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सफेद तिल, सरसों व पपीता घटाता है मोटापा : डॉ. राजशेखरन
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कार्यक्रम में बोलते डॉ. राजेशेखरन।
लखनऊ। शरीर में सफेद वसा का जरूरत से ज्यादा जमा होना ही मोटापा है। एक ब्राउन वसा (ब्राउन एडीपोज टिशू) भी है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और मोटापा कम करता है। शरीर में मोटापा दर्शाता है कि भोजन के बाद शरीर में ऊर्जा का खर्च और ऊर्जा का भंडारण किस तरह हो रहा है।
ये बातें वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीमैप लखनऊ और सीएफटीआरआई मैसूर के पूर्व निदेशक डॉ. राम राजशेखरन ने बुधवार को राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में आयोजित दो दिवसीय विज्ञान महोत्सव के पहले दिन बतौर मुख्य अतिथि कहीं। उन्होंने कहा कि भोजन में सफेद तिल, आम, चने की दाल, सरसों, पपीते जैसी चीजें शामिल कर आहार प्रेरित थर्मोजेनेसिस प्रक्रिया के जरिये हम श्वेत वसा ऊतक को ब्राउन वसा ऊतक में बदलकर मोटापा कम कर सकते हैं।
एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने कहा कि यह उत्सव संस्थान की संस्कृति एवं जीवंतता दिखाने का मौका है। इसका मकसद शोधार्थियों की छिपी हुई प्रतिभा को उजागर करना व प्रोत्साहित करना है। पादप महोत्सव की संयोजक व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विधु साने ने बताया कि यहां विभिन्न वर्गों में प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें मौखिक व्याख्यान, पोस्टर,फोटोग्राफी, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, ट्रेजर हंट, विज्ञान कला आदि शामिल हैं | महोत्सव में संस्थान के करीब 200 शोधार्थी हिस्सा ले रहे है।
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ये बातें वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीमैप लखनऊ और सीएफटीआरआई मैसूर के पूर्व निदेशक डॉ. राम राजशेखरन ने बुधवार को राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में आयोजित दो दिवसीय विज्ञान महोत्सव के पहले दिन बतौर मुख्य अतिथि कहीं। उन्होंने कहा कि भोजन में सफेद तिल, आम, चने की दाल, सरसों, पपीते जैसी चीजें शामिल कर आहार प्रेरित थर्मोजेनेसिस प्रक्रिया के जरिये हम श्वेत वसा ऊतक को ब्राउन वसा ऊतक में बदलकर मोटापा कम कर सकते हैं।
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एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने कहा कि यह उत्सव संस्थान की संस्कृति एवं जीवंतता दिखाने का मौका है। इसका मकसद शोधार्थियों की छिपी हुई प्रतिभा को उजागर करना व प्रोत्साहित करना है। पादप महोत्सव की संयोजक व मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विधु साने ने बताया कि यहां विभिन्न वर्गों में प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें मौखिक व्याख्यान, पोस्टर,फोटोग्राफी, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, ट्रेजर हंट, विज्ञान कला आदि शामिल हैं | महोत्सव में संस्थान के करीब 200 शोधार्थी हिस्सा ले रहे है।
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