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घर बनाने व उद्योग लगाने के लिए नहीं काटने होंगे तहसील के चक्कर, योगी सरकार ने राजस्व संहिता में किया बदलाव
Wed, 09 Sep 2020 11:39 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 09 Sep 2020 11:39 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
कृषि भूमि में घर बनाने, मकान के लिए कर्ज लेने, नक्शा पास कराने या उद्योग लगाने के लिए अब महीनों तक तहसील के चक्कर नहीं काटने होंगे। तहसील के एसडीएम को 45 दिन के भीतर कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन पर निर्णय करना होगा। ऐसा नहीं करने पर स्वत: अनुमति मान ली जाएगी। सरकार ने इसके लिए राजस्व संहिता के नियमों में बदलाव संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है।
प्रदेश में कृषि भूमि में घर बनाने, घर बनाने के लिए कर्ज लेने, नक्शा पास कराने, उद्योग लगाने, होटल बनाने या अन्य कारोबार करने के लिए तहसील के उपजिलाधिकारी की अनुमति लेनी जरूरी है। बैंक , वित्तीय संस्थाएं व प्राधिकरण बिना भू-उपयोग परिवर्तन के ऐसे कार्य को आगे नहीं बढ़ाते।
प्रदेश में जैसे-जैसे औद्योगिक, वाणिज्यिक व आवासीय गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल हो रही है, कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन के मामले बढ़ते जा रहे हैं। विकासकर्ता, निवेशक, किसान तथा आम लोग शिकायत करते रहे हैं कि राजस्व अधिकारी लंबे समय तक ऐसे मामलों में निर्णय नहीं लेते हैं।
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उन्हें महीनों तक दौड़ाया जाता है और कई बार शोषण का भी शिकार होना पड़ता है। इससे निवेशकों, प्राइवेट प्लेयर्स के साथ आम लोगों में सरकार की छवि खराब होती है। आर्थिक गतिविधियों के विस्तार व रोजगार सृजन में भी विलंब होता है।
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प्रदेश में कृषि भूमि में घर बनाने, घर बनाने के लिए कर्ज लेने, नक्शा पास कराने, उद्योग लगाने, होटल बनाने या अन्य कारोबार करने के लिए तहसील के उपजिलाधिकारी की अनुमति लेनी जरूरी है। बैंक , वित्तीय संस्थाएं व प्राधिकरण बिना भू-उपयोग परिवर्तन के ऐसे कार्य को आगे नहीं बढ़ाते।
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प्रदेश में जैसे-जैसे औद्योगिक, वाणिज्यिक व आवासीय गतिविधियों को बढ़ावा देने की पहल हो रही है, कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन के मामले बढ़ते जा रहे हैं। विकासकर्ता, निवेशक, किसान तथा आम लोग शिकायत करते रहे हैं कि राजस्व अधिकारी लंबे समय तक ऐसे मामलों में निर्णय नहीं लेते हैं।
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उन्हें महीनों तक दौड़ाया जाता है और कई बार शोषण का भी शिकार होना पड़ता है। इससे निवेशकों, प्राइवेट प्लेयर्स के साथ आम लोगों में सरकार की छवि खराब होती है। आर्थिक गतिविधियों के विस्तार व रोजगार सृजन में भी विलंब होता है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कृषि भूमि के उपयोग परिवर्तन के लिए पारदर्शी प्रक्रिया की पहल करते हुए आवेदन पर 45 दिन में निर्णय लेना अनिवार्य कर दिया है।
अब एसडीएम को तय समय में आवेदन की जांच करवाकर भू-उपयोग परिवर्तन पर निर्णय देना होगा। यदि वह आवेदन निरस्त करता है तो उसका स्पष्ट लिखित कारण बताना होगा।
इस तरह होगा असर
अब एसडीएम को तय समय में आवेदन की जांच करवाकर भू-उपयोग परिवर्तन पर निर्णय देना होगा। यदि वह आवेदन निरस्त करता है तो उसका स्पष्ट लिखित कारण बताना होगा।
इस तरह होगा असर
- प्रदेश में भू-उपयोग परिवर्तन के हजारों मामले लंबित बताए जा रहे हैं। ऐसे सभी आवेदनों का 45 दिन के भीतर निपटारा करना होगा।
- बड़ी संख्या में निवेशक औद्योगिक इकाइयों के लिए किसानों से सीधे भूमि लेने का प्रयास कर रहे हैं। तय समय सीमा में भू-उपयोग परिवर्तन से निजी प्रोजेक्ट में तेजी आएगी।
- औद्योगिक गलियारों व नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भूमि लेने की कार्यवाही भी चल रही है। तय समय सीमा में निर्णय से उद्योगों के लिए तेजी से जमीन उपलब्ध हो सकेगी।
- स्थानीय स्तर पर रोजगार-कारोबार शुरू करने के लिए लोग आगे आ रहे हैं। वे आसानी से अपनी योजना के अनुसार काम बढ़ा सकेंगे।