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MP News: सागर में चूरन बेचने का अलग तरीका, 20 सालों से गा रहे गाना, लय-धुन के साथ गाने में सजाते हैं रिश्ते
Mon, 29 May 2023 07:46 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 29 May 2023 07:46 PM IST
सार
चूरन बेचने वाले संजय शर्मा जब भी किसी गली से निकलते हैं तो हर कोई उनके गानों को सुनने के लिए बाहर निकल पड़ता है। चूरन बेचने के साथ ही उनके गानों की कला ने उन्हें हर गली कूचे में अलग पहचान दे दी है।
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सागर में अपने अलग अंदाज से चूरन बेचते हैं संजय शर्मा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश के सागर में इन दिनों एक चूरनवाले की चर्चा है। चूरने बेचकर परिवार पालने वाले संजय शर्मा गाने गाकर चूरन बेचते हैं। उनका गाना और गाने का तरीका थोड़ा हटकर है। वे 20 सालों से ऐसा कर रहे हैं। अब तो उन्हें हर कोई पहचानता है।
आलम ये है कि गानों के साथ चूरन बेचने वाले संजय शर्मा जब भी किसी गली से निकलते हैं तो हर कोई उनके गानों को सुनने के लिए बाहर निकल पड़ता है। चूरन बेचने के साथ ही उनके गानों की कला ने उन्हें हर गली कूचे में अलग पहचान दे दी है। लोग चूरन तो खरीदते ही हैं, लेकिन चूरन खरीदने से पहले संजय शर्मा के गाने भी सुनते हैं। संजय शर्मा लय और धुन के साथ घर परिवार के रिश्तों को गानों में संजोते हैं। चूरन के साथ रिश्तों की मिठास भी बढ़ जाती है। संजय शर्मा को गाते हुए चूरन बेचने की कला विरासत में मिली है। इससे पहले उनके चाचा गांव में घूम-घूम कर गाते हुए चूरन बेचा करते थे। चाचा के बाद अब दतिया के संजय शर्मा इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
संजय शर्मा रिश्तों की अहमियत को समझते हैं। तभी गानों में रिश्तों के साथ ही चूरन से स्वास्थ्य लाभ भी बताते हैं। संजय शर्मा का कहना है कि गानों से ना सिर्फ लोगों का चूरन लेने का मन होता है बल्कि इसी बहाने लोग चूरन के फायदे भी समझ जाते हैं। ऐसे में मेरे घर परिवार का गुजारा भी हो जाता है और लोगों का मनोरंजन भी हो जाता है।
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आलम ये है कि गानों के साथ चूरन बेचने वाले संजय शर्मा जब भी किसी गली से निकलते हैं तो हर कोई उनके गानों को सुनने के लिए बाहर निकल पड़ता है। चूरन बेचने के साथ ही उनके गानों की कला ने उन्हें हर गली कूचे में अलग पहचान दे दी है। लोग चूरन तो खरीदते ही हैं, लेकिन चूरन खरीदने से पहले संजय शर्मा के गाने भी सुनते हैं। संजय शर्मा लय और धुन के साथ घर परिवार के रिश्तों को गानों में संजोते हैं। चूरन के साथ रिश्तों की मिठास भी बढ़ जाती है। संजय शर्मा को गाते हुए चूरन बेचने की कला विरासत में मिली है। इससे पहले उनके चाचा गांव में घूम-घूम कर गाते हुए चूरन बेचा करते थे। चाचा के बाद अब दतिया के संजय शर्मा इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
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संजय शर्मा रिश्तों की अहमियत को समझते हैं। तभी गानों में रिश्तों के साथ ही चूरन से स्वास्थ्य लाभ भी बताते हैं। संजय शर्मा का कहना है कि गानों से ना सिर्फ लोगों का चूरन लेने का मन होता है बल्कि इसी बहाने लोग चूरन के फायदे भी समझ जाते हैं। ऐसे में मेरे घर परिवार का गुजारा भी हो जाता है और लोगों का मनोरंजन भी हो जाता है।
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