फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Water level at dangerous level in lucknow

7500 लाख लीटर पानी का रोजाना दोहन, भूगर्भ जल लखनऊ में खतरनाक लेवल पर पहुंचा

Sat, 23 Mar 2019 12:50 AM IST
सौरभ दिक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: सौरभ दिक्षित Updated Sat, 23 Mar 2019 12:50 AM IST
विज्ञापन
Water level at dangerous level in lucknow
water
हम नहीं चेते तो हमें जल संकट का सामना करना होगा। भूगर्भ जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। जबकि राजधानी में रोजाना 7500 लाख लीटर पानी का दोहन हो रहा है। सरकारी विभाग हालात सुधारने के बजाय इसे और बढ़ावा दे रहे हैं।
विज्ञापन


तीस साल में शहर को जलापूर्ति के लिए लगाए गए ट्यूबवेलों की संख्या 10 गुना तक बढ़ गई है। शुक्रवार को जल दिवस पर सिविल सोसाइटी ने इस मुद्दे को उठाया और सोशल मीडिया के साथ-साथ अन्य माध्यमों से पानी बचाने के लिए अभियान शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


वाटर वाइस लखनऊ के नाम से शुरू हुए अभियान के संयोजक फर्रुख अहमद का कहना है कि भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों के मुताबिक करीब 7500 लाख लीटर पानी रोजाना जमीन के अंदर से निकाला जा रहा है। अंधाधुंध दोहन की वजह से लखनऊ के टॉप एक्वेफ र में भूजल निचले स्तर पर पहुंच गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


विशेषज्ञ बताते हैं कि शहर के प्रमुख इलाकों में इसकी वजह से जमीन धंसने की आशंका पैदा हो गई है। भूगर्भ जल विभाग को जल संस्थान लखनऊ से मिले आंकड़ों के मुताबिक 1985 में लखनऊ की मांग पूरी करने के लिए केवल 70 ट्यूबवेल लगाए गए थे।

इनकी संख्या अब बढ़कर 672 हो गई है। इसके बाद भी जल संस्थान खुद भी पानी संकट झेल रहा है। इसकी वजह से 16 घंटे तक होने वाली पानी की आपूर्ति कई इलाकों में नवंबर 2018 में पांच घंटे तक रिकॉर्ड की गई।

बढ़ती मांग, घटता जल स्तर
सिविल सोसाइटी का सवाल यह है कि 30 लाख की आबादी केलिए अभी 12500 लाख लीटर पानी की रोजाना जरूरत है। 2025 तक यह मांग 25000 लाख लीटर रोजाना होगी। 2018 में गोमती नदी का जलस्तर न्यूनतम 346.7 फुट रिकॉर्ड हुआ। ऐसे में यह तय है कि भूगर्भ जल का दोहन आने वाले दिनों में बढ़ जाएगा। यह खतरनाक संकेत है।

लगानी होगी रोक
प्रदेश सरकार के लिए भूगर्भ जल प्रबंधन के बिल का ड्राफ्ट तैयार करने में प्रमुख सलाहकार और बीबीएयू के प्रो. वैंकटेश दत्ता का कहना है कि भूगर्भ जल निकालने पर प्रतिबंध लगाने होंगे। इसके लिए हमने ड्राफ्ट में पंप या ट्यूबवेल लगाने के लिए प्रदेश सरकार को लाइसेंस जारी करने, भूगर्भ जल सरचार्ज लगाने जैसे सुझाव दिए हैं।

मदरसों और शिक्षण संस्थानों में चलेगा जागरुकता अभियान
मदरसों के साथ शिक्षण संस्थानों में पानी बचाने के लिए जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए विश्व जल संरक्षण दिवस पर शुक्रवार को ऐशबाग ईदगाह में हदीस का हवाला देकर पानी बचाने के लिए पोस्टर को जारी किया गया। इस दौरान आयोजित कार्यक्रम में ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने पानी की हिफाजत करना मजहबी जिम्मेदारी बताया।


2025 तक जल संकट से जूझ रही होगी जनता
विश्व जल दिवस पर द इंस्टीट्यूशन ऑफ  इंजीनियर्स में आयोजित गोष्ठी में निदेशक भूगर्भ जल विभाग प्रतीक रंजन चौरसिया ने कहा कि 2025 तक लोग जल संकट से जूझ रहे होंगे। पीने के पानी के लिए लोगों को भटकना पड़ेगा। अभी भी पूरी दुनिया में करीब 15 प्रतिशत से अधिक लोगों को साफ पानी पीने के लिए नहीं मिल पा रहा है। प्रदूषित पानी पीने से हर साल लोगों की मौतें सामने आती हैं। जिस देश में कभी नदियों का बड़ा नेटवर्क रहा हो। उस देश में जल संक ट बड़ी समस्या है। इसके नियंत्रण के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। वहीं मुख्य वक्ता प्रो. जमाल नुसरत ने कहा कि पानी का संकट नहीं है। समस्या जल प्रबंधन की है। भूगर्भ जल के दोहन को रोकना होगा। ऐसा नहीं कर पाए तो दो सतह का पानी खत्म होते ही नदियां, तालाब और मौजूदा कुएं सूख जाएंगे। इसके बाद की भयावह स्थिति की कल्पना हम खुद कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed