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Lucknow News: सिविल अस्पताल में जांच के लिए डेढ़ से दो हफ्ते का इंतजार

Sun, 05 Oct 2025 02:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Oct 2025 02:24 AM IST
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Waiting for one and a half to two weeks for examination in Civil Hospital
सिविल अस्पताल में पहुंचीं नीलम। उनका परचा।
लखनऊ। ऐसे कई मामले हैं, जो बताते हैं कि सिविल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था मरीजों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मरीजों को हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है। जांच की तारीखें एक से डेढ़ हफ्ते बाद की दी जा रही हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जरूरतमंद मरीजों की जांच प्राथमिकता के आधार पर कराई जाती है। हालांकि, रोजाना करीब तीन हजार से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं, जिनमें से डेढ़ से दो सौ मरीजों को अल्ट्रासाउंड की सलाह दी जाती है। इनमें से सिर्फ गंभीर मरीजों की जांच उसी दिन हो पाती है, जबकि बाकी को एक से दो हफ्ते बाद की तारीख दी जा रही है। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में निजी जांच केंद्रों में जाना पड़ा रहा है। वहीं, निदेशक डॉ. कजली गुप्ता का कहना है कि अल्ट्रासाउंड की वेटिंग खत्म करा दी गई है। मामले को दिखवाया जाएगा कि किस वजह से वेटिंग डेढ़ हफ्ते से अधिक पहुंच गई है।
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केस -1 :
पेट दर्द की शिकायत लेकर नीलम पांडेय (40) शनिवार को सिविल अस्पताल की ओपीडी में पहुंचीं। घंटों लाइन में लगकर डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखी, लेकिन जांच कक्ष में भेजे जाने के बाद उन्हें काउंटर से 14 अक्तूबर की तारीख दे दी गई। इस पर नीलम नाराज हो गईं।
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केस -2 :
राम विलास को पेट में तेज दर्द की शिकायत थी। वह अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर ने अल्ट्रासांउड कराने के लिए कहा। अल्ट्रासाउंड कक्ष में जाने पर उन्हें डेढ़ हफ्ते बाद की तारीख दी गई। यह हाल तब था, जब उनके पेट में असहनीय दर्द उठ रहा था। मजबूरी में उन्हें निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में जाना पड़ा।

मशीनें तीन, रेडियोलॉजिस्ट मात्र दो
अस्पताल में तीन अल्ट्रासाउंड मशीनें और मात्र दो रेडियोलॉजिस्ट हैं। इनमें से एक रेडियोलॉजिस्ट अक्सर कोर्ट या अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त रहते हैं। जांच का अधिकांश काम पुनर्नियुक्त महिला रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे चल रहा है। पूर्व में तैनात एक अन्य रेडियोलॉजिस्ट को शासन ने सीएमओ नियुक्त कर दिया है, जिससे व्यवस्था और प्रभावित हुई है। अधिकारियों का कहना है कि प्रतिदिन 80-100 मरीजों की जांच की जा रही है, जिसमें अस्पताल में भर्ती मरीजों को प्राथमिकता दी जाती है, मगर सीमित संसाधनों के चलते ओपीडी के बाहरी मरीजों को अब भी इंतजार की परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है।

सिविल अस्पताल में पहुंचीं नीलम। उनका परचा।

सिविल अस्पताल में पहुंचीं नीलम। उनका परचा।

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