फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Withdrawal of nomination in UP becomes a question of Prestige

Fact File : यूपी में नामांकन वापस लेना बन गया है मूंछ का सवाल, साल-दर-साल घटती गई संख्या

Thu, 16 May 2024 05:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक गुप्ता, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 16 May 2024 05:36 AM IST
सार

वर्ष 2009 में यूपी के 130 प्रत्याशियों ने नामांकन वापस लिए। वर्ष 2014 में ये संख्या घटकर 122 रह गई। वर्ष 2019 में तो ये संख्या महज 35 ही बची। वर्तमान लोकसभा चुनाव में अभी तक लगभग 20 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए हैं।

विज्ञापन
Withdrawal of nomination in UP becomes a question of Prestige
चंदौली से विनोद कुमार यादव घोड़ी पर बैठकर नामांकन करने पहुंचे। file pic - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नामांकन कराकर वापस लेना यूपी वालों के लिए मूंछ का सवाल बन गया। यही वजह है कि साल-दर-साल ये संख्या घटती गई। वर्ष 2009 में यूपी के 130 प्रत्याशियों ने नामांकन वापस लिए। वर्ष 2014 में ये संख्या घटकर 122 रह गई। वर्ष 2019 में तो ये संख्या महज 35 ही बची। वर्तमान लोकसभा चुनाव में अभी तक लगभग 20 प्रत्याशियों ने नाम वापस लिए हैं। वहीं ठीक से नामांकन फाॅर्म न भरने के मामले में यूपी अन्य राज्यों से बहुत आगे है। पिछले चुनाव में यूपी से 766 दावेदारों के नामांकन खारिज हो गए थे, जो देश में सर्वाधिक रहे।

विज्ञापन


नामांकन कराने के साथ चुनाव लड़ना अब हर किसी के बस की बात नहीं है। पहले चुनाव में नामांकन फाॅर्म भरने वालों की संख्या अच्छी खासी रहती थी। नामांकन कराने की रणनीति विपक्षी पर दबाव बनाने के अतिरिक्त बागी प्रत्याशियों के लिए थी। डमी नाम वाले प्रत्याशी भी खूब नामांकन करते थे। लेकिन चुनाव-दर-चुनाव नामांकन कराने के बाद वापस लेकर बैठ जाने वाले नेताओं की संख्या अब यूपी में कम होती जा रही है। पिछले 15 साल में इसमें 85 फीसदी तक की कमी आई है। 
विज्ञापन


चुनाव विशेषज्ञ इसकी कई वजह गिनाते हैं। एक तो नामांकन राशि 25 हजार रुपये हो गई है जो जब्त हो जाती है। डमी कैंडीडेट का असर मतदान में बहुत कम दिखता है। निर्दलीय प्रत्याशियों को लेकर जनता का रुझान बहुत कम हो गया है। साथ ही चुनाव में खड़े होकर किसी के पक्ष में बैठ जाने या चुपचाप नामांकन वापस लेने से अच्छा संदेश नहीं जाता है। आगे के चुनाव में ये छवि पीछा नहीं छोड़ती। इसे सम्मान से जोड़कर देखा जाने लगा है। यही वजह है कि फार्म भरने के बाद बैठने वाले नेता घटते जा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गवाही देते आंकड़े
पिछले लोकसभा चुनाव में 35 प्रत्याशियों ने नामांकन वापस लिया था। इनमें 29 पुरुष और 6 महिलाएं थीं। वहीं वर्ष 2014 के चुनाव में 122 नामांकन वापस लिए गए थे। इनमें से 21 महिलाएं और 101 पुरुष थे। 6वर्ष 2009 के चुनाव में 130 नामांकन पत्र वापस लिए गए। इनमें से 109 पुरुष और 21 महिलाएं थीं।


अधूरा नामांकन पत्र भरने में आगे : नामांकन पत्र अधूरा और गलत भरने के मामले में यूपी के नेता बहुत आगे हैं। पिछले चुनाव में जहां इस वजह से 766 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र खारिज हो गए थे। वहीं 2014 में ये संख्या 466 थी। वर्ष 2009 में ये संख्या 401 थी। वर्तमान लोकसभा चुनाव में अभी तक 537 नामांकन पत्र खारिज हो चुके हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed