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अक्षय तृतीया तीन मई को: सामूहिक विवाहों में बाल विवाह की आशंका, सीहोर कलेक्टर ने निगरानी के लिए बनाई टीम
Mon, 18 Apr 2022 07:53 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 18 Apr 2022 07:53 PM IST
सार
अक्षय तृतीया तीन मई को है। इस दिन अबूझ मुहूर्त होने से बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह होते हैं। इन आयोजनों में बाल विवाह होने की संभावना भी रहती है। इसी के मद्देनजर सीहोर प्रशासन ने बाल विवाह की सूचना के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया है।
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बाल विवाह
- फोटो : Pixabay
विस्तार
अक्षय तृतीया पर बाल विवाह होने की संभावना भी रहती है। इसी के मद्देनजर सीहोर प्रशासन ने बाल विवाह की सूचना के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया है।
कलेक्टर चन्द्र मोहन ठाकुर ने प्रत्येक अनुभाग एवं तहसील स्तर पर कन्ट्रोल रूम स्थापित कर और इसके लिए दल भी गठित किए हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में बाल विवाहों पर निगरानी र कर बाल विवाह रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे। कंट्रोल रूम प्रभारी अपने दल के साथ पूरे समय अपने कार्यक्षेत्र पर उपस्थित रहकर जैसे ही बाल विवाह की सूचना मिलती है वैसे ही तत्काल आवश्यक कार्रवाई करेंगे। दल प्रभारी गठित दल के अतिरिक्त अपने स्तर से भी अपने क्षेत्र अन्य स्टाफ को इसके लिए निर्देशित किया गया है।
अक्षय तृतीया के अवसर पर विशेष रूप से विवाह पर निगरानी रखते हुए पूरे वर्ष अभियान अंतर्गत बाल विवाह रोकथाम के लिए दलों का गठन किया गया है। दल अपने-अपने क्षेत्राधिकार में होने वाले सामूहिक विवाह में वर वधुओं की आयु के प्रमाण पत्र का अवलोकन करेंगे। किसी भी परिस्थिति में वर की आयु 21 वर्ष से कम तथा वधू की आयु 18 वर्ष से कम न हो। वर की आयु कम पाए जाने पर बाल विवाह रोकने का प्रयास करेंगे, अन्यथा वैधानिक कार्रवाई करेंगे।
उड़नदस्तों के दल द्वारा यदि उनके क्षेत्राधिकार में कोई बाल विवाह का प्रकरण पाया जाता है तो बाल विवाह करने वाले, बाल विवाह को प्रोत्साहित करने जैसे बाल विवाह में सम्मिलित बाराती, विवाह स्थल, टेन्ट, खाना बनाने वाले रसोईया, केटरर, काजी-पण्डित तथा पत्रिका छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस के मालिक के विरुद्ध भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के कार्रवाई की जाए।
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प्रशासन ने चेतावनी भी जारी की है कि समस्त माता-पिताओं से अनुरोध है कि अपने बच्चों का विवाह विधि अनुरूप विवाह की निर्धारित आयु के पूर्व (लडकी की 18 वर्ष एवं लडके की 21 वर्ष) किसी भी दशा में ना करें। साथ ही अन्य समस्त जनसाधारण एवं विवाह में सेवा देने वाले सेवाप्रदाताओं से भी अनुरोध है कि ऐसे किसी भी विवाह कार्यक्रम में ना तो शामिल हों और ना ही अपनी सेवाएं दें अन्यथा उनके विरुद्ध अधिनियम अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसी क्रम में एक विशेष अपील विवाह कराने वाले धर्मगुरुओं, विवाह में सेवा देने वाले सेवाप्रदाताओं तथा मुद्रकों (विवाह पत्रिका छापने वाली प्रिटिंक प्रेस आदि) से की जाती है कि वे विवाह के पूर्ववर एवं वधू दोनों की सही आयु की संतुष्टि हेतु उनके मूल जन्म प्रमाण पत्र, अंकसूची, स्कूल की टी.सी. आदि की सत्यापित छायाप्रति प्राप्त कर अपने पास अनिवार्य रूप से संग्रहित करें तथा उम्र सही होने की दशा में ही विवाह की पत्रिका छापें एवं सेवाएं देना सुनिश्चित करें।
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कलेक्टर चन्द्र मोहन ठाकुर ने प्रत्येक अनुभाग एवं तहसील स्तर पर कन्ट्रोल रूम स्थापित कर और इसके लिए दल भी गठित किए हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में बाल विवाहों पर निगरानी र कर बाल विवाह रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई करेंगे। कंट्रोल रूम प्रभारी अपने दल के साथ पूरे समय अपने कार्यक्षेत्र पर उपस्थित रहकर जैसे ही बाल विवाह की सूचना मिलती है वैसे ही तत्काल आवश्यक कार्रवाई करेंगे। दल प्रभारी गठित दल के अतिरिक्त अपने स्तर से भी अपने क्षेत्र अन्य स्टाफ को इसके लिए निर्देशित किया गया है।
अक्षय तृतीया के अवसर पर विशेष रूप से विवाह पर निगरानी रखते हुए पूरे वर्ष अभियान अंतर्गत बाल विवाह रोकथाम के लिए दलों का गठन किया गया है। दल अपने-अपने क्षेत्राधिकार में होने वाले सामूहिक विवाह में वर वधुओं की आयु के प्रमाण पत्र का अवलोकन करेंगे। किसी भी परिस्थिति में वर की आयु 21 वर्ष से कम तथा वधू की आयु 18 वर्ष से कम न हो। वर की आयु कम पाए जाने पर बाल विवाह रोकने का प्रयास करेंगे, अन्यथा वैधानिक कार्रवाई करेंगे।
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उड़नदस्तों के दल द्वारा यदि उनके क्षेत्राधिकार में कोई बाल विवाह का प्रकरण पाया जाता है तो बाल विवाह करने वाले, बाल विवाह को प्रोत्साहित करने जैसे बाल विवाह में सम्मिलित बाराती, विवाह स्थल, टेन्ट, खाना बनाने वाले रसोईया, केटरर, काजी-पण्डित तथा पत्रिका छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस के मालिक के विरुद्ध भी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के कार्रवाई की जाए।
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प्रशासन ने चेतावनी भी जारी की है कि समस्त माता-पिताओं से अनुरोध है कि अपने बच्चों का विवाह विधि अनुरूप विवाह की निर्धारित आयु के पूर्व (लडकी की 18 वर्ष एवं लडके की 21 वर्ष) किसी भी दशा में ना करें। साथ ही अन्य समस्त जनसाधारण एवं विवाह में सेवा देने वाले सेवाप्रदाताओं से भी अनुरोध है कि ऐसे किसी भी विवाह कार्यक्रम में ना तो शामिल हों और ना ही अपनी सेवाएं दें अन्यथा उनके विरुद्ध अधिनियम अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इसी क्रम में एक विशेष अपील विवाह कराने वाले धर्मगुरुओं, विवाह में सेवा देने वाले सेवाप्रदाताओं तथा मुद्रकों (विवाह पत्रिका छापने वाली प्रिटिंक प्रेस आदि) से की जाती है कि वे विवाह के पूर्ववर एवं वधू दोनों की सही आयु की संतुष्टि हेतु उनके मूल जन्म प्रमाण पत्र, अंकसूची, स्कूल की टी.सी. आदि की सत्यापित छायाप्रति प्राप्त कर अपने पास अनिवार्य रूप से संग्रहित करें तथा उम्र सही होने की दशा में ही विवाह की पत्रिका छापें एवं सेवाएं देना सुनिश्चित करें।
