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फर्जीवाड़ा छुपाने के लिए बड़ी कार्यदायी संस्थाएं नहीं दे रहीं बिल
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नगर निगम की चेतावनी के बाद कई कार्यदायी संस्थाओं ने जमा किए बिल। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
प्रवेंद्र गुप्ता
फर्जीवाड़ा छुपाने के लिए बड़ी कार्यदायी संस्थाएं अब मांगे जाने के बाद भी भुगतान के लिए बिल नहीं दे रही हैं।
कार्रवाई की चेतावनी पर कम कर्मचारियों वाली संस्थाओं ने तो बिल जमा कर दिए, पर पांच हजार से अधिक कर्मियों वाली करीब छह बड़ी कार्यदायी संस्थाएं चुप्पी साधे हैं।
दो महीने पहले पूरे शहर में हुई औचक जांच में करीब तीस प्रतिशत कर्मचारी कम मिले थे। इसके बाद उनके बकाया बिल में उसी आधार पर कटौती किए जाने का आदेश है।
इससे बचने के लिए ही कार्यदायी संस्थाएं बिल नहीं दे रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों की दिवाली फीकी हो सकती है।
मालूम हो कि दीप पर्व को देखते हुए मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी ने 28 अक्तूबर को आदेश दिया था कि एक नवंबर तक नियमित, संविदा और कार्यदायी सभी तरह के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कर विभाग दो नवंबर को रिपोर्ट दें।
इसके बाद छोटी कार्यदायी संस्थाओं के करीब दो करोड़ रुपये के बिल पहुंच गए, पर बड़ी कार्यदायी संस्थाएं अभी तक आठ करोड़ के बिल दबाए हैं, ताकि उनका फर्जीवाड़ा कहीं सामने न आ जाए।
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नगर निगम में करीब 12 हजार कर्मचारी 40 कार्यदायी संस्थाओं के जरिए लगे हैं। इन पर हर महीने करीब दस करोड़ रुपये का खर्च आता है।
कर्मचारी के खाते में भुगतान के आदेश, फिर बिल देने में क्या परेशानी
धांधली रोकने के लिए शासन के आदेश के तहत कार्यदायी संस्थाओं को कर्मचारियों के खाते में ही भुगतान करना है। इसे लेकर बैंक खातों की पूरी रिपोर्ट भी नगर निगम ले रहा है। ऐसे में फर्जीवाड़ा कर जल्द बिल देने में भी कार्यदायी संस्थाओं को परेशानी हो रही है। भुगतान में खेल जारी रखने के लिए कार्यदायी संस्थाएं स्मार्ट मोबाइल भी लेने से भाग रही हैं। मजे की बात है कि भुगतान के लिए जुगाड़ लगाने वाले नेता और प्रभावशाली लोग भी नदारद हैं जो कार्यदायी संस्थाओं के खेल में कमीशनबाजी करते हैं।
जो कार्यदायी संस्थाएं बिल नही देंगी तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। ज्यादातर के बिल आ गए हैं। जोकि करीब दो करोड़ के हैं। पूरी कोशिश की जा रही है कि कार्यदायी के सभी कर्मचारियों को दिवाली से पहले वेतन मिल जाए।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त
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फर्जीवाड़ा छुपाने के लिए बड़ी कार्यदायी संस्थाएं अब मांगे जाने के बाद भी भुगतान के लिए बिल नहीं दे रही हैं।
कार्रवाई की चेतावनी पर कम कर्मचारियों वाली संस्थाओं ने तो बिल जमा कर दिए, पर पांच हजार से अधिक कर्मियों वाली करीब छह बड़ी कार्यदायी संस्थाएं चुप्पी साधे हैं।
दो महीने पहले पूरे शहर में हुई औचक जांच में करीब तीस प्रतिशत कर्मचारी कम मिले थे। इसके बाद उनके बकाया बिल में उसी आधार पर कटौती किए जाने का आदेश है।
इससे बचने के लिए ही कार्यदायी संस्थाएं बिल नहीं दे रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों की दिवाली फीकी हो सकती है।
मालूम हो कि दीप पर्व को देखते हुए मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी ने 28 अक्तूबर को आदेश दिया था कि एक नवंबर तक नियमित, संविदा और कार्यदायी सभी तरह के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कर विभाग दो नवंबर को रिपोर्ट दें।
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इसके बाद छोटी कार्यदायी संस्थाओं के करीब दो करोड़ रुपये के बिल पहुंच गए, पर बड़ी कार्यदायी संस्थाएं अभी तक आठ करोड़ के बिल दबाए हैं, ताकि उनका फर्जीवाड़ा कहीं सामने न आ जाए।
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नगर निगम में करीब 12 हजार कर्मचारी 40 कार्यदायी संस्थाओं के जरिए लगे हैं। इन पर हर महीने करीब दस करोड़ रुपये का खर्च आता है।
कर्मचारी के खाते में भुगतान के आदेश, फिर बिल देने में क्या परेशानी
धांधली रोकने के लिए शासन के आदेश के तहत कार्यदायी संस्थाओं को कर्मचारियों के खाते में ही भुगतान करना है। इसे लेकर बैंक खातों की पूरी रिपोर्ट भी नगर निगम ले रहा है। ऐसे में फर्जीवाड़ा कर जल्द बिल देने में भी कार्यदायी संस्थाओं को परेशानी हो रही है। भुगतान में खेल जारी रखने के लिए कार्यदायी संस्थाएं स्मार्ट मोबाइल भी लेने से भाग रही हैं। मजे की बात है कि भुगतान के लिए जुगाड़ लगाने वाले नेता और प्रभावशाली लोग भी नदारद हैं जो कार्यदायी संस्थाओं के खेल में कमीशनबाजी करते हैं।
जो कार्यदायी संस्थाएं बिल नही देंगी तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। ज्यादातर के बिल आ गए हैं। जोकि करीब दो करोड़ के हैं। पूरी कोशिश की जा रही है कि कार्यदायी के सभी कर्मचारियों को दिवाली से पहले वेतन मिल जाए।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त