{"_id":"5ba6510f867a557feb4e2fbc","slug":"aap-will-use-mobile-app-in-madhya-pradesh-election","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मध्यप्रदेश चुनाव में मोबाइल एप का प्रयोग करेगी 'आप', ये है रणनीति..","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मध्यप्रदेश चुनाव में मोबाइल एप का प्रयोग करेगी 'आप', ये है रणनीति..
अमित शर्मा, भोपाल
Updated Sat, 22 Sep 2018 07:56 PM IST
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आम आदमी पार्टी इसी साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में चार विशेष ‘मोबाइल एप’ का इस्तेमाल करेगी। इन एप्स के जरिये अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं की जानकारी रखी जाएगी। इससे पार्टी को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की सोच क्या है, उनकी परेशानियां क्या हैं और वे अगले चुनाव में किन मुद्दों से प्रेरित होकर मतदान करने जा रहे हैं। पार्टी इस जानकारी का उपयोग क्षेत्रवार अपनी रणनीति बनाने के लिए करेगी जिससे उसे अधिकतम फायदा मिल सके।
मतदाताओं के आलावा एक एप के जरिये पार्टी अपने कार्यकर्ताओं की जानकारी भी रखेगी। इससे पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पार्टी कार्यकर्ताओं के सीधे फीडबैक से रूबरू हो सकेगा। इससे वे जमीनी स्थिति का सही आकलन कर अपनी रणनीति में आवश्यक परिवर्तन कर सकेंगे। कार्यकर्ताओं को किसी तरह की परेशानी होने पर उसका समय पर निदान किया जा सकेगा और इसी एप के जरिए पार्टी नेतृत्व अपने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को सीधा निर्देश भी दे सकेगा।
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मतदाताओं के आलावा एक एप के जरिये पार्टी अपने कार्यकर्ताओं की जानकारी भी रखेगी। इससे पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पार्टी कार्यकर्ताओं के सीधे फीडबैक से रूबरू हो सकेगा। इससे वे जमीनी स्थिति का सही आकलन कर अपनी रणनीति में आवश्यक परिवर्तन कर सकेंगे। कार्यकर्ताओं को किसी तरह की परेशानी होने पर उसका समय पर निदान किया जा सकेगा और इसी एप के जरिए पार्टी नेतृत्व अपने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं को सीधा निर्देश भी दे सकेगा।
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अमेरिकी विशेषज्ञों ने बनाया है एप
मध्यप्रदेश में आम आदमी पार्टी की आईटी सेल का नेतृत्व कर रहे अरविन्द झा ने कहा कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना जैसे राज्यों के चुनावों में भारी मात्रा में कालेधन का उपयोग होता है। आम आदमी पार्टी के पास इतना फंड नहीं है कि वह भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले इस लड़ाई में कहीं ठहर सके। ऐसे में उसके पास तकनीक का सहारा लेने के आलावा और कोई विकल्प नहीं था। मतदाताओं की परेशानियों और रुचियों को जाने बिना कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई जा सकती थी। इसी कारण पार्टी ने चुनाव में एप का इस्तेमाल करने का निर्णय किया है।
जानकारी के मुताबिक़ इन एप्स को बनाने में कुछ अमेरिकी तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली गई है। पार्टी के केन्द्रीय आईटी सेल के कुछ सदस्यों ने भी इसमें योगदान दिया है. एप को पूरी तरह भारतीय परिस्थितियों के मुताबिक बनाया गया है और इससे जुड़े विकल्प भी दिए गए हैं। इसे एंड्राइड व आइफोन में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
जानकारी के मुताबिक़ इन एप्स को बनाने में कुछ अमेरिकी तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली गई है। पार्टी के केन्द्रीय आईटी सेल के कुछ सदस्यों ने भी इसमें योगदान दिया है. एप को पूरी तरह भारतीय परिस्थितियों के मुताबिक बनाया गया है और इससे जुड़े विकल्प भी दिए गए हैं। इसे एंड्राइड व आइफोन में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
बिना अनुमति नहीं लेंगे किसी की जानकारी
लेकिन क्या किसी के आंकड़े रखना गैरकानूनी नहीं है, इस सवाल पर आप नेता ने कहा कि यह तब गैरकानूनी होता जब हम किसी की जानकारी के बिना उसके आंकड़े चुराते और उसका दुरूपयोग करते। इसमें किसी भी मतदाता की जानकारी लेने और उसे इस्तेमाल करने के पहले उनकी अनुमति ली जाएगी। अभी भी हम कई मोबाइल एप्लीकेशन इस्तेमाल करते हैं और उसमें अपनी जानकारियों को साझा करते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं की पूरी जानकारी अवश्य रखी जाएगी जिससे केन्द्रीय नेतृत्व को और चुनावों की मॉनिटरिंग कमेटी को किसी कार्यकर्ता के सही प्रदर्शन की जानकारी उसे मिल सके।
भारत में अपनी तरह का होगा पहला प्रयोग
भारत में अभी तक किसी राजनीतिक दल ने इस तरह का प्रयोग नहीं किया है। हालांकि सभी राजनीतिक दल फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया साइट्स का खूब इस्तेमाल करते रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल किया था। इसके बाद अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा के चुनाव के दौरान अपनी बातों का प्रचार करने के लिए इसका जमकर लाभ उठाया था। लेकिन जहां तक इस तरह आंकड़े इकट्ठे कर मतदाताओं के रुझान पता करने का मामला है, आम आदमी पार्टी का यह पहला प्रयोग कहा जा सकता है। इसके पहले पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री इमरान खान ने पिछले चुनावों के दौरान एक एप के जरिये अपने मतदाताओं की जानकारी इकट्ठा की थी और उसके हिसाब से रणनीति बनाई थी।
कांग्रेस पर लगा था फेसबुक यूजर्स की जानकारी चुराने का आरोप
भारत में कांग्रेस पर फेसबुक की एक सहायक कंपनी से कैम्ब्रिज एनालिटिका से फेसबुक चलाने वालों की जानकारी लेने के आरोप लगे थे। भाजपा नेता और वर्तमान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि उसने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कैम्ब्रिज एनालिटिका की सेवाएं ली थीं।
