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गोमती में ऑक्सीजन जीरो
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गोमा में ऑक्सीजन शून्य, बैक्टीरिया 10 हजार गुना
एनजीटी की अनुश्रवण समिति की ओर से पानी के नमूनों की रिपोर्ट में सामने आई गुणवत्ता की हकीकत
राजधानी में गोमती कितनी जहरीली हो चुकी है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इसके पानी में घुलित ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा शून्य हो चुकी है। वहीं, खतरनाक माना जाने वाला फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पानी में 10 हजार गुने से अधिक मिला है। यह सच्चाई एनजीटी की पूर्वी यूपी की नदियों और जलाशयों के प्रबंधन को गठित अनुश्रवण समिति की ओर से अलग-अलग समय पर लखनऊ में गोमती के पानी के लिए नमूनों की जांच रिपोर्ट में सामने आई है।
अनुश्रवण समिति के सचिव व पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह की ओर से एनजीटी को भेजी रिपोर्ट के मुताबिक अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम, दोनों ही जगह घुलित ऑक्सीजन की मात्रा शून्य मिली। ऐसा होना नदी के अंदर जलीय जीवन के अलावा इस पानी का नहाने या दूसरे इस्तेमाल में लेना खतरनाक हो सकता है। यही वजह है कि आए दिन गोमती में मछलियों के मरने की सूचनाएं मिलती हैं। यूपीपीसीबी और सीपीसीबी के वैज्ञानिकों को कई जगह तो जलीय जीवन ही खत्म होने की संभावनाएं मिलीं। इसकी वजह यह है कि निचली सतह पर मछली व अन्य जलीय जीवों को 1-6 मिलीग्रा प्रतिली. ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऊपरी सतह पर यह मांग 4-15 मिलीग्रा प्रति ली. तक बढ़ जाती है। ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के साथ बायो ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) भी उसी तेजी से बढ़ गई है।
घसियारी मंडी पर 74 गुना मिली बीओडी
समिति ने यूपीपीसीबी के साथ घसियारी मंडी सीवरेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) का निरीक्षण किया। यहां गोमती में सीधे पानी गिरते हुए मिला। जब यहां पानी के नमूने लिए गए तो पता चला कि घुलनशील ऑक्सीजन का स्तर शून्य था। वहीं, बायो ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 223 मिलीग्रा प्रति लीटर पाई गई। नहाने को अधिकतम तीन मिलीग्रा प्रतिली. ही बीओडी मान्य है। यानी, मानक से करीब 74 गुना अधिक बीओडी बना हुआ था। तेल व ग्रीस भी मानक 10 मिलीग्रा प्रति लीटर के सापेक्ष 39.5 मिलीग्रा प्रति लीटर पाया गया।
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क्या कहती है जांच रिपोर्ट?
नमूने की तारीख जगह बीओडी फीकल कोलीफॉर्म
7 फरवरी 2019 घसियारी मंडी 22.3 49 लाख
5 फरवरी 2019 कु करैल ड्रेन, पिकनिक स्पॉट 7.0 13 लाख
5 फरवरी 2019 कु करैल ड्रेन, अबरारनगर 18.9 17 लाख
5 फरवरी 2019 कु करैल ड्रेन, एसपीएस 60.8 130 लाख
4 फरवरी 2019 केकेसी, छत्ता वाला पुल 14.0 2400 लाख
4 फरवरी 2019 केकेसी नाला 81.3 3500 लाख
4 फरवरी 2019 हैदर कैनाल पुराना किला 23.8 540 लाख
4 फरवरी 2019 हैदर कैनाल एसपीएस 36.6 350 लाख
(नालों के पानी के ये आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह गंदा पानी सीधे गोमती में गिर रहा है।)
नदी में भी पानी का बुरा हाल
जगह बीओडी फीकल कोलीफॉर्म
अपस्ट्रीम, डालीगंज पुल 18.8 3.3 लाख
अपस्ट्रीम, घसियारी मंडी 9.55 13 लाख
डाउनस्ट्रीम, हैदर कैनाल 12.5 17 लाख
डाउनस्ट्रीम, लामार्ट बंधा 8.7 35 लाख
...इसलिए है यह हाल
यूपीपीसीबी और सीपीसीबी की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक नदी में पानी की गुणवत्ता खराब होने की वजह कूड़ा, प्लास्टिक कचरा, सीवर, अस्पताली कचरा गिराया जाना है। निरीक्षण में कई जगह ऐसा होता हुआ भी मिला। इसका असर प्रत्यक्ष तौर पर जलीय जीवन पर होगा तो यह मानव जीवन पर भी बुरा असर डालेगा। इससे जल के साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ेगा।
