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घटती आबादी से चिंतित माहेश्वरी समुदाय, एकल संतान के चलन के खिलाफ चलाएंगे जागरुकता अभियान

Sun, 28 Jul 2019 04:32 PM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sun, 28 Jul 2019 04:32 PM IST
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Awareness campaign against the practice of single child by Maheshwari community
माहेश्वरी समाज का प्रतीक चिह्न - फोटो : सोशल मीडिया

माहेश्वरी समुदाय ने एकल संतान के बढ़ते चलन के खिलाफ जागरुकता अभियान चलाने का फैसला किया है। संगठन का दावा है कि परिवारों में एकल संतान के रुझान से मौजूदा पीढ़ी को सामाजिक मूल्यों में गिरावट समेत अलग-अलग संकटों का सामना करना पड़ रहा है। अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा के सभापति श्यामसुंदर सोनी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, 'हम अपनी घटती आबादी से निश्चित तौर पर चिंतित हैं। लेकिन हम संस्कारों में गिरावट और विभिन्न सामाजिक संकटों से अपेक्षाकृत ज्यादा चिंतित हैं जो एकल संतान के बढ़ते चलन के कारण मौजूदा पीढ़ी के सामने खड़े हैं।' सोनी ने कहा कि वह एकल संतान के चलन के खिलाफ माहेश्वरी समुदाय में जागरुकता फैलाएंगे, क्योंकि वह सामाजिक आबादी में गुणात्मक सुधार लाना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस विषय में अपने समुदाय के लिए कोई फरमान जारी नहीं कर रहे हैं।

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माहेश्वरी समुदाय हिंदू संप्रदाय के तहत आता है और राजस्थान, मध्यप्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इसकी बड़ी आबादी रहती है। इस समुदाय के सामाजिक अगुवा सोनी ने कहा, 'कोई युगल कितने बच्चे पैदा करता है, यह जाहिर तौर पर उसका अपना फैसला होता है। लेकिन मौजूदा हालात के मद्देनजर हमें एक मानव समाज के रूप में विचार करना ही होगा कि नई पीढ़ी के बच्चों में बढ़ता अकेलापन, निराशा और अवसाद के साथ बुढ़ापे में माता-पिता की बुरी स्थिति जैसी समस्याओं की जड़ में एकल संतान का बढ़ता चलन तो नहीं है?
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उन्होंने दावा किया, 'आमतौर पर देखा गया है कि अगर किसी परिवार में एक से ज्यादा बच्चे होते हैं, तो उनमें त्याग, सेवा, समर्पण और सहजीविता के सामाजिक गुण नैसर्गिक रूप से विकसित होते हैं।' सोनी ने बताया कि उनके पास मौजूद आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में माहेश्वरी समुदाय के करीब 1.4 लाख परिवार हैं। यह आबादी गुजरे दशकों के मुकाबले कम है।

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