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Mothers Day Special: उच्च पदों पर आसीन महिलाओं ने अपने बच्चों की बेहतर परवरिश से संवारा उनका भविष्य

Sun, 10 May 2026 12:07 PM IST
लखनऊ ब्यूरो अभिषेक सहज, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अभिषेक सहज, अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sun, 10 May 2026 12:07 PM IST
सार

ममता अपनी लुटाती वो विश्वास दे, दुनिया रूठे मगर फिर भी मां साथ दे...। मां एक ऐसा किरदार जिसमें पूरी कायनात समाई है। हर तकलीफ सहकर भी मां अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए कोई कसर नहीं छोड़ती।

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Mother's Day Special Women Holding High Positions Shaped Their Children Future Through Excellent Parenting
डॉ. सुमिता मिश्रा और डॉ. संजीव मिश्रा अपनी मां प्रो. प्रेम कुमारी मिश्रा के साथ। - फोटो : स्वयं

विस्तार

मदर्स-डे पर हम ऐसी कामकाजी मांओं के बारे में आपको बताने जा रहे हैं। जिन्होंने उच्च पदों पर रहते हुए न सिर्फ अपने ऑफिस और काम की जिम्मेदारी को बखूबी निभाया बल्कि घर के साथ बच्चों की परवरिश में भी कोई कमी नहीं छोड़ी। उनकी इसी दोहरी जिम्मेदारी ने बच्चों को भी ऐसे मुकाम तक पहुंचाया जिस पर वे गर्व महसूस कर सकें।
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राजधानी में केजीएमसी जैसे संस्थान में प्रिंसिपल रहीं प्रो. प्रेम कुमारी मिश्रा ने इतने अहम पूर्ण पद पर रहते हुए अपने बच्चों को भी बेहतर तालीम और परवरिश दी। उनकी बेटी डॉ. सुमिता मिश्रा आईएएस हैं और इस समय हरियाणा सरकार में वित्तीय आयुक्त राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग के साथ ही अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग व आयुष विभाग जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं।
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बेटी और बेटों के साथ डॉ. शोभा दीक्षित भावना - फोटो : स्वयं
प्रो. प्रेम कुमारी के बेटे प्रो. संजीव मिश्रा भी अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन हैं। डॉ. सुमिता कहती हैं कि हमारी सफलता में मां का योगदान सबसे ज्यादा हैं। उन्होंने केजीएमसी में जिम्मेदार पदों पर रहते हुए बच्चों की पढ़ाई और परवरिश में कभी कोई कमी नहीं छोड़ी। वे हमारी आदर्श हैं और आज हम जहां भी हैं उसमें उनका त्याग, समर्पण व मार्गदर्शन शामिल है।

उत्तर प्रदेश सचिवालय में निजी सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुईं डॉ. शोभा दीक्षित ‘भावना’ ने मात्र 19 साल की उम्र में नौकरी शुरू कर दी थी। डॉ. शोभा ने बताया कि शादी के बाद घर और फिर तीन बच्चों की जिम्मेदारी के साथ नौकरी आसान नहीं थी। हालात कठिन थे लेकिन एक मां के लिए उसके बच्चों की जिम्मेदारी अहम होती है।
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डॉ. शोभा ने बताया कि बड़ा बेटा राहुल कनाडा में एक मल्टीनेशनल कंपनी में अफसर है, दूसरा बेटा पायलट है और वियतनाम में है। सबसे छोटी बेटी एक लीगल फर्म में सीनियर एसोसिएट है। कहा, लंबे संघर्ष के बाद आज जब बच्चों ने अपना मुकाम हासिल कर लिया है तो मेरे लिए यही सबसे बड़ी दौलत है।
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