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भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने का सपना देख रहे हैं सीमा पर बसे मदरसों के छात्र व उलमा: वसीम रिजवी

Sat, 31 Mar 2018 10:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 31 Mar 2018 10:56 PM IST
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waseem rizvi wants investigation in madarsas and devband.
वसीम रिजवी - फोटो : amar ujala

शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी का कहना है कि देवबंद और सीमा पर चल रहे मदरसे कट्टरपंथ के गढ़ हैं। सीमा पर स्थित अधिकतर मदरसों में विदेशी कट्टरपंथी शिक्षक पढ़ा रहे हैं और कुछ विदेशी इनमें छात्र बनकर रह रहे हैं।

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उनका आरोप है कि ये विदेशी उलमा व छात्र भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने का ख्वाब देख रहे हैं। रिजवी ने केंद्र व यूपी सरकार को एक रिपोर्ट भेजकर दारुल उलूम देवबंद और सीमा के मदरसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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रिजवी ने शनिवार को यहां बताया कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक बांग्लादेशी नागरिक फर्जी पहचान पत्रों के माध्यम से भारतीय पासपोर्ट बनवाकर दारुल उलूम देवबंद में रह रहे हैं और इस्लामिक मूवमेंट चला रहे हैं। बंगाल व बिहार में हो रहे सांप्रदायिक दंगों के पीछे ऐसे ही मदरसों में रहने वाले कट्टरपंथी छात्रों व शिक्षकों का हाथ है।
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दारुल उलूम और पश्चिम बंगाल से कश्मीर तक बर्मा व नेपाल और पाकिस्तान सीमा से सटे ज्यादातर मदरसों में हिंदू और शिया समाज के खिलाफ कट्टरपंथी मानसिकता तैयार की जा रही है। इसकी वजह से फसादात हो रहे हैं। रिजवी ने देश के कुछ मौलानाओं पर आतंकवाद को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये भारत माता की जय कहने को तैयार नहीं हैं क्योंकि ये भारत के हैं ही नहीं।

उलमा की टीम बनाकर की जाए जांच
रिजवी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि देश के उलमा की एक टीम बनाई जाए। यह टीम आतंकवाद प्रभावित इलाकों में जाकर इन संदिग्ध मदरसों की जांच करे।

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