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बस्तीः 40 करोड़ के सड़क घपले में पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन दोषी, होगी कड़ी कार्रवाई
Sun, 19 Jan 2020 03:23 AM IST
संजीव कुमार झा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 19 Jan 2020 03:23 AM IST
सार
- मनमाने ढंग से जहां चाहा, वहां दिखा दिया खर्च
- अस्वीकृत कामों पर भी किया फंड का डायवर्जन
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पीडब्ल्यूडी
- फोटो : social media
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विस्तार
बस्ती के 40 करोड़ रुपये के सड़क घपले में पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन आलोक रमण पर दोष साबित हो गए हैं। जांच अधिकारी की रिपोर्ट शासन को मिल चुकी है। इसमें बताया गया है कि ऐसे कामों पर भी करीब 10 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए हैं, जोकि शासन से स्वीकृत ही नहीं थे। इसे भ्रष्टाचार का गंभीर कृत्य माना जाता है। शासन या मुख्यालय की पूर्वानुमति के बिना विभाग में कोई भी निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता है।
वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए धनराशि दी गई थी। जब मौके पर काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत की। प्रारंभिक जांच में ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में मिलीं। मुख्यालय ने अधीक्षण अभियंता शशि भूषण की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया। इस टीम ने अपनी जांच में करीब 40 करोड़ का फंड डायवर्जन (एक मद का दूसरे मद में खर्च करना) बताया। साथ ही इस धनराशि के बड़े हिस्से के गबन की आशंका भी जताई।
इसके बाद मामले की विस्तृत जांच पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता, ग्रामीण सड़क को सौंपी गई। शासन को भेजी उनकी रिपोर्ट में कहा गया है कि बस्ती में बड़े पैमाने पर धनराशि का एक मद से दूसरे मद में डायवर्जन किया गया। नियमानुसार, ऐसा नहीं किया जा सकता है। इसके लिए एक्सईएन आलोक रमण को जिम्मेदार ठहराते हुए यह भी कहा गया है कि उन्होंने उन सड़कों पर भी फंड डायवर्ट दिखाया, जो काम किसी स्तर से स्वीकृत नहीं थे। वहीं, इस मामले में आरोपी अवर अभिंयताओं को भी आरोप पत्र दिए जा चुके हैं। सहायक अभियंताओं ने अपने आरोप पत्र के जवाब दे दिए हैं और उन पर विभाग का जवाब मांगा गया है।
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शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने पर एक्सईएन आलोक रमण से उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा (अनुशासन एवं अपील नियमावली)-1999 के तहत जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद इस मामले में शासन अंतिम निर्णय लेगा। नियमावली के नियम-7 के तहत हुई इस जांच में दोषियों के खिलाफ कठोर दंड के प्रावधान हैं। यहां बता दें कि बस्ती में सड़क घपला सामने आने पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जांच के बाद कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसलिए इस मामले में कड़ी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
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वर्ष 2017-18 और 2018-19 में बस्ती में 300 से ज्यादा सड़कों के निर्माण के लिए धनराशि दी गई थी। जब मौके पर काम नहीं हुआ तो स्थानीय विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत की। प्रारंभिक जांच में ये गड़बड़ियां बस्ती के प्रांतीय खंड, पीडब्ल्यूडी के अधीन आने वाले क्षेत्र में मिलीं। मुख्यालय ने अधीक्षण अभियंता शशि भूषण की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया। इस टीम ने अपनी जांच में करीब 40 करोड़ का फंड डायवर्जन (एक मद का दूसरे मद में खर्च करना) बताया। साथ ही इस धनराशि के बड़े हिस्से के गबन की आशंका भी जताई।
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इसके बाद मामले की विस्तृत जांच पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता, ग्रामीण सड़क को सौंपी गई। शासन को भेजी उनकी रिपोर्ट में कहा गया है कि बस्ती में बड़े पैमाने पर धनराशि का एक मद से दूसरे मद में डायवर्जन किया गया। नियमानुसार, ऐसा नहीं किया जा सकता है। इसके लिए एक्सईएन आलोक रमण को जिम्मेदार ठहराते हुए यह भी कहा गया है कि उन्होंने उन सड़कों पर भी फंड डायवर्ट दिखाया, जो काम किसी स्तर से स्वीकृत नहीं थे। वहीं, इस मामले में आरोपी अवर अभिंयताओं को भी आरोप पत्र दिए जा चुके हैं। सहायक अभियंताओं ने अपने आरोप पत्र के जवाब दे दिए हैं और उन पर विभाग का जवाब मांगा गया है।
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शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने पर एक्सईएन आलोक रमण से उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा (अनुशासन एवं अपील नियमावली)-1999 के तहत जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद इस मामले में शासन अंतिम निर्णय लेगा। नियमावली के नियम-7 के तहत हुई इस जांच में दोषियों के खिलाफ कठोर दंड के प्रावधान हैं। यहां बता दें कि बस्ती में सड़क घपला सामने आने पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने जांच के बाद कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसलिए इस मामले में कड़ी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।