{"_id":"690a67e9fd40f75eb7078a12","slug":"when-loved-ones-encouraged-dreams-took-wings-lucknow-news-c-13-1-lko1028-1457295-2025-11-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: अपनों ने हाैसला दिया तो सपनों को लगे पंख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: अपनों ने हाैसला दिया तो सपनों को लगे पंख
विज्ञापन
गोमतीनगर के विकासखंड स्थित आईसीएआई भवन में सीए में पास छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान। -अमर उजा
लखनऊ। राजधानी में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) परीक्षा में सफल हुए 40 मेधावियों को मंगलवार को आईसीएआई लखनऊ चैप्टर की ओर से गोमतीनगर में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान सितंबर सत्र की सीए फाइनल की परीक्षा में कामयाब मेधावियों को परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में मंच से अवॉर्ड दिया गया। खचाखच भरे सभागार में अपनी संघर्ष यात्रा को याद करके कई सफल अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों की आंखें भर आईं। इस दौरान आईसीएआई लखनऊ चैप्टर के चेयरमैन अनुराग पांडेय मौजूद रहे।
इस बार लखनऊ से सितंबर सत्र में सीए फाइनल के लिए कुल 632 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 40 अभ्यर्थी कामयाब रहे। इन 40 में 18 लड़कियों ने फाइनल सीए में जगह बनाई। 22 लड़के कामयाब रहे।
पति के समर्थन से हासिल किया लक्ष्य
दिल्ली में नाैकरी करती थी। शादी हुई तो नाैकरी छूट गई। समय के साथ दो बच्चे भी हो गए। बचपन से सीए के बारे में सुन रखा था कि इसे देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में गिना जाता है। दो बच्चों के बावजूद पारा निवासी पति समीर गुप्ता ने बचपन के इस सपने को पूरा करने में सहयोग किया। राजधानी में खुद की प्रैक्टिस करूंगी।
विज्ञापन
- काजल गुप्ता, पारा
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
मुश्किल था, पर ठान लिया था कि कामयाब होना है
बाराबंकी के हैदरगढ़ से हूं। पढ़ाई भी वहीं से की। लोग कहते थे कि सीए की परीक्षा देश ही नहीं दुनिया की मुश्किल परीक्षाओं में से एक है। ऊपर से छोटी जगह रहकर उतना एक्सपोजर नहीं था। एक दिन ठान लिया कि कर दिखाना है, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं। पिता सुनील कुमार गोयल और मां नीरा ने हर कदम पर हाैसला बढ़ाया। फिलहाल कॉर्पाेरेट में जाना है। - अंशिका अग्रवाल, हैदरगढ़
विज्ञापन
इस बार लखनऊ से सितंबर सत्र में सीए फाइनल के लिए कुल 632 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 40 अभ्यर्थी कामयाब रहे। इन 40 में 18 लड़कियों ने फाइनल सीए में जगह बनाई। 22 लड़के कामयाब रहे।
विज्ञापन
पति के समर्थन से हासिल किया लक्ष्य
दिल्ली में नाैकरी करती थी। शादी हुई तो नाैकरी छूट गई। समय के साथ दो बच्चे भी हो गए। बचपन से सीए के बारे में सुन रखा था कि इसे देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में गिना जाता है। दो बच्चों के बावजूद पारा निवासी पति समीर गुप्ता ने बचपन के इस सपने को पूरा करने में सहयोग किया। राजधानी में खुद की प्रैक्टिस करूंगी।
विज्ञापन
- काजल गुप्ता, पारा
मुश्किल था, पर ठान लिया था कि कामयाब होना है
बाराबंकी के हैदरगढ़ से हूं। पढ़ाई भी वहीं से की। लोग कहते थे कि सीए की परीक्षा देश ही नहीं दुनिया की मुश्किल परीक्षाओं में से एक है। ऊपर से छोटी जगह रहकर उतना एक्सपोजर नहीं था। एक दिन ठान लिया कि कर दिखाना है, चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं। पिता सुनील कुमार गोयल और मां नीरा ने हर कदम पर हाैसला बढ़ाया। फिलहाल कॉर्पाेरेट में जाना है। - अंशिका अग्रवाल, हैदरगढ़