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सरकारी जमीन हड़पने को मृत से करा दी गवाही

Thu, 08 Oct 2020 01:03 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2020 01:03 AM IST
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Witnessed the government land grab from the dead
सरकारी जमीन हड़पने को मृत से करा दी गवाही
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सरकार ने मलिहाबाद में दलित को 12 बिसवा जमीन पट्टा में दी थी। आरोप है कि हरदोई हाइवे पर मौजूद इस जमीन को कब्जा करने के लिए पूर्व प्रधान व मुतवल्ली, दो कॉलेज के प्रबंधकों और दो अन्य ने जाली दस्तावेज तैयार किए।
इसके बाद मृत पट्टाधारक की जगह दूसरे को पेश कर पट्टा निरस्त कराया और जमीन को वक्फ बोर्ड का कब्रिस्तान घोषित कर उस पर कब्जा कर लिया।
विरोध पर पट्टाधारक के परिवारीजन पर जान लेवा हमला किया। पीड़ित ने थाने में तहरीर दी, पर कुछ नहीं हुआ। विशेष न्यायाधीश एससीएसटी कोर्ट में अर्जी पर केस दर्ज करने का आदेश जारी हुआ।
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इस पर पुलिस ने पांच के खिलाफ जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, मारपीट, धमकी और एससीएसटी के तहत केस दर्ज किया।
मलिहाबाद के रानीखेड़ा जिंदौर निवासी संत लाल के मुताबिक सरकार ने उनके पिता को हरदोई रोड पर 12 बिसवा जमीन पट्टे पर दी थी।
आरोप लगाया कि कैसरजहां डिग्री कॉलेज के प्रबंधक उमैर आसिफ, कुंवर आसिफ अली डिग्री कॉलेज की प्रबंधक शबाना उर्फी, पूर्व प्रधान व मुतवल्ली हारून आसिफ इस पर कब्जा करना चाहते थे।
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25 मार्च 1990 को पिता की मौत के बाद उमैर आसिफ के पिता कुंवर आसिफ अली उर्फ संजू मियां ने 1991 में अपर जिलाधिकारी प्रशासन न्यायालय में वाद दायर किया, जिसमें पट्टा खारिज करवाने की बात थी।
छह अप्रैल 1993 में कोर्ट ने कुंवर आसिफ अली के पक्ष में आदेश कर दिया। इसके बाद इस जमीन को वक्फ बोर्ड के जरिये उबड़-खाबड़ बताकर कब्रिस्तान घोषित करवा लिया, जबकि यहां कभी किसी का शव दफन नहीं किया गया।
तैयार किए फर्जी दस्तावेज
संतलाल का आरोप है कि उक्त ने जमीन हासिल करने को फर्जी दस्तावेज तैयार किया। इनके जरिये उसके मृत पिता को भी जिंदा दिखा। उनके अंगूठे व हस्ताक्षर तक करा दिए। वह भी उनके मरने के तीन साल बाद, जबकि पट्टे की जमीन का वारिस भी 25 मई 1990 में संतलाल के नाम हुई। इसकी संरक्षिका उसकी मां गंगा देवी को बनाया गया।

जान से मारने की धमकी दी
पीड़ित का आरोप है कि 1993 से वह कोर्ट के चक्कर लगा रहा था। कई बार उसे धमकी दी गई। 25 जनवरी को जमीन पर निर्माण कार्य शुरू करने की सूचना पर वह पहुंचा तो उमैर आसिफ, हारून आसिफ, शबाना उर्फी और दो अन्य लोगों ने उसकी पिटाई की। आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद संतलाल थाने गया, पर कुछ न हुआ। उसने मुकदमा दर्ज कराने को पुलिस कमिश्नर कार्यालय को डाक से पत्र भेजा, लेकिन क्षेत्र कमिश्नरेट से बाहर होने से मदद नहीं मिली। इसके बाद विशेष न्यायाधीश एससीएसटी के कोर्ट में अर्जी लगाई। अदालत के आदेश पर पुलिस ने बुधवार देर रात केस दर्ज किया। प्रभारी निरीक्षक चिरंजीव मोहन के मुताबिक जांच की जा रही है।
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