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बाढ़: उत्तर प्रदेश के बाद नेपाल, अब मध्य प्रदेश से बिहार में आ रहा खतरा; बाणसागर के पानी से सोन में उफान का डर
Mon, 31 Aug 2026 08:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2026 08:28 PM IST
सार
Bihar News : उत्तर प्रदेश की ओर से गंगा चढ़ रही थी। नेपाल की तरफ से गंडक और कोसी में लहरें हैं। अब मध्य प्रदेश की ओर से सोन नदी के उफनाने का डर सामने है। बिहार में बाढ़ की तीसरी तरफ से यह आशंका सामने आई है।
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मध्य प्रदेश के बाणसागर बांध के खुले 8 गेटों से छोड़ा जा रहा पानी। सोन नदी किनारे बसे जिलों में
विस्तार
नेपाल में आई त्रासदी का असर बिहार में भी देखने को मिल रहा है। गंडक में पानी बढ़-घट रहा है। उत्तर प्रदेश की ओर से गंगा में पानी आ ही रहा है। इधर कुछ हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से बिहार की कई सहायक नदियों में जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इस बीच एक अहम खबर मध्य प्रदेश से आ रही है। एमपी के बाणसागर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद बिहार में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। बांध के 8 गेट खोले गए हैं और 3277 क्यूमेक्स (क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड) पानी छोड़ा जा रहा है। इसे देखते हुए बिहार के रोहतास समेत कई जिलों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। स्थानीय लोगों से नदी किनारे न जाने की अपील भी की जा रही है।
बारिश बढ़ी तो खोलने पड़े 8 गेट
मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से बाणसागर जलाशय में पानी तेजी से बढ़ा। इसके बाद 30 अगस्त की रात दो और रेडियल गेट खोल दिए गए। अब कुल 8 गेट दो-दो मीटर तक खुले हैं और इनसे लगातार 3277 क्यूमेक्स पानी सोन नदी में छोड़ा जा रहा है। यह पानी जल्द ही बिहार के इंद्रपुरी बराज तक पहुंचेगा।
रोहतास सबसे ज्यादा सतर्क
सबसे पहले असर रोहतास जिले में देखने को मिल सकता है। डेहरी और इंद्रपुरी बराज के आसपास प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। तटीय गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है। लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर पर हर घंटे नजर रखी जा रही है।
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इन जिलों पर भी पड़ सकता है असर
सोन नदी का पानी बढ़ने से रोहतास के अलावा औरंगाबाद, कैमूर, भोजपुर, बक्सर, अरवल, गया, वैशाली और पटना के निचले इलाकों पर भी असर पड़ सकता है। बाणसागर से छोड़ा गया पानी सबसे पहले बिहार के रोहतास जिले में सोन नदी के रास्ते औरंगाबाद, अरवल और भोजपुर से होकर आगे बढ़ता है। अंत में कोइलवर, मनेर और दानापुर के पास सोन नदी गंगा में मिल जाती है।
कोइलवर और पटना पर भी नजर
फिलहाल कोइलवर में सोन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन बाणसागर से छोड़ा गया पानी पहुंचने के बाद इसमें तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं दक्षिणी पटना के निचले इलाकों में भी प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। गंगा का जलस्तर पहले से ज्यादा होने के कारण अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। प्रशासन ने साफ कहा है कि कोई भी व्यक्ति नदी में स्नान, मछली पकड़ने या नाव से अनावश्यक आवाजाही न करे। बच्चों को नदी किनारे न जाने दें और अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय प्रशासन की सूचना पर ही ध्यान दें।
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बारिश बढ़ी तो खोलने पड़े 8 गेट
मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश से बाणसागर जलाशय में पानी तेजी से बढ़ा। इसके बाद 30 अगस्त की रात दो और रेडियल गेट खोल दिए गए। अब कुल 8 गेट दो-दो मीटर तक खुले हैं और इनसे लगातार 3277 क्यूमेक्स पानी सोन नदी में छोड़ा जा रहा है। यह पानी जल्द ही बिहार के इंद्रपुरी बराज तक पहुंचेगा।
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रोहतास सबसे ज्यादा सतर्क
सबसे पहले असर रोहतास जिले में देखने को मिल सकता है। डेहरी और इंद्रपुरी बराज के आसपास प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। तटीय गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है। लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है कि जलस्तर पर हर घंटे नजर रखी जा रही है।
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इन जिलों पर भी पड़ सकता है असर
सोन नदी का पानी बढ़ने से रोहतास के अलावा औरंगाबाद, कैमूर, भोजपुर, बक्सर, अरवल, गया, वैशाली और पटना के निचले इलाकों पर भी असर पड़ सकता है। बाणसागर से छोड़ा गया पानी सबसे पहले बिहार के रोहतास जिले में सोन नदी के रास्ते औरंगाबाद, अरवल और भोजपुर से होकर आगे बढ़ता है। अंत में कोइलवर, मनेर और दानापुर के पास सोन नदी गंगा में मिल जाती है।
कोइलवर और पटना पर भी नजर
फिलहाल कोइलवर में सोन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन बाणसागर से छोड़ा गया पानी पहुंचने के बाद इसमें तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं दक्षिणी पटना के निचले इलाकों में भी प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। गंगा का जलस्तर पहले से ज्यादा होने के कारण अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। प्रशासन ने साफ कहा है कि कोई भी व्यक्ति नदी में स्नान, मछली पकड़ने या नाव से अनावश्यक आवाजाही न करे। बच्चों को नदी किनारे न जाने दें और अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय प्रशासन की सूचना पर ही ध्यान दें।