



 
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