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सुसाइड नोट में लिखा: 'मेरे मम्मी-पापा बहुत अच्छे हैं, मुझे रेलवे में नौकरी नहीं मिली, इसलिए दुनिया छोड़...'
Mon, 16 Jan 2023 11:52 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 16 Jan 2023 11:52 AM IST
सार
लखनऊ में रेलवे में नौकरी नहीं लगने से परेशान युवक ने फांसी लगाकर जान दे दी। युवक के पास से सुसाइड नोट मिला है। इसमें लिखा है कि मेरा रेलवे में सलेक्शन नहीं हुआ। इसलिए जान दे रहा हूं। पिता ने जांच की मांग करते हुए तहरीर दी है।
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लखनऊ का निगोह थाना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लखनऊ के निगोहां के करनपुर गांव में शुक्रवार को दिलीप रावत (34) ने झोपड़ी में फांसी लगा ली। शनिवार सुबह पड़ताल के दौरान शव के पास से पुलिस को सुसाइड नोट मिला। इसमें युवक ने रेलवे में नौकरी न मिलने से परेशान होने की बात लिखते हुए खुद को मौत का जिम्मेदार बताया है।
प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार यादव के मुताबिक, करनपुर निवासी हनुमान रावत रेलवे से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि बेटा दिलीप देर शाम करीब आठ बजे बिना कुछ बताए निकल गया था और देर रात तक नहीं लौटा। सुबह तलाश शुरू की तो सड़क किनारे बनी उनकी दुकानों के पीछे झोपड़ी में फंदे से लटकता बेटे का शव मिला।
सूचना पर पुलिस ने डॉग स्क्वायड की टीम को भी बुला लिया था, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। हनुमान रावत ने बेटे की मौत को संदिग्ध मानते हुए तहरीर दी है। परिवार में छोटा भाई संदीप रावत सेना में है।
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‘मौत का जिम्मेदार का मैं हूं’
मेरे मम्मी-पापा बहुत अच्छे हैं। मेरा रेलवे में नहीं हुआ। इसलिए मैं अपनी जान दे रहा हूं। मेरे घर वाले इतने अच्छे हैं कि मेरे घर वालों की तरह सभी को परिवार मिले। मेरी मौत का जिम्मेदार मैं खुद हूं।
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प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार यादव के मुताबिक, करनपुर निवासी हनुमान रावत रेलवे से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि बेटा दिलीप देर शाम करीब आठ बजे बिना कुछ बताए निकल गया था और देर रात तक नहीं लौटा। सुबह तलाश शुरू की तो सड़क किनारे बनी उनकी दुकानों के पीछे झोपड़ी में फंदे से लटकता बेटे का शव मिला।
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सूचना पर पुलिस ने डॉग स्क्वायड की टीम को भी बुला लिया था, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। हनुमान रावत ने बेटे की मौत को संदिग्ध मानते हुए तहरीर दी है। परिवार में छोटा भाई संदीप रावत सेना में है।
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‘मौत का जिम्मेदार का मैं हूं’
मेरे मम्मी-पापा बहुत अच्छे हैं। मेरा रेलवे में नहीं हुआ। इसलिए मैं अपनी जान दे रहा हूं। मेरे घर वाले इतने अच्छे हैं कि मेरे घर वालों की तरह सभी को परिवार मिले। मेरी मौत का जिम्मेदार मैं खुद हूं।