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एनजीटी की अनुश्रवण समिति की ओर से पानी के नमूनों की रिपोर्ट में सामने आई गुणवत्ता की हकीकत
राजधानी में गोमती कितनी जहरीली हो चुकी है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इसके पानी में घुलित ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा शून्य हो चुकी है। वहीं, खतरनाक माना जाने वाला फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पानी में 10 हजार गुने से अधिक मिला है। यह सच्चाई एनजीटी की पूर्वी यूपी की नदियों और जलाशयों के प्रबंधन को गठित अनुश्रवण समिति की ओर से अलग-अलग समय पर लखनऊ में गोमती के पानी के लिए नमूनों की जांच रिपोर्ट में सामने आई है।
अनुश्रवण समिति के सचिव व पूर्व जिला जज राजेंद्र सिंह की ओर से एनजीटी को भेजी रिपोर्ट के मुताबिक अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम, दोनों ही जगह घुलित ऑक्सीजन की मात्रा शून्य मिली। ऐसा होना नदी के अंदर जलीय जीवन के अलावा इस पानी का नहाने या दूसरे इस्तेमाल में लेना खतरनाक हो सकता है। यही वजह है कि आए दिन गोमती में मछलियों के मरने की सूचनाएं मिलती हैं। यूपीपीसीबी और सीपीसीबी के वैज्ञानिकों को कई जगह तो जलीय जीवन ही खत्म होने की संभावनाएं मिलीं। इसकी वजह यह है कि निचली सतह पर मछली व अन्य जलीय जीवों को 1-6 मिलीग्रा प्रतिली. ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऊपरी सतह पर यह मांग 4-15 मिलीग्रा प्रति ली. तक बढ़ जाती है। ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के साथ बायो ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) भी उसी तेजी से बढ़ गई है।
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घसियारी मंडी पर 74 गुना मिली बीओडी
समिति ने यूपीपीसीबी के साथ घसियारी मंडी सीवरेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) का निरीक्षण किया। यहां गोमती में सीधे पानी गिरते हुए मिला। जब यहां पानी के नमूने लिए गए तो पता चला कि घुलनशील ऑक्सीजन का स्तर शून्य था। वहीं, बायो ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) 223 मिलीग्रा प्रति लीटर पाई गई। नहाने को अधिकतम तीन मिलीग्रा प्रतिली. ही बीओडी मान्य है। यानी, मानक से करीब 74 गुना अधिक बीओडी बना हुआ था। तेल व ग्रीस भी मानक 10 मिलीग्रा प्रति लीटर के सापेक्ष 39.5 मिलीग्रा प्रति लीटर पाया गया।
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क्या कहती है जांच रिपोर्ट?
नमूने की तारीख जगह बीओडी फीकल कोलीफॉर्म
7 फरवरी 2019 घसियारी मंडी 22.3 49 लाख
5 फरवरी 2019 कु करैल ड्रेन, पिकनिक स्पॉट 7.0 13 लाख
5 फरवरी 2019 कु करैल ड्रेन, अबरारनगर 18.9 17 लाख
5 फरवरी 2019 कु करैल ड्रेन, एसपीएस 60.8 130 लाख
4 फरवरी 2019 केकेसी, छत्ता वाला पुल 14.0 2400 लाख
4 फरवरी 2019 केकेसी नाला 81.3 3500 लाख
4 फरवरी 2019 हैदर कैनाल पुराना किला 23.8 540 लाख
4 फरवरी 2019 हैदर कैनाल एसपीएस 36.6 350 लाख
(नालों के पानी के ये आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि यह गंदा पानी सीधे गोमती में गिर रहा है।)
नदी में भी पानी का बुरा हाल
जगह बीओडी फीकल कोलीफॉर्म
अपस्ट्रीम, डालीगंज पुल 18.8 3.3 लाख
अपस्ट्रीम, घसियारी मंडी 9.55 13 लाख
डाउनस्ट्रीम, हैदर कैनाल 12.5 17 लाख
डाउनस्ट्रीम, लामार्ट बंधा 8.7 35 लाख
...इसलिए है यह हाल
यूपीपीसीबी और सीपीसीबी की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक नदी में पानी की गुणवत्ता खराब होने की वजह कूड़ा, प्लास्टिक कचरा, सीवर, अस्पताली कचरा गिराया जाना है। निरीक्षण में कई जगह ऐसा होता हुआ भी मिला। इसका असर प्रत्यक्ष तौर पर जलीय जीवन पर होगा तो यह मानव जीवन पर भी बुरा असर डालेगा। इससे जल के साथ वायु प्रदूषण भी बढ़ेगा।