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MP में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं: बुजुर्ग महिला का शव ले जाने नहीं मिली एंबुलेंस, खाट पर लाश ले गईं महिलाएं

Wed, 30 Mar 2022 11:38 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Wed, 30 Mar 2022 11:38 AM IST
सार

रीवा जिले में एक वृद्ध महिला को न तो समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस मिली और न ही मौत के बाद शव वाहन नसीब हुआ। बेबस घर की महिलाओं ने वृद्धा के शव को खाट पर रखा और उसे पैदल 5 किमी दूर अपने गांव ले गईं।

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Bad health services in MP: Ambulance not found carrying dead body of elderly woman, women arrived with dead body in cot
खाट पर शव ले जाती महिलाएं। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाली के दौर से गुजर रही हैं। हाल ही में रीवा जिले में इसकी एक बानगी देखने को मिली। 80 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला को न तो जीते जी एंबुलेंस मिली और न ही मौत के बाद शव वाहन नसीब हुआ। 
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जानकारी के अनुसार रीवा जिले के महसुआ गांव में मोलिया केवट (उम्र 80 साल) की तबीयत खराब थी, परिजनों ने महिला को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस बुलाई थी, लेकिन कई घंटे इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं आई। वृद्धा की हालत को देखते हुए परिजन बुजुर्ग महिला को खाट पर लेटा कर रायपुर कर्चुलियान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां डॉक्टर्स ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
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वृद्धा की मौत के बाद परिजनों ने CHC में डॉक्टर से शव वाहन की जानकारी मांगी, जिस पर सभी ने मना कर दिया। शववाहन नहीं मिलने के चलते 4 महिलाओं और एक बच्ची ने बुजुर्ग महिला के शव को खाट पर रखा और 5 किमी दूर गांव के लिए निकल पड़े। गांव के रास्ते में रायपुर कर्चुलियान थाना भी मौजूद है लेकिन वहां भी महिलाओं को मदद नहीं मिली। रास्ते से गुजर रहे बाइक सवारों ने वीडियो बनाकर प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को उजागर किया। रायपुर कर्चुलियान CSC में शव वाहन मौजूद नहीं है। 


स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिला मुख्यालय में सिर्फ रेडक्रॉस द्वारा शव वाहन उपलब्ध कराया जाता है। बाकी कहीं शव ले जाने के लिए किसी तरह की व्यवस्था नहीं है। शववाहन उपलब्ध कराना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है लेकिन प्रदेश के कई जिलों में लोगों को मौत के बाद शव वाहन तक नसीब नहीं हो पा रहे हैं। बीते दिनों छतरपुर में भी एक युवक के शव को मौत के पांच घंटे बीत जाने के बाद भी शव वाहन नसीब नहीं हुआ था, जिसे परिजन बाइक में बांधकर ले जा रहे थे, जिसे बाद में एक ऑटो चालक ने मानवता का परिचय देते हुए शव को गांव तक छोड़ था। 
 
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