यूं ही नहीं राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा को घेर रही शिवसेना, इसके पीछे है कुछ खास मकसद
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शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अयोध्या पहुंचकर भाजपा व पीएम नरेंद्र मोदी को यूं ही नहीं ललकारा है। इसके सियासी सबब हैं। दरअसल, उद्धव ठाकरे राम मंदिर के बहाने उत्तर भारत में शिवसेना की जड़े जमाना चाहते हैं।
इससे शिवसेना को उसे महाराष्ट्र में उत्तर भारत विरोधी होने के आरोपों से भी राहत मिलेगी। राम मंदिर का चैपिंयन बनकर वह यूपी, बिहार समेत हिंदी भाषी राज्यों में अपना जनाधार बढ़ाएगी। इसी को संगठन में तब्दील करेगी। शिवसेना हिंदुत्व को लेकर भाजपा से बड़ी लाइन खींचना चाहती है। राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा की घेराबंदी उसके लिए सबसे मुफीद मौका है।
शिवसेना दावा करती रही है कि वर्ष 1992 में उसी ने विवादित ढांचा ढहाया था। महाराष्ट्र में हिंदुत्व के मुद्दों पर शिवसेना मुखर रहती है। हालांकि महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना भागीदार है लेकिन भाजपा से उसकी तल्खी किसी से छिपी नहीं है। वह रामजन्म भूमि मुद्दे को आक्रामक ढंग से उठाकर भाजपा को बैकफुट पर पहुंचा देना चाहती है। इसी रणनीति के तहत उद्धव ठाकरे पहली बार अयोध्या आए। हजारों शिवसैनिक भी अयोध्या पहुंचे।
भाजपा की केंद्र सरकार को बताया कुंभकर्ण
उद्धव ने भाजपा की केंद्र सरकार को एक तरह का कुंभकर्ण बताया। राम मंदिर पर चार साल से नींद में रहने का आरोप लगाया। उन्होंने राम जन्मभूमि को लेकर अध्यादेश लाने पर शिवसेना के समर्थन की बात करके भाजपा को राम मंदिर निर्माण के कानूनी विकल्पों पर विचार के लिए मजबूर करने की कोशिश की है।
उन्होंने सरकार से राम मंदिर निर्माण की तारीख बताने के लिए भी कहा है। उन्होंने 56 इंच के सीने के बजाय दिल में मंदिर के लिए मजबूती की बात करके पीएम मोदी की घेराबंदी की है।