{"_id":"6920d4347908221ce50afec1","slug":"waiting-for-hours-to-get-birth-certificate-made-they-are-returning-it-citing-defects-lucknow-news-c-13-knp1050-1482206-2025-11-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में घंटों का इंतजार, खामी बताकर कर रहे वापस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में घंटों का इंतजार, खामी बताकर कर रहे वापस
विज्ञापन
जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए खड़े लोग।
लखनऊ। डफरिन अस्पताल में जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में अव्यवस्थाओं की वजह से परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें चार से पांच घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पताल में हर दिन औसतन 25-30 सामान्य और सिजेरियन प्रसव होते हैं। अस्पताल में एक ही विंडो से कार्य होने के कारण एक प्रमाणपत्र बनने में आधे घंटे से अधिक का समय लग रहा है। सुबह 10 से शाम चार बजे तक ही प्रमाणपत्र बनाने का समय है। ऐसे में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए परिजनों को चार से पांच घंटे तक कतार में लगना पड़ रहा है।
केस-1 :
इटौंजा के अटेसुआ गांव के रहने वाले अमित गौतम की पत्नी की अगस्त में डफरिन अस्पताल में डिलीवरी हुई थी। उन्होंने बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया। कई दिनों तक चक्कर लगाए, मगर तकनीकी खामी बताकर उन्हें टरका दिया गया। अमित शुक्रवार को फिर अस्पताल पहुंचे। दोपहर 12 बजे लाइन में लग गए। ढाई घंटे के इंतजार के बाद भी उनका नंबर नहीं आया।
केस-2 :
रकाबगंज निवासी पायल जोशी ने 28 अक्तूबर को बेटे को जन्म दिया था। शुक्रवार को वह बच्चे को लेकर सुबह आठ बजे अस्पताल में आकर लाइन में लग गईं। इसके पहले से भी कई लोग लाइन में लगे हुए थे। पायल के मुताबिक, सुबह 10 बजे कर्मचारी आया। बहुत धीमी गति में काम शुरू हुआ। दोपहर दो बजे जब उनका नंबर आया तो कर्मचारी सीट छोड़कर चला गया।
विज्ञापन
केस- 3 :
जिला बलरामपुर के रहने वाले अरविंद सोनी ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में पत्नी ने डफरिन अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था, तभी से वह जन्म प्रमाण पत्र के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं, मगर हर बार उन्हें तकनीकी खामी का हवाला देकर लौटा दिया जाता। हताश होकर अब उन्होंने एक वकील के माध्यम से आवेदन कराया है।
Iतीन दिन से सर्वर नहीं चल रहा था। शुक्रवार को सर्वर चला, इसलिए प्रमाण पत्र बनाने में दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा अन्य जो दिक्क्तें हैं, उन्हें दूर कराया जाएगा। I
I- डॉ. रेनू पंत, सीएमएस, डफरिन अस्पतालI
विज्ञापन
केस-1 :
इटौंजा के अटेसुआ गांव के रहने वाले अमित गौतम की पत्नी की अगस्त में डफरिन अस्पताल में डिलीवरी हुई थी। उन्होंने बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया। कई दिनों तक चक्कर लगाए, मगर तकनीकी खामी बताकर उन्हें टरका दिया गया। अमित शुक्रवार को फिर अस्पताल पहुंचे। दोपहर 12 बजे लाइन में लग गए। ढाई घंटे के इंतजार के बाद भी उनका नंबर नहीं आया।
विज्ञापन
केस-2 :
रकाबगंज निवासी पायल जोशी ने 28 अक्तूबर को बेटे को जन्म दिया था। शुक्रवार को वह बच्चे को लेकर सुबह आठ बजे अस्पताल में आकर लाइन में लग गईं। इसके पहले से भी कई लोग लाइन में लगे हुए थे। पायल के मुताबिक, सुबह 10 बजे कर्मचारी आया। बहुत धीमी गति में काम शुरू हुआ। दोपहर दो बजे जब उनका नंबर आया तो कर्मचारी सीट छोड़कर चला गया।
विज्ञापन
केस- 3 :
जिला बलरामपुर के रहने वाले अरविंद सोनी ने बताया कि पिछले साल अक्टूबर में पत्नी ने डफरिन अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था, तभी से वह जन्म प्रमाण पत्र के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं, मगर हर बार उन्हें तकनीकी खामी का हवाला देकर लौटा दिया जाता। हताश होकर अब उन्होंने एक वकील के माध्यम से आवेदन कराया है।
Iतीन दिन से सर्वर नहीं चल रहा था। शुक्रवार को सर्वर चला, इसलिए प्रमाण पत्र बनाने में दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा अन्य जो दिक्क्तें हैं, उन्हें दूर कराया जाएगा। I
I- डॉ. रेनू पंत, सीएमएस, डफरिन अस्पतालI

जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए खड़े लोग।