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विवेक तिवारी हत्याकांड में नया मोड़, कोर्ट ने माना सिपाही संदीप ने की थी हत्या
Fri, 08 Mar 2019 09:09 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 08 Mar 2019 09:09 AM IST
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फाइल फोटो
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गोमतीनगर में एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या के आरोपी सिपाही संदीप को जांच में क्लीनचिट देने संबंधी एसआईटी की रिपोर्ट को कोर्ट ने खारिज कर दी है। एडीजे संजय शंकर पांडेय की कोर्ट ने संदीप को विवेक की हत्या का आरोपी मानते हुए 22 मार्च तक आत्मसमर्पण के आदेश दिए हैं।
एसआईटी ने अपनी जांच में सिपाही प्रशांत चौधरी को विवेक की हत्या और संदीप को सिर्फ मारपीट का आरोपी बनाया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर संदीप को जेल से रिहा किया गया था। विवेक की पत्नी कल्पना ने एसआईटी की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए कोर्ट में अर्जी दी थी, जिसकी सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया गया।
कोर्ट ने आदेश में कहा कि घटना की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी गवाह के बयान से पता चलता है कि संदीप और प्रशांत गुस्से में चिल्लाते हुए गलत दिशा से आए। संदीप ने विवेक की कार के बोनट पर डंडा मारा। इसके बाद इसी डंडे से कार में बैठी विवेक की पूर्व सहकर्मी को मारा।
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विवेचना में एकत्र सुबूतों से पता चलता है कि संदीप ने विवेक की हत्या को आसान बनाने के लिए प्रशांत की सामान्य आशय से सहायता की। वहीं, संदीप के इस कृत्य के परिणाम में हुई विवेक की हत्या के वक्त वह घटनास्थल पर ही था, लिहाजा उसके खिलाफ हत्या का मामला चलाने का पर्याप्त आधार है।
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एसआईटी ने अपनी जांच में सिपाही प्रशांत चौधरी को विवेक की हत्या और संदीप को सिर्फ मारपीट का आरोपी बनाया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर संदीप को जेल से रिहा किया गया था। विवेक की पत्नी कल्पना ने एसआईटी की रिपोर्ट को चुनौती देते हुए कोर्ट में अर्जी दी थी, जिसकी सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया गया।
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कोर्ट ने आदेश में कहा कि घटना की एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी गवाह के बयान से पता चलता है कि संदीप और प्रशांत गुस्से में चिल्लाते हुए गलत दिशा से आए। संदीप ने विवेक की कार के बोनट पर डंडा मारा। इसके बाद इसी डंडे से कार में बैठी विवेक की पूर्व सहकर्मी को मारा।
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विवेचना में एकत्र सुबूतों से पता चलता है कि संदीप ने विवेक की हत्या को आसान बनाने के लिए प्रशांत की सामान्य आशय से सहायता की। वहीं, संदीप के इस कृत्य के परिणाम में हुई विवेक की हत्या के वक्त वह घटनास्थल पर ही था, लिहाजा उसके खिलाफ हत्या का मामला चलाने का पर्याप्त आधार है।
कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एसएसपी के आदेश पर हत्याकांड की विवेचना महानगर थाने के प्रभारी निरीक्षक को सौंप दी गई। लेकिन जब यह स्पष्ट नहीं हुआ कि घटना गोमतीनगर थाना क्षेत्र की थी तो विवेचना अन्य थाने से क्यों कराई गई।
कोर्ट ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि एसएसपी को रिपोर्ट दर्ज होते ही इस बात की जानकारी हो गई थी कि इस हत्याकांड में गोमतीनगर थाने के सिपाही ही शामिल हैं।
कोर्ट ने पुलिस पर अंगुली उठाते हुए कहा कि आरोपियों के नाम व पहचान स्पष्ट होने पर भी हत्याकांड के कई घंटे बाद आरोपी सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दोनों हत्याकांड के बाद पुलिस के साथ ही थे। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के बाद भी अज्ञात पुलिसकर्मी ही बताती रही।
कोर्ट ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि एसएसपी को रिपोर्ट दर्ज होते ही इस बात की जानकारी हो गई थी कि इस हत्याकांड में गोमतीनगर थाने के सिपाही ही शामिल हैं।
कोर्ट ने पुलिस पर अंगुली उठाते हुए कहा कि आरोपियों के नाम व पहचान स्पष्ट होने पर भी हत्याकांड के कई घंटे बाद आरोपी सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दोनों हत्याकांड के बाद पुलिस के साथ ही थे। पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के बाद भी अज्ञात पुलिसकर्मी ही बताती रही।