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Lucknow News: स्त्रियां हमेशा से युद्ध और हिंसा के खिलाफ
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सुमन केशरी।
लखनऊ। स्त्रियां सदा से ही युद्ध और हिंसा के खिलाफ रही हैं। जिस महाभारत युद्ध का जिम्मेदार व सूत्रधार कौरवों पर द्रौपदी के व्यंग्य को माना जाता है, ऐसा कोई व्यंग्य द्रौपदी ने कभी किया ही नहीं था। दुनिया के तमाम युद्धों की वजह राज-पाठ, जमीन की भूख और लालच रही है। इसकी वजह स्त्री कतई नहीं हैं। ये बातें वरिष्ठ हिंदी लेखिका व कवयित्री सुमन केशरी ने शनिवार को संगीत नाटक अकादमी में चल रहे कोशल साहित्य उत्सव में कहीं।
महाभारत के स्त्री किरदारों पर बहुत कम लिखा-कहा गया है। ऐसे लेखकों में एक सशक्त हस्ताक्षर सुमन केशरी शनिवार को लखनऊ में थीं। दूरदर्शन लखनऊ के कार्यक्रम प्रमुख आत्म प्रकाश मिश्र से उन्होंने अपने कविता संग्रह ‘निमित्त नहीं’ पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रश्न उठाती स्त्री किसी को अच्छी नहीं लगती। उन्होंने कहा कि मिथक समय के साथ विकसित व जीवित रहता है।
पुस्तक के बारे में उन्होंने बताया कि यह महाभारत काल की उन भूली-बिसरी स्त्रियों पर लिखी कविताओं का संग्रह है जिनकी कम ही चर्चा हुई है। संग्रह में गंगा, पांडवों की मां कुंती पर छह कविताएं, द्रौपदी, गांधारी, सुभद्रा, चित्रागंदा, उलूवी, सत्यवती, भानुमती, अंबा, अंबिका, अंबाला, विदुर की मां के अलावा कौरवों की बहन दुशाला के अलावा अन्य स्त्री किरदारों पर कविताएं हैं। सत्र के दौरान मार्मिक ढंग से उन्होंने 105 भाइयों की बहन दुशाला की कविता पढ़कर सुनाई तो लोग भावुक हो गए।
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देशों के संघर्ष और विभाजन पर बातचीत
एसएनए में चल रहे कोशल साहित्य उत्सव के दूसरे दिन शुरुआत नेविगेटिंग द फ्यूचर कार्यक्रम के साथ हुई, जहां सौरव झा व संजीव सांयल ने जयंत कृष्ण के साथ बातचीत में यूक्रेन और मध्य पूर्व देशों के संघर्षों पर बात की। इसके बाद इकोज फ्रॉम द अनपार्टिशन्ड टाइम्स में मालविका राजकोटिया और आंचल मल्होत्रा ने एरिक चोपड़ा के साथ विभाजन की स्थायी विरासत पर बात की।
धर्म महज आस्था नहीं, आचरण में भी हो
साहित्य उत्सव के अगले सत्र में देश के वरिष्ठ साहित्यकार पुरुषोत्तम अग्रवाल ने महाभारत पर तीन खंडों में आने वाली अपनी किताब पर अनुभव त्यागी के साथ बातचीत की। उन्होंने बताया कि महाभारत काल में धर्म की असल अवधारणा क्या है, उनकी पुस्तक में इस पर विस्तार से चर्चा है। कहा कि धर्म के विविध रूप हैं। यह महज कोई आस्था पद्धति नहीं है बल्कि धर्म आचरण के ज्यादा करीब शब्द है।
सत्य को जानने के लिए मिला जीवन
अगले सत्र में संत अपरिमेय श्याम दास ने राज स्मृति से बातचीत में कहा कि प्रामाणिक परंपरा से आया गीता का ज्ञान ही सच्चा ज्ञान है। गीता पर सभी टीकाएं प्रामाणिक नहीं हैं। वास्तविक सत्य भागवत, वेदों व पुराणों से मिलती है। शिक्षा दो तरह की है, भौतिक और आध्यात्मिक। मानव जीवन सत्य को जानने के लिए मिला है। उन्होंने कहा, जिस गीता के ज्ञान की वजह से गांधी व कलाम को सम्मान मिला, हम उसे अपनाते और पढ़ते तक नहीं हैं।
हर्षिता, शेनाज और गुरलीन के भी सत्र
इसके बाद हर्षिता गुप्ता के सत्र अनलव्ड : द आर्ट ऑफ मूविंग ऑन को युवाओं ने काफी पसंद किया। इसके बाद लेखक शेनाज ट्रेजरीवाला ने अपनी पुस्तक ‘ऑल ही लेफ्ट वाज अ रेसिपी’ के विमोचन पर अपने रोमांटिक अनुभवों को साझा किया। गौरव प्रकाश ने उनसे बात की। इसके बाद प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गुरलीन कौर ने एक कार्यशाला व बातचीत का आयोजन किया। उन्होंने कथक के दैनिक जीवन में महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे कथक, नृत्य कहानी कहने की परंपरा से विकसित हुआ है।
चार कोस पे बदले वाणी...
