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Success Story: वायुसेना में फ्लाइंग अफसर बना किसान का बेटा, बिना कोचिंग के पहले प्रयास में पाई सफलता
Mon, 30 Jan 2023 08:00 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 30 Jan 2023 08:00 PM IST
सार
बैतूल जिले के छोटे से गांव भरकावाड़ी में रहने वाले स्नेहल वामनकर ने मुश्किल परीक्षा मानी जाने वाली एयरफोर्ट कॉमन एडमिशन टेस्ट पहले ही प्रयास में पास कर लिया। वो भी बिना कोचिंग के।
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बैतूल के किसान का बेटा फ्लाइंग अफसर बन गया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के किसान का बेटा अब वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बन गया है। वायुसेना में जाना उसका सपना था। सपने को पूरा करने तक का सफर आसान नहीं रहा। कई मुश्किलों का सामना किया। आज पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
हम बात कर रहे हैं बैतूल जिले के छोटे से गांव भरकावाड़ी में रहने वाले स्नेहल वामनकर की। उसने मुश्किल परीक्षा मानी जाने वाली एयरफोर्ट कॉमन एडमिशन टेस्ट पहले ही प्रयास में पास कर लिया। वो भी बिना कोचिंग के। साल 2020 में एएफ-कैट एग्जाम पास किया। दो साल की मेहनत के बाद 21 जनवरी 2023 को फ्लाइंग ऑफिसर की पासिंग आउट परेड के बाद वे ऑफिसर बन गए।
स्नेहल ने बताया कि सेना में जाना सपना था। शुरू से इसी के बारे में सोचता था। बैतूल के निजी स्कूल में कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई करने के दौरान ऊंचाई कम होने की वजह से एनसीसी में शामिल नहीं किया गया। तब कई बार हताश होना पड़ा। आगे की पढ़ाई के लिए भोपाल के आरजीपीवी कॉलेज में कंप्यूटर साइंस में प्रवेश लिया। यहां भी एनसीसी की सुविधा थी। यहां मैंने एनसीसी में प्रवेश ले लिया। तीन बार राज्यस्तरीय परेड में हिस्सा लेने के साथ राजपथ पर भी कर्तव्य परेड में एक बार प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।
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स्नेहल को जानने वाले बताते हैं कि अपने सपने को पूरा करने के लिए काफी मेहनत की है। स्नेहल के पिता घनश्याम वामनकर के पास 12 एकड़ खेत हैं। सीमित आय के बावजूद भी हर जरूरत को पूरा किया। खेती बस गुजर बसर के लिए ही हो पाती थी। कई मौके ऐसे आए कि बच्चों की फीस के लिए रुपए नहीं होते थे। अपने खर्च कम किए अभाव में समय काटा। स्नेहल ने बताया कि जुलाई 2020 में एएफ-कैट की तैयारी प्रारंभ की। घर पर ही 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई करता था। इस परीक्षा में देश के 204 प्रतिभागी सफल हुए थे। चयन के बाद हैदराबाद एयरफोर्स एकेडमी में एक वर्ष का प्रशिक्षण दिया गया और एक वर्ष तक तकनीकी कालेज बेंगलुरु में प्रशिक्षण हासिल कर 21 जनवरी 2023 को पास आउट हुआ।
स्नेहल ने बताया कि भोपाल में कॉलेज आने और जाने में किराया अधिक लगता था, इस कारण साइकिल से रोज 20 किमी की दूरी तय करता था। साइकिल भी पुरानी खरीदी थी। कोरोना संक्रमण काल के दौरान घर पर ही 15 से 16 घंटे तक परीक्षा की तैयारी करने वाले स्नेहल का कहना है कि युवाओं को अपना एक लक्ष्य तय करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए कड़े प्रयास करते रहना चाहिए। कभी भी असफलता से डरना नहीं, बल्कि अपनी कमियों को सुधारने की दिशा में सोचना चाहिए। एक दिन सफलता जरूर मिलेगी और हम अपने लक्ष्य को जरूर पा लेंगे।
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हम बात कर रहे हैं बैतूल जिले के छोटे से गांव भरकावाड़ी में रहने वाले स्नेहल वामनकर की। उसने मुश्किल परीक्षा मानी जाने वाली एयरफोर्ट कॉमन एडमिशन टेस्ट पहले ही प्रयास में पास कर लिया। वो भी बिना कोचिंग के। साल 2020 में एएफ-कैट एग्जाम पास किया। दो साल की मेहनत के बाद 21 जनवरी 2023 को फ्लाइंग ऑफिसर की पासिंग आउट परेड के बाद वे ऑफिसर बन गए।
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स्नेहल ने बताया कि सेना में जाना सपना था। शुरू से इसी के बारे में सोचता था। बैतूल के निजी स्कूल में कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई करने के दौरान ऊंचाई कम होने की वजह से एनसीसी में शामिल नहीं किया गया। तब कई बार हताश होना पड़ा। आगे की पढ़ाई के लिए भोपाल के आरजीपीवी कॉलेज में कंप्यूटर साइंस में प्रवेश लिया। यहां भी एनसीसी की सुविधा थी। यहां मैंने एनसीसी में प्रवेश ले लिया। तीन बार राज्यस्तरीय परेड में हिस्सा लेने के साथ राजपथ पर भी कर्तव्य परेड में एक बार प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।
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स्नेहल को जानने वाले बताते हैं कि अपने सपने को पूरा करने के लिए काफी मेहनत की है। स्नेहल के पिता घनश्याम वामनकर के पास 12 एकड़ खेत हैं। सीमित आय के बावजूद भी हर जरूरत को पूरा किया। खेती बस गुजर बसर के लिए ही हो पाती थी। कई मौके ऐसे आए कि बच्चों की फीस के लिए रुपए नहीं होते थे। अपने खर्च कम किए अभाव में समय काटा। स्नेहल ने बताया कि जुलाई 2020 में एएफ-कैट की तैयारी प्रारंभ की। घर पर ही 15 से 16 घंटे तक पढ़ाई करता था। इस परीक्षा में देश के 204 प्रतिभागी सफल हुए थे। चयन के बाद हैदराबाद एयरफोर्स एकेडमी में एक वर्ष का प्रशिक्षण दिया गया और एक वर्ष तक तकनीकी कालेज बेंगलुरु में प्रशिक्षण हासिल कर 21 जनवरी 2023 को पास आउट हुआ।
स्नेहल ने बताया कि भोपाल में कॉलेज आने और जाने में किराया अधिक लगता था, इस कारण साइकिल से रोज 20 किमी की दूरी तय करता था। साइकिल भी पुरानी खरीदी थी। कोरोना संक्रमण काल के दौरान घर पर ही 15 से 16 घंटे तक परीक्षा की तैयारी करने वाले स्नेहल का कहना है कि युवाओं को अपना एक लक्ष्य तय करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए कड़े प्रयास करते रहना चाहिए। कभी भी असफलता से डरना नहीं, बल्कि अपनी कमियों को सुधारने की दिशा में सोचना चाहिए। एक दिन सफलता जरूर मिलेगी और हम अपने लक्ष्य को जरूर पा लेंगे।
