{"_id":"627769277c7a7b044a76c4a4","slug":"bhopal-gas-tragedy-case-contempt-notice-issued-to-7-including-2-central-secretaries-chief-secretary-next-hearing-on-june-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"भोपाल गैस त्रासदी मामला: 2 केन्द्रीय सचिव, मुख्य सचिव समेत 7 को अवमानना नोटिस जारी, 17 जून को होगी अगली सुनवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भोपाल गैस त्रासदी मामला: 2 केन्द्रीय सचिव, मुख्य सचिव समेत 7 को अवमानना नोटिस जारी, 17 जून को होगी अगली सुनवाई
Sun, 08 May 2022 12:26 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 08 May 2022 12:26 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस एम एस भटटी की युगलपीठ ने भोपाल गैस त्रासदी मामले में केन्द्र सरकार के दो सचिव, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव सहित सात को अवमानना नोटिस जारी किया है। याचिका पर अगली सुनवाई 17 जून को निर्धारित की गयी है।
विज्ञापन
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस एम एस भटटी की युगलपीठ ने भोपाल गैस त्रासदी मामले में केन्द्र सरकार के दो सचिव, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव सहित सात को अवमानना नोटिस जारी किया है। याचिका पर अगली सुनवाई 17 जून को निर्धारित की गयी है।
सर्वोच्च न्यायालय ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनार्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किये थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी का गठित करने के निर्देश भी जारी किए थे। मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने तथा रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगी, ऐसे निर्देश भी जारी किये थे। जिसके बाद याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी।
याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का राज्य सरकार द्वारा परिपालन नहीं किये जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका दायर की गयी थी। दायर अवमानना में कहा गया था कि सर्वोच्चय न्यायालय द्वारा जारी निदेर्शों का परिपालन केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने हैं। इसके अलावा अस्पतालों में अवश्यकता अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। बीएमएचआरसी के भर्ती नियम निर्धारित होने के कारण डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टॉफ स्थाई तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करते हैं।
विज्ञापन
याचिका की सुनवाई करते युगलपीठ ने केन्द्र व राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि अभी तक मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा पेश की गयी 18 त्रैमासिक रिपोर्ट में कितनी अनुशंसा की गयी है और कितनी अनुशंसाओं का परिपालन किया गया है,इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। इसके अलावा अवमानना याचिका में वर्तमान अधिकारी को नाम सहित अनावेदक बनाने के निर्देश दिये थे।
याचिकाओं पर शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान अवमानना याचिका में केन्द्रीय परिवार कल्याण विभाग के सचिव रंजन भूषण, केन्द्रीय रसायन व उर्वरक विभाग की सचिव आरती आहूजा, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, भोपाल गैस त्रासदी सहायत एवं पुनर्वास विभाग के सचिव मोहम्मद सुलेमान, आईसीएमआर के वरिष्ट डिप्टी डायरेक्टर आर. राम तथा बीएमएसआरसी के संचालक डॉ. प्रभा तथा एनआईआरई के संचालक राजनारायण तिवारी को अनावेदक बनाने आवेदन पेश किया था। युगलपीठ ने आवेदन को स्वीकार करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ट अधिवक्ता नमन नागरथ तथा अधिवक्ता काशी राम पटेल उपस्थित हुए।
विज्ञापन
सर्वोच्च न्यायालय ने 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनार्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किये थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी का गठित करने के निर्देश भी जारी किए थे। मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने तथा रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगी, ऐसे निर्देश भी जारी किये थे। जिसके बाद याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी।
विज्ञापन
याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का राज्य सरकार द्वारा परिपालन नहीं किये जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका दायर की गयी थी। दायर अवमानना में कहा गया था कि सर्वोच्चय न्यायालय द्वारा जारी निदेर्शों का परिपालन केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है। गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने हैं। इसके अलावा अस्पतालों में अवश्यकता अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। बीएमएचआरसी के भर्ती नियम निर्धारित होने के कारण डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टॉफ स्थाई तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करते हैं।
विज्ञापन
याचिका की सुनवाई करते युगलपीठ ने केन्द्र व राज्य सरकार को निर्देशित किया था कि अभी तक मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा पेश की गयी 18 त्रैमासिक रिपोर्ट में कितनी अनुशंसा की गयी है और कितनी अनुशंसाओं का परिपालन किया गया है,इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। इसके अलावा अवमानना याचिका में वर्तमान अधिकारी को नाम सहित अनावेदक बनाने के निर्देश दिये थे।
याचिकाओं पर शनिवार को हुई सुनवाई के दौरान अवमानना याचिका में केन्द्रीय परिवार कल्याण विभाग के सचिव रंजन भूषण, केन्द्रीय रसायन व उर्वरक विभाग की सचिव आरती आहूजा, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, भोपाल गैस त्रासदी सहायत एवं पुनर्वास विभाग के सचिव मोहम्मद सुलेमान, आईसीएमआर के वरिष्ट डिप्टी डायरेक्टर आर. राम तथा बीएमएसआरसी के संचालक डॉ. प्रभा तथा एनआईआरई के संचालक राजनारायण तिवारी को अनावेदक बनाने आवेदन पेश किया था। युगलपीठ ने आवेदन को स्वीकार करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ट अधिवक्ता नमन नागरथ तथा अधिवक्ता काशी राम पटेल उपस्थित हुए।