सौरभ किरपाल और मालविका राजकोटिया ने द इक्वालिटी कोड पर चर्चा की। इसके बाद चार कोस पे बदले वाणी... में साहित्यकार चंद्रशेखर वर्मा ने वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला, सुमन केशरी और आत्म प्रकाश मिश्रा के साथ चर्चा की जिसमें भोजपुरी, मैथिली, ब्रजभाषा और अवधी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं की साहित्यिक समृद्धि पर बातचीत हुई। अगले सत्र- दिस लैंड वी कॉल होम में, नुसरत जाफरी और आंचल मल्होत्रा ने भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने पर चर्चा की।
पं. विश्वमोहन ने छेड़े वीणा के तार...
कोशल महोत्सव की सर्द शाम ग्रेमी अवाॅर्ड विजेता पं. विश्वमोहन भट्ट और सलिल मोहन भट्ट की जुगलबंदी से गर्मजोशी से भर उठी। मोहन वीणा की संगीतमय प्रस्तुतियों से दोनों की जुगलबंदी व उनके द्वारा पेश किए गए फ्यूजन म्यूजिक पर लोग झूम उठे। पं. विश्वमोहन ने जैसे ही आज जाने की जिद न करो... पर वीणा की तान छेड़ी तो परिसर में मौजूद श्रोता इसे डूबकर सुनते रहे।
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महाभारत के स्त्री किरदारों पर बहुत कम लिखा-कहा गया है। ऐसे लेखकों में एक सशक्त हस्ताक्षर सुमन केशरी शनिवार को लखनऊ में थीं। दूरदर्शन लखनऊ के कार्यक्रम प्रमुख आत्म प्रकाश मिश्र से उन्होंने अपने कविता संग्रह ‘निमित्त नहीं’ पर बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रश्न उठाती स्त्री किसी को अच्छी नहीं लगती। उन्होंने कहा कि मिथक समय के साथ विकसित व जीवित रहता है।
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पुस्तक के बारे में उन्होंने बताया कि यह महाभारत काल की उन भूली-बिसरी स्त्रियों पर लिखी कविताओं का संग्रह है जिनकी कम ही चर्चा हुई है। संग्रह में गंगा, पांडवों की मां कुंती पर छह कविताएं, द्रौपदी, गांधारी, सुभद्रा, चित्रागंदा, उलूवी, सत्यवती, भानुमती, अंबा, अंबिका, अंबाला, विदुर की मां के अलावा कौरवों की बहन दुशाला के अलावा अन्य स्त्री किरदारों पर कविताएं हैं। सत्र के दौरान मार्मिक ढंग से उन्होंने 105 भाइयों की बहन दुशाला की कविता पढ़कर सुनाई तो लोग भावुक हो गए।
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देशों के संघर्ष और विभाजन पर बातचीत
एसएनए में चल रहे कोशल साहित्य उत्सव के दूसरे दिन शुरुआत नेविगेटिंग द फ्यूचर कार्यक्रम के साथ हुई, जहां सौरव झा व संजीव सांयल ने जयंत कृष्ण के साथ बातचीत में यूक्रेन और मध्य पूर्व देशों के संघर्षों पर बात की। इसके बाद इकोज फ्रॉम द अनपार्टिशन्ड टाइम्स में मालविका राजकोटिया और आंचल मल्होत्रा ने एरिक चोपड़ा के साथ विभाजन की स्थायी विरासत पर बात की।
