कई सियासी संकेत देगा मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा, यहीं से लड़ सकते हैं चुनाव
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा सियासी संकेत भी देगा। साथ ही यह भी बताएगा कि प्रदेश खासकर भाजपा की सियासत भविष्य में क्या करवट लेने वाली है। हालांकि अभी मुख्यमंत्री के अयोध्या दौरे की अधिकृत घोषणा नहीं हुई है लेकिन प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री 31 मई को अयोध्या-फैजाबाद जाएंगे।
सियासी गलियारों में चर्चा है कि भले ही उनकी यह यात्रा दूसरे मंडलों की तरह कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा के लिए तय हुई हो। पर, यह सिर्फ इन्हीं कामों तक सीमित रहने वाली नहीं है। इस यात्रा के राजनीतिक निहितार्थ हैं जो भविष्य में सामने आएंगे।
दरअसल, न सिर्फ भाजपा बल्कि देश की राजनीति में अयोध्या बीते ढाई दशक से ज्यादा समय से काफी महत्वपूर्ण बनी हुई है। वजह, अयोध्या आंदोलन के बाद सियासत की धारा ही नहीं बदली बल्कि भाजपा की ताकत बढ़ाने में भी इस स्थान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इसीलिए भगवा टोली के नेताओं का यहां आना हमेशा खास बात रही है। ऐसे में जब योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्यमंत्री जा रहे हों तो उसे सिर्फ विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था की समीक्षा तक सीमित नहीं माना जा सकता।
इसलिए चर्चा में है दौरा
मुख्यमंत्री समीक्षा करने के अलावा श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास के जन्मोत्सव पर आयोजित समारोह में भी शामिल होंगे।
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा कहते हैं कि योगी पहले भी नृत्यगोपाल दास के इस कार्यक्रम में आते रहे हैं। इसलिए उनके आने का कोई खास अर्थ नहीं है। पर, पहले और अब में काफी फर्क आ चुका है।
फिर, जिस तरह मुख्यमंत्री बनने की घोषणा पर अयोध्या के प्रमुख साधु-संतों की ओर से यह प्रतिक्रिया सामने आई थी कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का काम अब जरूर पूरा होगा, उससे भी यह साफ है कि योगी के इस दौरे में अयोध्या के संत-महात्मा किसी न किसी बहाने मंदिर निर्माण की अपनी आकांक्षा उनके सामने जरूर रखेंगे।
जन्मभूमि दर्शन को जाते हैं या नहीं
यह दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर लगभग 17 वर्षों बाद भाजपा का कोई नेता अयोध्या जाएगा। योगी खुद श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुडे़ रहे हैं।
वह मुख्यमंत्री होने के साथ उस गोरक्षपीठ के महंत भी हैं जो अयोध्या आंदोलन के सूत्रधारों में शामिल रही है।
ऐसे में देखने वाली बात यह भी होगी कि बतौर मुख्यमंत्री उनकी इस अयोध्या यात्रा में कौन से मंदिर और मठ उनके दर्शन-पूजन का केंद्र बनते हैं। खासतौर से इस पर नजर जरूर रहेगी कि वह श्रीराम जन्मभूमि पर दर्शन के लिए जाते हैं या नहीं। दोनों ही स्थितियों में भविष्य के लिहाज से खास अर्थ निकलेंगे।
अयोध्या से चुनाव लड़ने की भी चर्चा
मुख्यमंत्री योगी अभी सांसद हैं। वह विधानसभा या विधान परिषद में किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उन्हें छह महीने में किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। योगी की कद काठी, पृष्ठभूमि तथा विधान परिषद की स्थिति देखते हुए यही माना जा रहा है कि वह चुनाव लड़कर ही विधानसभा में पहुंचेंगे।
कुछ दिनों से सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि समीकरण साधने और लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर एजेंडे को धार देने के लिए गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी की नई कर्मभूमि अयोध्या भी हो सकती है। वह यहां से चुनाव लड़कर विधानसभा में भाजपा की सियासत के इस केंद्र का प्रतिनिधित्व संभालकर खास संदेश दे सकते हैं।
हालांकि अभी इस बाबत भाजपा या योगी की तरफ से कोई संकेत नहीं मिला है। मगर, माना जा रहा है कि योगी को यहां से चुनाव लड़ाकर भाजपा लोगों को अयोध्या पर आस्था और इसके महत्व का संदेश देने की कोशिश कर सकती है।
इससे भाजपा को यह कहने का मौका भी मिल जाएगा कि उसके लिए अयोध्या कितनी महत्वपूर्ण है, इसका प्रमाण सिर्फ इसी से मिल जाता है कि उसने मुख्यमंत्री के रूप में अयोध्या के हाथ में पूरे प्रदेश की बागडोर सौंप दी है।