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इतिहास के झरोखे से: लखनऊ शहर में 131 साल पहले शुरू हुई थी पाइप से पानी की आपूर्ति
Thu, 27 Apr 2023 01:45 PM IST
ishwar ashish
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 27 Apr 2023 01:45 PM IST
सार
अंग्रेजों के समय लखनऊ में जलकल महाप्रबंधक का ओहदा बहुत बड़ा होता था। उसका बंगला जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक के बंगले जैसा होता था।
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
लखनऊ शहर में पाइप से पानी की आपूर्ति करीब 131 साल पहले शुरू हुई थी। तब से अब तक तीन जलकल हो गए। दो और बनने हैं, लेकिन 10 साल से ये कागज पर ही हैं। पाइप से पानी आपूर्ति को लेकर शहर का पहला जलकल ऐशबाग में 1892 में बना था, जिसका नाम भी ऐशबाग जलकल है। उस समय इसकी क्षमता महज 40 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) थी।
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शहर और आबादी बढ़ी तो 1992 में दूसरा जलकल बालागंज में बना। उसके बाद गोमती नगर विस्तार में तीसरा जलकल 2007 में बना। इस समय तीनों जलकल से करीब 20 लाख आबादी को पाइप से पानी की आपूर्ति की जाती है। पहले और दूसरे जलकल को पानी गोमती नदी से मिलता है, जबकि तीसरे जलकल को शारदा सहायक नहर से मिलता है।
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लखनऊ जल संस्थान के सेवानिवृत्त महाप्रबंधक राजीव वाजपेयी बताते हैं कि अंग्रेजों के समय जलकल महाप्रबंधक का बहुत बड़ा ओहदा होता था। उस समय यह पद जिले के डीएम और एसपी के बराबर माना जाता था। इसकी गवाही जलकल मुख्यालय में बना महाप्रबंधक का बंगला देता है। जलकल महाप्रबंधक का बंगला उतना ही शानदार होता था जैसे डीएम-एसपी का होता था।
जलकल के पुराने कर्मचारी रवि मिश्रा ने बताया कि शहर जैसे-जैसे बढ़ा नए जलकल भी बढ़े और पहले ऐशबाग जलकल की क्षमता भी बढ़ी। यह 40 एमएलडी से बढ़कर 180 एमएलडी हो चुकी है। जब यह बना था, उस समय शहर की आबादी बहुत कम थी। उस समय पुराने लखनऊ का इलाका ही मुख्य था, वहां पर ही पेयजल की आपूर्ति होती थी।