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Damoh: सात साल बाद रिश्वतखोर ASI को चार साल की सजा, 20 हजार रुपये जुर्माना
Wed, 16 Nov 2022 05:18 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
Published by: अरविंद कुमार
Updated Wed, 16 Nov 2022 05:18 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के दमोह जिले में विशेष कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में सजा सुनाई है। छह हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़े गए एएसआई को चार साल की सजा और 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दमोह जिले में सात साल पहले छह हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए एएसआई को विशेष कोर्ट ने भ्रष्टाचार मामले में चार साल की सजा के साथ 20 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कोर्ट की ओर से भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा-7 के तहत आरोपी एएसआई बृजमोहन पांडे तत्कालीन थाना बटियागढ़ को यह सजा सुनाई गई है।
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अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक हेमंत कुमार पांडे की ओर से की गई। उन्होंने बताया, 16 दिसंबर 2015 को आवेदक काशीराम अहिरवार ने आरोपी बृजमोहन पांडे एएसआई थाना बटियागढ़ के खिलाफ लोकायुक्त एसपी सागर के समक्ष रिश्वत मांगने का शिकायती आवेदन पत्र दिया था। 8 दिसंबर 2015 को आवेदक का बेटा प्रीतम और भतीजा राजा, किशोरी और नन्हे भाई का विवाद गुलाब, कस्सी और धिन्नू अहिरवार से हो गया था। प्रीतम ने डायल 100 पुलिस को घटना की सूचना दी थी, जिस पर एएसआई पांडे आरक्षक के साथ घटना स्थल पहुंचे थे। इसी दौरान बटियागढ़ टीआई भी मौके पर पहुंचे थे। उस समय सबको समझाइश देकर मामला शांत करा दिया था। अगले दिन 9 दिसंहर 2015 को गुलाब पिता घिन्नु ने थाने में आवेदक के बेटे प्रीतम, भतीजा राजा, किशोरी और नन्हे भाई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी, जिसकी जांच एएसआई बृजमोहन पांडे कर रहे थे।
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बता दें कि 15 दिसंबर की रात एएसआई पांडे आवेदक के घर पहुंचे और कहा कि तुम्हारा बेटा और भतीजा सब जेल जा रहे हैं। क्योंकि उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है, जिस पर आवेदक ने कहा कि उस दिन तो सबको समझा दिया था। फिर किस बात की रिपोर्ट, लेकिन एएसआई ने कहा कि 10 हजार रुपये दो तो तुम्हारा केस हल्का कर देंगे और जल्दी चालान पेशकर जमानत करवा देंगे। यदि दस हजार रुपये नहीं दिए तो लड़कों को गिरफ्तार कर जेल भेजना पड़ेगा। आवेदक एएसआई को रिश्वत नहीं देना चाहता था, बल्कि रंगे हाथों पकड़वाना चाहता था।
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आवेदक काशीराम अहिरवार ने 16 दिसंबर 2015 को लोकायुक्त कार्यालय सागर में एसपी के समक्ष उपस्थित होकर लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। शिकायत का सत्यापन लोकायुक्त पुलिस सागर की ओर से किया गया। 17 दिसंबर 2015 को आरोपी और आवेदक के मध्य रिश्वत का लेन-देन होना तय हुआ था, जिस पर लोकायुक्त पुलिस की ओर से ट्रैप दल का गठन किया गया और आरोपी को आवेदक से 500-500 के 12 नोट कुल 6000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
कार्रवाई और विवेचना के बाद अभियोग पत्र न्यायालय विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988) दमोह के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कोर्ट के विचारण के बाद अभियोजन की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्य और मौखिक साक्ष्य व प्रस्तुत न्याय दृष्टांत एवं अभियोजन के तर्कों से सहमत होते हुए 15 नवंबर को निर्णय देते हुए आरोपी बृजमोहन पांडे तत्कालीन एएसआई थाना बटियागढ़ को दोष सिद्ध पाते हुए धारा- 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 में चार साल का सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।
