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रक्तदान करने में महिलाएं आगे
मनीष सिंह/लखनऊ
Updated Sat, 07 Dec 2013 01:22 AM IST
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रक्तदान में महिलाएं भी आगे हैं। आलम यह है कि सरकारी अस्पतालों में कुछ महिलाएं घर-परिवार में बगैर बताए हर तीन महीने में अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचकर रक्तदान कर रही हैं।
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ब्लड बैंक प्रभारियों का कहना है निरंतर महिलाएं ब्लड बैंक में रक्तदान के लिए पहुंच रही हैं। अधिकारियों की मानें तो हर महीने में वालंटियर महिला ब्लड डोनर की संख्या समय के साथ तेजी से बढ़ रही है।
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सिविल अस्पताल की पैथोलॉजी की डॉ. रत्ना पांडे बताती हैं कि महिलाएं स्वैच्छिक रक्तदान में काफी दिलचस्पी ले रही हैं।
उनका कहना है कि हर महीने अस्पताल में 10 से 12 की संख्या में महिला डोनर रक्तदान के लिए पहुंच रही हैं।
वह बताती हैं कि रक्तदान करने वालों में अस्पताल की महिला स्टाफ भी आगे हैं। वो डोनर का नाम न बताने की शर्त पर कहती हैं कि सदर की रहने वाली एक महिला हर तीन महीने पर अस्पताल में ब्लड डोनेट करने आती है।
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इसके साथ ही उनकी कई महिला साथी भी अस्पताल पहुंचकर रक्तदान कर चुकी हैं। डॉ. रत्ना पांडे की मानें तो इस तरह की महिलाएं रक्तदान को बढ़ावा दे रहीं है।
लोगों को अब ये सोचना छोड़ देना होगा कि महिलाएं रक्तदान नहीं करती हैं, जबकि सच्चाई यह है कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले अधिक संख्या में रक्तदान कर सकती हैं।
इसी तरह बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. टीपी सिंह बताते हैं कि अस्पताल में स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों की संख्या बेहद कम है।
इसके बावजूद अस्पताल के ब्लड बैंक में हर महीने कम से कम छह से सात महिलाएं स्वैच्छिक रक्तदान कर रही हैं।
अस्पताल के अधिकारी महिलाओं के इस कदम को लेकर बेहद उत्साहित हैं। उनका मानना है कि अगर हालात यही रहे और महिलाओं को जागरूक किया जाता रहा तो स्वैच्छिक रक्तदान करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ेगी।