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भोपाल गैंगरेप केस : जबलपुर हाईकोर्ट ने शिवराज सरकार से दो हफ्तों में मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Mon, 13 Nov 2017 03:12 PM IST
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भोपाल गैंगरेप पीड़िता
- फोटो : ANI
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जबलपुर उच्च न्यायालय ने मध्यप्रदेश सरकार को 2 सप्ताह के भीतर भोपाल गैंगरेस केस में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। राजधानी में छात्रा से हुए सामूहिक बलात्कार के मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस और डॉक्टरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 31 अक्टूबर की शाम कोचिंग सेंटर से हबीबगंज जा रही 19 साल की छात्रा के साथ चार लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था।
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गैंगरेप की रिपोर्ट को लेकर पुलिसकर्मियों की लापरवाही से महकमे की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए । पहले तो पुलिस वालों ने वारदात को फिल्मी मानते हुए एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था। और फिर केस दर्ज भी हुआ तो शिकायत करने के 24 घंटों के बाद। मामले में पुलिस की फजीहत को देखते हुए इस लापरवाही के लिए कई पुलिसवालों को सस्पेंड भी किया गया था।
यही नहीं इस मामले में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही सामने आई थी, जब मेडिकल रिपोर्ट में ये लिख दिया गया कि गैंगरेप हुआ ही नहीं।
दरअसल सुल्तानिया लेडी अस्पताल में गैंगरेप पीड़िता की मेडिकल जांच हुई थी। अस्पताल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि छात्रा ने आरोपियों के साथ आपसी सहमति से यौन संबंध बनाए थे। लेकिन जब मामला सुर्खियों में आ गया तब जाकर अस्पताल प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में सुधार किया।
अब हाईरकोर्ट ने प्रदेश की शिवराज सरकार से केस में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा है।
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Bhopal gang-rape case: Jabalpur High Court orders #MadhyaPradesh govt to file an Action Taken Report within 2 weeks. The High Court also raised questions over the role of police & doctors.
— ANI (@ANI) November 13, 2017
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गौरतलब है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 31 अक्टूबर की शाम कोचिंग सेंटर से हबीबगंज जा रही 19 साल की छात्रा के साथ चार लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया था।
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गैंगरेप की रिपोर्ट को लेकर पुलिसकर्मियों की लापरवाही से महकमे की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए । पहले तो पुलिस वालों ने वारदात को फिल्मी मानते हुए एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था। और फिर केस दर्ज भी हुआ तो शिकायत करने के 24 घंटों के बाद। मामले में पुलिस की फजीहत को देखते हुए इस लापरवाही के लिए कई पुलिसवालों को सस्पेंड भी किया गया था।
यही नहीं इस मामले में डॉक्टरों की बड़ी लापरवाही सामने आई थी, जब मेडिकल रिपोर्ट में ये लिख दिया गया कि गैंगरेप हुआ ही नहीं।
दरअसल सुल्तानिया लेडी अस्पताल में गैंगरेप पीड़िता की मेडिकल जांच हुई थी। अस्पताल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि छात्रा ने आरोपियों के साथ आपसी सहमति से यौन संबंध बनाए थे। लेकिन जब मामला सुर्खियों में आ गया तब जाकर अस्पताल प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में सुधार किया।
अब हाईरकोर्ट ने प्रदेश की शिवराज सरकार से केस में अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने को कहा है।
