यूपी ने 'लूट' ली बड़बोले दिग्गजों की इज्जत
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यूपी में कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी किसी को उम्मीद तक नहीं थी। राजनाथ ने अटल का रिकॉर्ड तोड़ा तो राहुल को कड़ी चुनौती मिली और बना है इतिहास।
राजनीतिक पंडितों को शायद ही इस बात का इल्म रहा होगा कि भाजपा का समर्थन कर रहे तमाम एक्जिट पोल इस कदर मोदी की सुनामी को सच साबित कर देंगे।
यूपी में तो इस सुनामी ने मोदी के लोकप्रिय जुमले सबका यानी सपा, बसपा और कांग्रेस की जमीन ही खत्म कर दी।
आम आदमी पार्टी और बसपा जहां यूपी में खाता तक नहीं खोल सकीं, तो सपा और कांग्रेस महज अपने परिवार को बचा सकीं।
नाकों चने चबाकर जीते युवराज
16 मई की सुबह काउंटिंग शुरू होने से पहले आजाद भारत के इतिहास में शायद ही गांधी परिवार को सियासी खौफ का सामना करना पड़ा होगा।
स्मृति ईरानी लीड कर रही थीं, राहुल दो बार आगे निकले पर ईरानी ने दोनों बार उन्हें पीछे छोड़ दिया। लगा मानो ये चुनाव दिग्गजों के खिलाफ जनादेश है।
हालांकि, अमेठी में राहुल गांधी की किस्मत अच्छी रही। काफी देर तक 20 हजार की बढ़त कायम रखने के बाद उन्होंने आखिरकार करीब एक लाख 10 हजार वोट से स्मृति ईरानी को हरा दिया।
डर आप के कुमार विश्वास ने पैदा किया, जादू चला मोदी की सुनामी और घर-घर की बहु स्मृति ईरानी का। सही मायने में इसे हार नहीं कहा जा सकता। ये जीत है, अहंकार के ऊपर।
...तो हार जातीं अखिलेश की डिम्पल
जनादेश सिर्फ राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ नहीं था। यूपी की जनता ने कुछ और ही तय कर रखा था। कुछ ऐसा, जिसकी भाजपा के मोदी और शाह को भी उम्मीद नहीं थी।
भाजपा नेता खुद मान रहे थे कि यूपी में 45 से 55 सीटों पर उनकी जीत होगी। कन्नौज से अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को चुनौती दे पाने का तो ख्याल भी शायद ही दिमाग से गुजरा होगा।
पर, जनता ने ये कर दिखाया। भाजपा के प्रत्याशी सुब्रत पाठक ने 469257 वोट हासिल कर डिंपल को करीब-करीब हरा ही दिया था। सुरक्षित सीट पर भी डिंपल को महज 489164 वोट हासिल हुए।
यानी, फर्क सिर्फ 19907 मतों का रह गया और रिजल्ट डिक्लेयर हो गया।
तीसरे नंबर पर रहे बसपा के निर्मल तिवारी के अगर 21 हजार वोट भी पाठक को गए होते, तो डिंपल हार चुकी होंती।
उफ! मोदी लहर में उड़ गए इतने मंत्री
ये उम्मीद न सपा को रही होगी और न ही बसपा या भाजपा को कि कांग्रेस के तीन केंद्रीय मंत्री यूपी में बुरी तरह पिट जाएंगे। ऐसा ही हुआ, तो सभी हैरान रह गए। सपा से भाजपा में आए गोंडा के प्रत्याशी कीर्तिवर्धन सिंह ने 351965 वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस के बड़बोले बेनी प्रसाद वर्मा 99442 वोट पाकर चौथे स्थान पर रह गए।
ये वही बेनी थे, जो केंद्रीय अनुसूचित जाति के चेयरमैन पीएल पुनिया के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। वजह थी पुनिया को बेनी की बाराबंकी सीट से टिकट दिया जाना।
लेकिन, जनता इनके खिलाफ थी। पुनिया को भी बाराबंकी में बुरी तरह शर्मसार होना पड़ा। उन्हें भाजपा की प्रियंका सिंह रावत ने 454214 वोट हासिल कर दो लाख से भी ज्यादा वोटों से शिकस्त दे डाली।
यही हश्र केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह का भी हुआ। इन्हें क्रमशः कानपुर, धौरहरा और कुशीनगर में करारी हार का सामना करना पड़ा।