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Lucknow News: शैक्षणिक, शोध कार्य व संस्कृति, विरासत पर मिलकर करेंगे काम
Thu, 12 Jun 2025 01:50 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 12 Jun 2025 01:50 AM IST
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समझौता पत्र दिखाने अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के निदेशक राकेश कुमार और जगद्गुरू रामभद्राचा
लखनऊ। गोमतीनगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान और जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय चित्रकूट के बीच मंगलवार को शैक्षणिक और शोध कार्य को लेकर एमओयू साइन हुआ। इसके जरिये विद्यार्थियों को एक दूसरे के संस्थानों में कक्षाएं और साथ मिलकर शोध कार्य करने की छूट मिलेगी। साथ ही एक दूसरे की विरासत व संस्कृति को समझने का मौका मिलेगा।
बौद्ध शोध संस्थान के निदेशक राकेश सिंह ने बताया कि स्नातक और परास्नातक के विद्यार्थियों को यह सहूलियत होगी कि वे किसी संस्थान में विषय संबंधित कक्षाएं ले सकेंगे। साथ ही संस्थान को बौद्ध शिक्षा संस्कृति एवं शैक्षणिक गतिविधियों के आदान-प्रदान बढ़ाने में सहायता होगी।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने बताया कि दोनों संस्थाएं संस्कृति के उन पहलुओं पर काम करेंगे जिनकी जरूरत हमारी विरासत को है। इससे पहले परिसर में विरासत से विकास समत्व योग विषय पर परिचर्चा हुई। डॉ. अवधेश कुमार चौबे ने बताया कि विरासत से विकास और समत्व योग दो विषय होते हुए भी एक दूसरे के पूरक हैं। विरासत से अभिप्राय संस्कृति से है। संस्कृति को छोड़कर जिस विकास की ओर हम बढ़ रहे हैं, उसमें अनेक विषमताएं है। इससे समाज को बाहर निकालने की जरूरत है।
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बौद्ध शोध संस्थान के निदेशक राकेश सिंह ने बताया कि स्नातक और परास्नातक के विद्यार्थियों को यह सहूलियत होगी कि वे किसी संस्थान में विषय संबंधित कक्षाएं ले सकेंगे। साथ ही संस्थान को बौद्ध शिक्षा संस्कृति एवं शैक्षणिक गतिविधियों के आदान-प्रदान बढ़ाने में सहायता होगी।
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने बताया कि दोनों संस्थाएं संस्कृति के उन पहलुओं पर काम करेंगे जिनकी जरूरत हमारी विरासत को है। इससे पहले परिसर में विरासत से विकास समत्व योग विषय पर परिचर्चा हुई। डॉ. अवधेश कुमार चौबे ने बताया कि विरासत से विकास और समत्व योग दो विषय होते हुए भी एक दूसरे के पूरक हैं। विरासत से अभिप्राय संस्कृति से है। संस्कृति को छोड़कर जिस विकास की ओर हम बढ़ रहे हैं, उसमें अनेक विषमताएं है। इससे समाज को बाहर निकालने की जरूरत है।
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