धर्म महज आस्था नहीं, आचरण में भी हो
साहित्य उत्सव के अगले सत्र में देश के वरिष्ठ साहित्यकार पुरुषोत्तम अग्रवाल ने महाभारत पर तीन खंडों में आने वाली अपनी किताब पर अनुभव त्यागी के साथ बातचीत की। उन्होंने बताया कि महाभारत काल में धर्म की असल अवधारणा क्या है, उनकी पुस्तक में इस पर विस्तार से चर्चा है। कहा कि धर्म के विविध रूप हैं। यह महज कोई आस्था पद्धति नहीं है बल्कि धर्म आचरण के ज्यादा करीब शब्द है।
सत्य को जानने के लिए मिला जीवन
अगले सत्र में संत अपरिमेय श्याम दास ने राज स्मृति से बातचीत में कहा कि प्रामाणिक परंपरा से आया गीता का ज्ञान ही सच्चा ज्ञान है। गीता पर सभी टीकाएं प्रामाणिक नहीं हैं। वास्तविक सत्य भागवत, वेदों व पुराणों से मिलती है। शिक्षा दो तरह की है, भौतिक और आध्यात्मिक। मानव जीवन सत्य को जानने के लिए मिला है। उन्होंने कहा, जिस गीता के ज्ञान की वजह से गांधी व कलाम को सम्मान मिला, हम उसे अपनाते और पढ़ते तक नहीं हैं।
हर्षिता, शेनाज और गुरलीन के भी सत्र
इसके बाद हर्षिता गुप्ता के सत्र अनलव्ड : द आर्ट ऑफ मूविंग ऑन को युवाओं ने काफी पसंद किया। इसके बाद लेखक शेनाज ट्रेजरीवाला ने अपनी पुस्तक ‘ऑल ही लेफ्ट वाज अ रेसिपी’ के विमोचन पर अपने रोमांटिक अनुभवों को साझा किया। गौरव प्रकाश ने उनसे बात की। इसके बाद प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना गुरलीन कौर ने एक कार्यशाला व बातचीत का आयोजन किया। उन्होंने कथक के दैनिक जीवन में महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे कथक, नृत्य कहानी कहने की परंपरा से विकसित हुआ है।
चार कोस पे बदले वाणी...
सौरभ किरपाल और मालविका राजकोटिया ने द इक्वालिटी कोड पर चर्चा की। इसके बाद चार कोस पे बदले वाणी... में साहित्यकार चंद्रशेखर वर्मा ने वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ला, सुमन केशरी और आत्म प्रकाश मिश्रा के साथ चर्चा की जिसमें भोजपुरी, मैथिली, ब्रजभाषा और अवधी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं की साहित्यिक समृद्धि पर बातचीत हुई। अगले सत्र- दिस लैंड वी कॉल होम में, नुसरत जाफरी और आंचल मल्होत्रा ने भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने पर चर्चा की।
पं. विश्वमोहन ने छेड़े वीणा के तार...
कोशल महोत्सव की सर्द शाम ग्रेमी अवाॅर्ड विजेता पं. विश्वमोहन भट्ट और सलिल मोहन भट्ट की जुगलबंदी से गर्मजोशी से भर उठी। मोहन वीणा की संगीतमय प्रस्तुतियों से दोनों की जुगलबंदी व उनके द्वारा पेश किए गए फ्यूजन म्यूजिक पर लोग झूम उठे। पं. विश्वमोहन ने जैसे ही आज जाने की जिद न करो... पर वीणा की तान छेड़ी तो परिसर में मौजूद श्रोता इसे डूबकर सुनते रहे।