पाकिस्तान के षड्यंत्र में शामिल हैं कश्मीर पर चिल्लाने वाले: विहिप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री
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विहिप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अंबरीष सिंह ने जम्मू-कश्मीर को लेकर शोरशराबा करने वालों पर पाकिस्तान के षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाया है। कहा, पाकिस्तानी साजिश का शिकार मुट्ठी भर लोग कश्मीर पर राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे हैं।
पाकिस्तान में हिंदुओं के जबरिया धर्मांतरण के सवाल पर इनकी बोलती बंद हो गई है। वहां जिस तरह सिख बेटी का जबरिया धर्मांतरण कराया गया वह देश में तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों के मुंह पर करारा तमाचा है। विहिप इस पर आंख बंदकर नहीं बैठ सकती।
विहिप के स्थापना दिवस कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए उन्होंने शनिवार को यहां कहा कि विहिप की स्थापना लगभग 55 साल पहले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मुंबई स्थित महर्षि सांदीपन आश्रम में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के उत्थान के लिए हुई थी। यह संगठन आज पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रसार कर रहा है। पूरे देश में दस हजार स्थानों पर स्थापना दिवस के कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। संगठन अपने लक्ष्य को प्राप्त किए बिना चैन से नहीं बैठेगा। जब भी हिंदू संस्कृति पर कोई हमले की कोशिश करेगा तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
धर्मांतरण पर लगे पूर्ण प्रतिबंध
अंबरीष ने कहा कि विहिप धर्मांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध की पक्षधर रही है। केंद्र की मौजूदा सरकार ने इस पर काफी हद तक अंकुश लगाया है, लेकिन रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों की घुसपैठ पर पूर्ण प्रतिबंध लगना बाकी है। उम्मीद है कि केंद्र सरकार धर्मांतरण व घुसपैठ पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाएगी।
राजनीतिक स्वार्थ में राष्ट्र सम्मान से खिलवाड़ न करें
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर देश के करोड़ों लोगों और कश्मीर पंडितों के घाव पर मरहम लगाकर अखंड भारत के सपने को साकार करने की तरफ कदम बढ़ाया है। पाकिस्तानी षड्यंत्र में शामिल मुट्ठी भर नेताओं से आग्रह है कि राजनीतिक स्वार्थ में वे राष्ट्र के सम्मान व स्वाभिमान से कोई खिलवाड़ न करें। उनका यही रवैया रहा तो विहिप को ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर रुख अपनाना पड़ेगा।
कोई ताकत नहीं रोक सकती मंदिर निर्माण
अंबरीष ने कहा कि कारसेवकों ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर अस्थायी ही सही, लेकिन मंदिर तो बना ही दिया है। अब बस उसे भव्यता देना शेष है। रामलला को टेंट में देखकर हिंदू समाज को काफी पीड़ा है। इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय में नियमित सुनवाई हो रही है। तथ्य श्रीरामलला के पक्ष में है। अब कोई ताकत मंदिर निर्माण नहीं रोक सकती।