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एक से दो लाख मतों के अंतर से जीत-हार वाली 27 सीटों पर प्रतिष्ठा की जंग
Fri, 26 Apr 2019 11:26 AM IST
Amulya Rastogi
राजेन्द्र सिंह, अमर उजाला लखनऊ
राजेन्द्र सिंह, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 26 Apr 2019 11:26 AM IST
सार
- 2014 के लोकसभा में औसतन 1.86 लाख वोटों से हुई थी प्रत्याशियों की जीत
- प्रदेश की दस सीटों पर तीन से चार लाख के बीच रहा था जीत का मार्जिन
- चार सीटों पर चार से पांच लाख, एक पर पांच लाख से ऊपर हुई थी जीत
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मतदान
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 27 सीटों पर हार-जीत का अंतर एक से दो लाख मतों का था। ये सीटें इस बार प्रतिष्ठा की लड़ाई में फंसी हुई हैं। इनमें से पांच पर मतदान हो चुका है। फर्रुखाबाद, इटावा और झांसी में 29 अप्रैल को वोट पड़ेंगे। बाकी 19 सीटों पर अगले चरणों में मतदान होगा।
2014 में भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल ने 80 में से 73 सीटें जीती थीं। भाजपा उम्मीदवारों की जीत का अंतर भी काफी ज्यादा रहा। सभी प्रत्याशियों की औसतन जीत 1 लाख 86 हजार 801 मतों से हुई। सबसे ज्यादा 27 सीटों पर एक से दो लाख वोटों के बीच हार-जीत हुई थी।
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2014 में भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल ने 80 में से 73 सीटें जीती थीं। भाजपा उम्मीदवारों की जीत का अंतर भी काफी ज्यादा रहा। सभी प्रत्याशियों की औसतन जीत 1 लाख 86 हजार 801 मतों से हुई। सबसे ज्यादा 27 सीटों पर एक से दो लाख वोटों के बीच हार-जीत हुई थी।
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इन सीटों में 23 पर भाजपा, एक पर उसके सहयोगी अपना दल, दो पर सपा व एक पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। 10 सीटें ऐसी रहीं जिनमें जीत का अंतर तीन से चार लाख वोटों के बीच रहा। 10 सीटों में से भाजपा ने आठ सीटें तथा कांग्रेस व सपा ने एक-एक सीट हासिल की थी।
20 सीटों पर जीत का अंतर दो से तीन लाख के बीच रहा। इनमें 19 पर भाजपा और एक पर उसका सहयोगी अपना दल विजयी रहा। दो सीटों मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर से जीत का अंतर तो 4 से 5 लाख के बीच रहा।
पांच लाख से ऊपर की जीत वाली एकमात्र सीट गाजियाबाद थी जहां से भाजपा प्रत्याशी सेवानिवृत्त जनरल वीके सिंह जीते थे। 20 सीटें ऐसी थीं जहां जीत-हार का अंतर एक लाख वोटों से कम था।
20 सीटों पर जीत का अंतर दो से तीन लाख के बीच रहा। इनमें 19 पर भाजपा और एक पर उसका सहयोगी अपना दल विजयी रहा। दो सीटों मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर से जीत का अंतर तो 4 से 5 लाख के बीच रहा।
पांच लाख से ऊपर की जीत वाली एकमात्र सीट गाजियाबाद थी जहां से भाजपा प्रत्याशी सेवानिवृत्त जनरल वीके सिंह जीते थे। 20 सीटें ऐसी थीं जहां जीत-हार का अंतर एक लाख वोटों से कम था।
कम अंतर से जीती सीटों पर गठबंधन व भाजपा की नजर
जिन 27 लोकसभा सीटों पर एक से दो लाख वोटों से जीत-हार हुई, उनमें सपा-बसपा गठबंधन के बाद भाजपा की चुनौती बढ़ गई है। इन सीटों पर 17 में बसपा, 7 पर सपा और 3 पर भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी। भाजपा अपनी 24 सीटों को बरकरार रखने केसाथ ही सपा व कांग्रेस से तीन सीटें छीनने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
गठबंधन (सपा) के सामने एक से दो लाख के अंतर से जीत वाली बदायूं व फिरोजाबाद तथा कांग्रेस के सामने अमेठी को बचाए रखने की चुनौती है। सपा-बसपा का गणित 2014 में दोनों दलों के वोट के जोड़ पर आधारित है।
जमीनी स्तर पर भी गठबंधन इन सीटों पर भाजपा को कड़ी टक्कर देता नजर आ रहा है। अमेठी सीट पर सीधा मुकाबला कांग्रेस के राहुल गांधी और भाजपा की स्मृति ईरानी के बीच है। भाजपा और गठबंधन ने अधिकतर सीटों पर सामाजिक समीकरणों को देखकर प्रत्याशी उतारे हैं।
गठबंधन (सपा) के सामने एक से दो लाख के अंतर से जीत वाली बदायूं व फिरोजाबाद तथा कांग्रेस के सामने अमेठी को बचाए रखने की चुनौती है। सपा-बसपा का गणित 2014 में दोनों दलों के वोट के जोड़ पर आधारित है।
जमीनी स्तर पर भी गठबंधन इन सीटों पर भाजपा को कड़ी टक्कर देता नजर आ रहा है। अमेठी सीट पर सीधा मुकाबला कांग्रेस के राहुल गांधी और भाजपा की स्मृति ईरानी के बीच है। भाजपा और गठबंधन ने अधिकतर सीटों पर सामाजिक समीकरणों को देखकर प्रत्याशी उतारे हैं।
इन सीटों पर हो चुके चुनाव
एक से दो लाख के अंतर से जीत-हार वाली अमरोहा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, बदायूं और आंवला में मतदान हो चुका है। फतेहपुर में कांग्रेस भी मुख्य मुकाबले में शामिल है। अन्य सीटों पर भाजपा व गठबंधन के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। फिरोजाबाद में शिवपाल सिंह यादव के चुनाव लड़ने से मुकाबला तिकोना आंका जा रहा है।
इन सीटों पर हुई थी एक से दो लाख के बीच जीत
2014 के लोकसभा चुनाव में अमरोहा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, बदायूं, आंवला, लखीमपुर खीरी, धौरहरा, मोहनलालगंज, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फर्रुखाबाद, इटावा, झांसी, बांदा, फतेहपुर, अंबेडकरनगर, गोंडा, डुमरियागंज, बांसगांव, घोसी, बलिया, जौनपुर, मछली शहर, चंदौली, भदोही व रॉबर्ट्सगंज में हार-जीत का अंतर एक से दो लाख के बीच रहा था।
इन 27 सीटों पर सियासी दल सर्वाधिक ताकत लगा रहे हैं। भाजपा इन्हें अपने लिए मुफीद समझ रही है तो सपा-बसपा गठबंधन वापसी की आस लगाए है।
इन सीटों पर हुई थी एक से दो लाख के बीच जीत
2014 के लोकसभा चुनाव में अमरोहा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, बदायूं, आंवला, लखीमपुर खीरी, धौरहरा, मोहनलालगंज, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फर्रुखाबाद, इटावा, झांसी, बांदा, फतेहपुर, अंबेडकरनगर, गोंडा, डुमरियागंज, बांसगांव, घोसी, बलिया, जौनपुर, मछली शहर, चंदौली, भदोही व रॉबर्ट्सगंज में हार-जीत का अंतर एक से दो लाख के बीच रहा था।
इन 27 सीटों पर सियासी दल सर्वाधिक ताकत लगा रहे हैं। भाजपा इन्हें अपने लिए मुफीद समझ रही है तो सपा-बसपा गठबंधन वापसी की आस लगाए है।